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Operation Sindoor के बाद असदुद्दीन ओवैसी की भूमिका क्यों है महत्वपूर्ण, इस लेख में जानिए?
ऑपरेशन सिंदूर के बाद अब अगला कदम यह है कि भारत के 51 सांसदों की एक टीम दुनिया के अलग-अलग देशों में जाएगी ताकि पाकिस्तान के भारत-विरोधी सच को सबके सामने लाया जा सके.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 11 months ago
पाकिस्तान को ऐसा सबक मिला है जिसे वह जल्दी नहीं भूल पाएगा. जब पाकिस्तान के तैयार किए गए खूनी आतंकवादियों ने पहलगाम में धर्म के आधार पर पर्यटकों को निशाना बनाया, तो भारत ने पाकिस्तान के अंदर जाकर उसके आतंकी ठिकानों को 100 किलोमीटर अंदर तक नष्ट कर दिया. यह अभियान ऑपरेशन सिंदूर के नाम से चला, जिसमें पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ. पाकिस्तान जो भारत को कमजोर करने के लिए "हजार जख्मों की नीति" अपनाता है, उसे उम्मीद नहीं थी कि भारत धर्म के नाम पर बांटने की उसकी चाल को नाकाम कर देगा. लेकिन इस बार, एकजुट भारत ने आतंकवाद के खिलाफ मजबूती से जवाब दिया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 मई को देश को संबोधित करते हुए कहा कि “इस आतंकी हमले के बाद, पूरा देश — हर नागरिक, हर समाज, हर वर्ग, हर राजनीतिक पार्टी — एक साथ खड़ा हो गया और आतंक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की. हमने सेना को आतंकवादियों को मिटाने की पूरी छूट दी. और आज हर आतंकवादी और आतंकवादी संगठन जान चुका है कि अगर हमारी बहनों और बेटियों का सिंदूर मिटाने की कोशिश की गई, तो उसका अंजाम क्या होगा.”
ऑपरेशन सिंदूर के बाद अब अगला कदम यह है कि भारत के 51 सांसदों की एक टीम दुनिया के अलग-अलग देशों में जाएगी ताकि पाकिस्तान के भारत-विरोधी सच को सबके सामने लाया जा सके. ये सांसद सात टीमों में बांटे गए हैं, और हर टीम में एक मुस्लिम सांसद शामिल है.
इन टीमों में शामिल कुछ प्रमुख लोग हैं
• पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद
• नामित सांसद गुलाम अली खटाना
• कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री सलमान खुर्शीद
• ई. टी. मोहम्मद बशीर (IUML पार्टी)
• सर्फराज अहमद (JMM सांसद)
• पूर्व राजदूत जावेद अशरफ
• पूर्व राजदूत और नीति विशेषज्ञ सैयद अकबरुद्दीन
• पूर्व पत्रकार और मंत्री एम. जे. अकबर
इन सभी का देश के अलग-अलग हिस्सों से संबंध है, जिससे पूरे भारत का प्रतिनिधित्व होता है.
लेकिन सबसे ज़्यादा ध्यान खींचने वाला नाम है AIMIM के नेता और सांसद असदुद्दीन ओवैसी का. जब पूरा भारत एकजुट होकर बोल रहा है — संसद से लेकर खेल के मैदानों तक, गांवों से लेकर मस्जिदों तक — ओवैसी भारत की ओर से एक मजबूत आवाज़ बनकर सामने आए हैं. वे भारतीय मुसलमानों की भी बात करते हैं.
अपने भाषणों, प्रेस कॉन्फ़्रेंस, सोशल मीडिया पोस्ट और इंटरव्यूज़ में वे लगातार सबसे आगे रहे हैं.
रविवार को एक इंटरव्यू में असदुद्दीन ओवैसी ने कहा: "मैं और आरएसएस समंदर के दो किनारे हैं", यानी हमारे विचार एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं. पहले भी एक बार उन्होंने सरकार से कहा था कि वह आम कश्मीरियों से बात करे. जब पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद सभी पार्टियों की एक बैठक बुलाई गई, और ओवैसी को उसमें नहीं बुलाया गया, तो उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा कि "जिस पार्टी के पास चुना हुआ सांसद है, उसे ऐसे अहम मुद्दे पर जरूर सुना जाना चाहिए".
इस पोस्ट के कुछ घंटों बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने उन्हें खुद फोन करके बैठक में आने को कहा, और ओवैसी ने फिर उस बैठक में हिस्सा लिया. यह बात खुद ओवैसी ने एक इंटरव्यू में बताई. तेलंगाना से शुरू हुई उनकी पार्टी AIMIM अब महाराष्ट्र से लेकर बिहार तक सक्रिय हो गई है, और इसका राष्ट्रीय स्तर पर उभरना एक दिलचस्प कहानी है.
ओवैसी आज भारतीय मुसलमानों के एक तेज़ और समझदार प्रवक्ता के रूप में सामने आए हैं, जिन्हें क्लासरूम से लेकर बोर्डरूम और मीडिया तक गंभीरता से सुना जाता है. हालांकि पहले ओवैसी को कुछ लोग "वोट काटने वाला" कहते थे, क्योंकि वे कई बार ऐसे चुनाव लड़ते थे जहां जीतने की उम्मीद कम होती थी. कुछ लोग उन्हें "बीजेपी की बी टीम" भी कहते थे — ये आरोप लगाने वालों पर निर्भर करता था.
लेकिन पहलगाम हमले के बाद, असदुद्दीन ओवैसी एक बिल्कुल नए रूप में नजर आए. उन्होंने तिरंगा अपने सिर पर बांधा और पाकिस्तान को साफ और कड़े संदेश दिए. यह एक बहुत ही ताकतवर तस्वीर बन गई. जब एक इंटरव्यू में उनसे वक्फ (Waqf) के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "यह देश का आंतरिक मामला है, लेकिन अभी मेरे देश पर हमला हुआ है." उन्होंने यह भी कहा कि "देश के अंदर भले ही मतभेद हों, लेकिन जब बात देश की होती है, तो हम सब एक साथ खड़े होते हैं." यही उनका संदेश था.
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद, जो सभी पार्टियों और सभी धर्मों के सांसदों की टीम बनाई गई है, वह यह दिखाती है कि पाकिस्तान कभी भी भारत जैसा नहीं बन सकता. पाकिस्तान आतंकवाद फैलाता है, नफरत और जिहाद की फैक्ट्रियां चलाता है, और अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं का बुरा हाल करता है. ऑपरेशन सिंदूर कई मायनों में खास रहा. इसमें एक नई नीति अपनाई गई "अब अगर भारत की जमीन पर कोई हमला होगा, तो उसे युद्ध माना जाएगा," और आतंकवाद को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
भारत की सेना की ताकत के साथ-साथ, भारत की लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष सोच, और 'राष्ट्र पहले' की नीति ही भारत की असली ताकत है. सभी पार्टियों की यह साझा टीम और ओवैसी की मजबूत बात रखने की शैली, इसकी अच्छी मिसाल हैं.
जैसा कि PIB (सरकारी सूचना विभाग) ने रविवार को बताया, देश की सुरक्षा का भविष्य "एकजुटता" (jointness) में है. उन्होंने कहा "भारत की सेना अब सिर्फ सिद्धांतों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन, समुद्र और हवा — तीनों जगहों पर एक साथ, संगठित और मिलकर काम करने की पूरी ताकत रखती है. हमारी थलसेना, वायुसेना और नौसेना अब एक टीम की तरह मिलकर काम कर रही हैं.
आज जब दुश्मन परंपरागत सीमाओं को धुंधला कर रहे हैं, तो यह एकजुट ताकत यह सुनिश्चित करती है कि चाहे हिमालय की ऊँचाई पर हमला हो, समंदर की सीमा की रक्षा करनी हो, या हवा से आने वाले खतरे को रोकना हो, भारत हर चुनौती से निपटने के लिए तैयार, मजबूत और एकजुट है. राष्ट्रीय सुरक्षा का भविष्य इसी एकता में है, और भारत इसे मजबूती से आगे बढ़ा रहा है.
इसी तरह, भारत की एकता और विविधता (अनेकता में एकता) भी भारत के दुश्मनों को परेशान करती है. चाहे युद्ध का समय हो या शांति का दौर, भारत की यह राष्ट्र-प्रथम सोच और सभी धर्मों, जातियों और भाषाओं को साथ लेकर चलने वाली पहचान उसकी सबसे बड़ी ताकत है. पाकिस्तान जैसे असफल देश कभी भी इस बात को समझ नहीं सकते.
(डिस्क्लेमर: इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं, और जरूरी नहीं कि यह प्रकाशन की राय को दर्शाते हों.)
BW रिपोर्टर- सुमन के. झा, पहले BW बिज़नेसवर्ल्ड में एग्जीक्यूटिव एडिटर और डिप्टी एडिटर (उप-संपादक) थे.
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