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हम 2030 तक कार्बन एमिशन में नेट जीरो हो जाएंगे: ब्रजेश राठौर
एक ओर भारत ने जहां 2070 तक नेट जीरो होने का लक्ष्य है वहीं डायवर्सी ने इसे लेकर 2030 तक अपना लक्ष्य सेट किया है. ये अपने आप में वातावरण के लिए बेहतर है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
दुनियाभर में जहां कार्बन एमिशन को कम करने को लेकर लगातार काम किया जा रहा है वहीं दूसरी ओर अलग-अलग कंपनियां भी इसे लेकर काम शुरु कर चुकी है. 11 हजार से ज्यादा ग्राहकों को अपनी सेवा देने वाली डॉयवर्सी ने अपने लिए 2030 तक नेट जीरो होने का लक्ष्य तय किया है. ये जानकारी डायवर्सी के साउथ एशिया क्षेत्र के वाइस प्रेसीडेंट बृजेश राठौर ने दी. वो IHA BW Hotelier के 7 वें संस्करण में अपनी बात रख रहे थे.
125 सालों से काम कर रही है कंपनी
डायवर्सी के साउथ एशिया क्षेत्र के वाइस प्रेसीडेंट बृजेश राठौर ने कहा कि इस साल अगस्त में हमें 100 साल हो गए हैं. हमारी शुरुआत शिकागो की एक स्ट्रीट से हुई थी, लेकिन आज हम 100 साल का सफर पूरा कर चुके हैं. किसी भी कंपनी के लिए 100 साल तक सर्वाइव करना आसान नहीं होता है. लेकिन हम सर्वाइव ही नहीं कर रहे हैं बल्कि हम लोग तेजी से आगे बढ रहे हैं. आज हम दुनिया के 130 देशों में काम कर रहे हैं. मैं पिछले 25 सालों से इसी कंपनी के साथ काम कर रहा हूं, मैने कंपनी तो चेंज नहीं की लेकिन मेरा विजिटिंग कार्ड चेंज हो रहा है. लेकिन हाल ही में डेविल सी को सोलेनेस ने अधिग्रहण कर दिया.
ये एक कंपनी जो 125 सालों से ये एक वाटर सॉल्यूशन कंपनी है. जो कई देशों में काम कर रही है. आज ये कंपनी यूरोप और नार्थ अमेरिका काम करती है. लेकिन एशिया में इसकी मौजूदगी नहीं थी. लेकिन डेविल सी एशिया में काम करती है. डेविल सी आज सोलेनस का हिस्सा है. इस अधिग्रहरण का सबसे बड़ा फायदा ये है कि आज पूरी दुनिया में हमारे 71 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट मौजूद हैं.
सबसे अहम है सस्टेनेबिलिट का विषय
डायवर्सी के साउथ एशिया क्षेत्र के वाइस प्रेसीडेंट बृजेश राठौर ने कहा कि मैं अब सस्टेनेबिलिटी पर आता हूं जिसमें आप सभी लोग ज्यादा इंट्रेस्टेड हैं. आज हम लोग अमेरिका और यूरोप से सामान इंपोर्ट कर रहे हैं. इसमें कार्बन एमिशन बहुत ज्यादा होता है. लेकिन हमारी 71 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और हमारा टर्न ओवर 7.2 बिलियन डॉलर है. साउथ एशिया में हम 6 बाजार में काम कर रहे हैं. इनमें भारत एक है. आज इन 6 बाजारों में हमारे पास 11000 कस्टमर हैं.
भारत में हमारे पास दो मैन्युफैक्चरिंग यूनिट हैं. इनमें पहली हरियाणा में है और दूसरी गुजरात में है. आज हम लोग इस काबिलियत है कि हम एक छोटे से समय में अपने कस्टमर की जरूरत को पूरा कर सकते हैं. हमारा कार्बन एमिशन काफी कम है. हमारे ग्राहकों को 90 प्रतिशत सामान जो डिलीवर किया जाता है वो भारत में ही बना हुआ है. आज हमने बड़ी जॉब अपार्चुनिटी मुहैया कराई है. आज हमारे 870 डिस्ट्रीब्यूसन सेंटर हैं, जिसके जरिए हम काफी कम समय में लोगों को सामान मुहैया करा सकते हैं.
क्या है 2030 का लक्ष्य?
डायवर्सी के साउथ एशिया क्षेत्र के वाइस प्रेसीडेंट बृजेश राठौर ने बताया कि 2030 मैं हमारा लक्ष्य है कि हम एनर्जी, वॉटर, वेस्ट और ग्रीन हाउस गै एमिशन को लेकर काम करेंगे. 2030 तक इन चार मुद्दों पर हमारा पॉजिटिव इंपैक्ट होगा. 2050 में हमारा कार्बन एमिशन नेट जीरो हो जाएगा. जबकि भारत का लक्ष्य 2070 तक कार्बन एमिशन में नेट जीरो होने का है. हमारा मकसद ये भी है 2030 तक हम अपनी कोर पैकेजिंग जो कि पूरी तरह रि साइक्लेबल, रि यूजेबल और कंपोस्टेबल हो जाएगी.
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