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ट्रंप की अनिश्चितता : वैश्विक वित्तीय बाजारों में नई अस्थिरता का दौर

ट्रंप का दूसरा कार्यकाल, एक 'ब्लैक स्वान' के रूप में, वित्तीय जोखिम की एक नई परिभाषा प्रस्तुत करता है, जिसे समझना और प्रबंधित करना ही बचाव की कुंजी है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

जनवरी 2025 में डोनाल्ड ट्रंप की व्हाइट हाउस में वापसी ने न केवल उनकी राजनीतिक पकड़ को फिर से मजबूत किया है, बल्कि वैश्विक वित्तीय बाजारों में गहरी और संरचनात्मक अनिश्चितता को भी पुनः स्थापित कर दिया है. पहले कार्यकाल के विपरीत, इस बार वास्तविक जोखिम उनके प्रारंभिक कदमों में नहीं, बल्कि उनके बाद आने वाले अचानक और अक्सर विरोधाभासी निर्णयों में निहित है. ट्रंप की दूसरी चालें, अप्रत्याशित नीतिगत बदलाव, आवेगपूर्ण दिशा परिवर्तन, और विरोधाभासी वक्तव्य एक ऐसा माहौल बनाते हैं जहाँ अस्थिरता ही सामान्य बन जाती है. निवेशक अब नीतियों पर नहीं, बल्कि अनपेक्ष्यनीयता पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं. यही कारण है कि अत्यधिक प्रभावशाली, पूर्वानुमान से परे, और पारंपरिक मॉडलिंग की सीमाओं के बाहर ट्रंप का राष्ट्रपति पद नया ब्लैक स्वान बन गया है.

व्हिपलैश गवर्नेंस: एक क़दम आगे, दो पीछे
सत्ता में वापसी के केवल छह महीनों में ही ट्रंप ने बार-बार दिखाया है कि उनके निर्णय अस्थायी, परिवर्तनीय और अक्सर पलटे जाने के लिए ही होते हैं. उन्होंने नाटो के लिए अमेरिकी योगदान को अचानक रोक दिया, इसे “पुराना” कहकर नकारा, और फिर कुछ ही दिनों में “पुनर्गठित समझौते” के तहत आंशिक फंडिंग को मंज़ूरी दे दी. उन्होंने एशियाई इलेक्ट्रॉनिक्स पर टैरिफ लगाए, जिससे वैश्विक टेक शेयरों में तेज गिरावट आई, और फिर अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के भारी दबाव के बाद उन्हें वापस ले लिया.

ESG निवेश पर एक व्यापक कार्यकारी आदेश घोषित किया गया, जिसने इसे पेंशन फंड्स से प्रतिबंधित कर दिया, लेकिन कुछ हफ्तों में ही “अमेरिकन इंटरेस्ट इन्वेस्टिंग” नामक नई गाइडलाइंस के तहत ESG को नए लेबल के साथ फिर से बहाल कर दिया गया. जून में, ट्रंप ने अवैध अप्रवासियों के बड़े पैमाने पर निर्वासन का वादा किया, जिससे कृषि और निर्माण क्षेत्रों में अफ़रा-तफ़री मच गई। दो हफ्तों बाद, यह आदेश “प्रशासनिक समीक्षा” के कारण अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया. ये बदलाव नीतिगत परिष्कार नहीं हैं, बल्कि जानबूझकर किए गए व्यवधान हैं जो बाजारों में लगातार चिंता और अव्यवस्था उत्पन्न करते हैं.

बाजार अराजकता का मूल्य नहीं लगा सकते
वित्तीय बाजारों को पूर्वानुमान या कम से कम स्पष्टता की आवश्यकता होती है. ट्रंप इनमें से कोई भी नहीं देते. उनके शासन में, बाजार का नया शत्रु मंदी या महँगाई नहीं, बल्कि अनियमितता है. सोशल मीडिया पर उनके बयानों या प्रेस ब्रीफिंग्स से पूरे एसेट क्लासेज कुछ ही घंटों में ऊपर-नीचे हो जाते हैं.

VIX सूचकांक पूरे 2025 में ऊँचा बना हुआ है, भले ही कमाई और महँगाई स्थिर हो गई हो. यह दर्शाता है कि अस्थिरता का कारण आर्थिक मूलभूत तत्व नहीं, बल्कि राजनीतिक जोखिम है. ट्रंप ने पहले “कमज़ोर डॉलर” की माँग की, और फिर कुछ ही दिनों में “मजबूत डॉलर” की वकालत करते हुए मुद्रा बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव ला दिया. ट्रेजरी यील्ड्स उस समय बढ़ गईं जब उन्होंने फेड पर “धीमा चलने” का आरोप लगाया, और फिर अगली प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनकी “निर्णायक नेतृत्व” की प्रशंसा करते हुए वे यील्ड्स फिर से नीचे आ गईं. ऐसे माहौल में बाज़ार आत्मविश्वास के साथ एसेट्स का मूल्य निर्धारण नहीं कर सकते. वे अब केवल आर्थिक संकेतकों को नहीं देख रहे, वे राष्ट्रपति के मूड को पढ़ रहे हैं.

द सेकंड मूव सिंड्रोम
ट्रंप की राष्ट्रपति पद की अनोखी बात सिर्फ उनके निर्णयों का झटका नहीं है, बल्कि उन निर्णयों के उलटफेर की आवृत्ति और अनपेक्ष्यनीयता है. उनका पहला कदम सुर्खियाँ बटोरता है, लेकिन दूसरा कदम बाजारों को हिला देता है. यह व्यवहार, जानबूझकर हो या नहीं, "मैडमैन थ्योरी" की नकल करता है. एक ऐसी रणनीति जो प्रतिद्वंद्वियों को अस्थिर करने के लिए विक्षिप्तता का प्रदर्शन करती है लेकिन जब इसे घरेलू और वैश्विक नीतियों पर लागू किया जाता है, तो यह प्रणालीगत वित्तीय अस्थिरता पैदा करता है.

मार्च में, ट्रंप ने सभी ईवी सब्सिडी रद्द करने की घोषणा की, जिससे ग्रीन टेक शेयरों में भारी गिरावट आई. दस दिनों के भीतर, उन्होंने "ऊर्जा स्वतंत्रता" को बढ़ावा देने वाले नए "फ्रीडम एनर्जी" कार्यक्रम के तहत कुछ प्रोत्साहनों को फिर से शुरू कर दिया. पहले ऐलान पर प्रतिक्रिया देने वाले निवेशकों को इस पलटाव से नुकसान हुआ. यह कोई अपवाद नहीं है, बल्कि एक दोहराया जाने वाला पैटर्न है.

एक ऐसी दुनिया जो अब अमेरिका के बिना पुनर्संतुलन कर रही है
ट्रंप की अनपेक्ष्यनीयता ने अमेरिका के सहयोगियों और व्यापारिक साझेदारों को भी राजनीतिक रूप से हेज करने पर मजबूर कर दिया है. यूरोप रक्षा स्वतंत्रता की ओर तेजी से बढ़ रहा है, चीन वैश्विक व्यापार में डॉलर पर निर्भरता कम कर रहा है, और मध्य पूर्व सुरक्षा गठबंधनों में विविधता ला रहा है. ये भू-राजनीतिक पुनर्संतुलन नए जोखिम पैदा करते हैं और अमेरिकी नेतृत्व वाले आर्थिक ढाँचों की विश्वसनीयता को कम करते हैं.

यह प्रवृत्ति पूँजी प्रवाह, व्यापार समझौतों, और बहुराष्ट्रीय रणनीतियों को प्रभावित करती है. कंपनियाँ अब अमेरिकी-केंद्रित लॉजिस्टिक्स पर निर्भर रहने के बजाय स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाएँ बनाने को प्राथमिकता दे रही हैं. निवेशक अब ज्यादा पूँजी उन बाजारों में लगा रहे हैं जहाँ नीति संकेत अधिक स्थिर हैं जैसे यूरोपीय संघ, दक्षिण-पूर्व एशिया और यूएई.
निवेशकों को अब 'पर्सनैलिटी रिस्क' के खिलाफ हेज करना होगा.

एक सामान्य राष्ट्रपति काल में निवेशक मुद्रास्फीति, ब्याज दरों या भू-राजनीतिक तनाव के खिलाफ हेज करते हैं. ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में उन्हें व्यक्तित्व के खिलाफ हेज करना होगा. उनके निर्णय आँकड़ों या संस्थानों पर आधारित नहीं होते, बल्कि भावना और आवेग से प्रेरित होते हैं. इसका मतलब है कि कोई भी यहाँ तक कि उनका मंत्रिमंडल भी उनकी अगली चाल की भविष्यवाणी नहीं कर सकता.

पोर्टफोलियो मैनेजर अब बेसलाइन सुरक्षा उपायों के रूप में विकल्प स्प्रेड्स, सोना, इनवर्स ईटीएफ और करेंसी हेजेज का उपयोग बढ़ा रहे हैं. संस्थागत निवेशक बड़ी नकद स्थितियाँ रख रहे हैं, स्टॉप-लॉस तंत्र बना रहे हैं, और निवेश की समय-सीमा को छोटा कर रहे हैं. अब लक्ष्य दिशा की भविष्यवाणी करना नहीं, बल्कि तूफ़ान से बचना है.

भारतीय निवेशक भी प्रभावित हो रहे हैं. जो लोग म्यूचुअल फंड्स या अंतरराष्ट्रीय ईटीएफ के माध्यम से अमेरिकी टेक और फार्मा में निवेश कर रहे हैं, उन्हें डॉलर में उतार-चढ़ाव, अचानक व्यापार प्रतिबंधों या ट्रंप की आउटसोर्सिंग पर राय से सावधान रहना चाहिए. मुद्रा जोखिम एक केंद्रीय चिंता बन गया है, और USD-INR उतार-चढ़ाव के खिलाफ हेज करना अब अनिवार्य है.

संस्थागत क्षति अस्थिरता को और बढ़ाती है
शायद ट्रंप की वापसी का सबसे खतरनाक पहलू संस्थागत विश्वास का क्षरण है. फेडरल रिजर्व से लेकर SEC और न्याय विभाग तक, ट्रंप ने इन संस्थानों पर खुलकर हमला किया है या उन्हें दरकिनार किया है, उनकी वैधता पर सवाल उठाए हैं और उनकी स्वतंत्रता को धमकी दी है.

मई में, फेड की “डरपोक” नीति की आलोचना करने के बाद, ट्रंप ने FOMC से ब्याज दर तय करने की शक्ति छीनने का विचार पेश किया, जिससे बॉन्ड बाज़ार हिल गया. उन्होंने रेगुलेटरी एजेंसियों में अपने वफादारों की नियुक्ति को आगे बढ़ाया, जिससे प्रवर्तन कार्रवाइयाँ विलंबित हो गईं, जाँचें पटरी से उतर गईं, और व्यवसायों के लिए कानूनी अनिश्चितता बढ़ गई.
वैश्विक निवेशकों के लिए, यह अमेरिका में कानून के शासन को कमजोर करता है एक ऐसा देश जो पारंपरिक रूप से पूँजी के लिए सबसे सुरक्षित क्षेत्र माना जाता रहा है.

छिपा हुआ खर्च: विश्वास की हानि
सुर्खियों और बाज़ार के चार्ट से परे एक गहरा, धीमी गति से बढ़ने वाला जोखिम है विश्वास की हानि, निवेशक और कंपनियाँ स्थिरता, कानूनी निरंतरता, और स्पष्ट नीतिगत संकेतों के आधार पर दीर्घकालिक प्रतिबद्धताएँ करती हैं. ट्रंप की अनपेक्ष्यनीयता ये तीनों ही कमजोर कर देती है. व्यवसाय अब बड़े अमेरिकी विस्तारों में निवेश करने से हिचक रहे हैं, भविष्य में उलटफेर के डर से, वैश्विक पेंशन फंड डॉलर-निर्दिष्ट परिसंपत्तियों में अपनी हिस्सेदारी कम कर रहे हैं.

यह एक खतरनाक चक्र बनाता है, पूँजी बाहर निकलती है, वित्तीय अस्थिरता बढ़ती है, और सुरक्षित बाजार के रूप में अमेरिका की प्रीमियम गिरती है. यह कोई चक्रीय समस्या नहीं है, यह एक संरचनात्मक समस्या है. और यह आर्थिक कारकों द्वारा नहीं, बल्कि नेतृत्व के व्यवहार द्वारा संचालित है.

निष्कर्ष: ब्लैक स्वान वापस आ गया है, जोरदार और मजबूत
डोनाल्ड ट्रंप का दूसरा कार्यकाल इस बात को साबित कर चुका है जो कई लोग डरते थे, उनके पहले कार्यकाल की अनपेक्ष्यनीयता कोई एक बार की घटना नहीं थी, बल्कि एक शासन मॉडल है. इस कार्यकाल में, उनके दूसरे कदम उनके पहले कदमों से भी अधिक महत्वपूर्ण हैं. हर घोषणा के बाद अनिश्चितता होती है, और हर उलटफेर में वित्तीय जोखिम छिपा होता है.
यह सामान्य राजनीतिक जोखिम नहीं है. यह एक ऐसा राष्ट्रपति पद है जो एक वित्तीय असामान्यता की तरह व्यवहार करता है, एक सच्चा ब्लैक स्वान, इसे पूर्वानुमानित नहीं किया जा सकता, केवल प्रबंधित किया जा सकता है. ऐसी दुनिया में, निवेशकों को रक्षा पर रहना होगा, चुस्त रहना होगा, और सबसे महत्वपूर्ण, हेजिंग के साथ रहना होगा, क्योंकि जब शासन स्वयं अस्थिरता का स्रोत बन जाता है, तब जीवित रहना प्राथमिक निवेश रणनीति बन जाता है.

 

(डिस्क्लेमर : इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के व्यक्तिगत हैं और आवश्यक नहीं कि ये प्रकाशन के विचारों को दर्शाते हों.)

विनोद के बंसल, गेस्ट लेखक

(विनोद के बंसल एक अनुभवी चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं, जिनके पास वित्तीय बाजारों में 35 वर्षों से अधिक का अनुभव है. दिल्ली स्थित बंसल वैश्विक वित्तीय प्रवृत्तियों और निवेश रणनीतियों की गहरी समझ रखते हैं, जिससे वह वित्तीय क्षेत्र में एक विश्वसनीय आवाज माने जाते हैं. उनसे संपर्क किया जा सकता है: vinodkbansal@gmail.com)


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