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शशि थरूर की कुंडली में राजयोग: राजनीतिक भविष्य पर ज्योतिषीय दृष्टिकोण

विक्रम चन्दीरमानी के अनुसार अगस्त 2025 शशि थरूर के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा, जो उन्हें राजनीतिक शक्ति दिलाने के साथ उनकी दीर्घकालिक महत्वाकांक्षाओं के निकट भी ले जाएगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

शशि थरूर इस वर्ष अधिकतर समय सुर्खियों में रहे हैं, चाहे वह संसद में उनके स्पष्ट विचार हों, कांग्रेस पार्टी में उनकी बढ़ती हुई प्रतिष्ठा हो, या उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें. राष्ट्रीय मंच पर उनकी दृश्यता निरंतर बढ़ी है, जिससे उन्हें प्रशंसा और आलोचना दोनों मिली हैं.

इस वर्ष की शुरुआत में शशि थरूर के लिए एक अत्यंत परिवर्तनशील चरण शुरू हुआ. उनकी साढ़े साती यानी शनि की सात-साढ़े साल की तीव्र प्रभाव वाली अवधि इस वर्ष अप्रैल में समाप्त हुई. साढ़े साती तब शुरू होती है जब शनि जन्म चंद्र राशि से एक राशि पहले प्रवेश करता है, फिर चंद्र राशि से गुजरता है, और अंततः अगली राशि से गुजरने के साथ समाप्त होता है. यह चरण अक्सर कठिनाइयों, आत्मचिंतन, और जीवन की प्राथमिकताओं के पुनर्मूल्यांकन से चिह्नित होता है, जो अंततः व्यक्ति को आवश्यक जीवन परिवर्तनों की ओर प्रेरित करता है.
थरूर की कुंडली में शनि की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है. इसके प्रभाव ने उन्हें दीर्घकालिक लक्ष्यों को हासिल करने में सहायता की है, चाहे वह संयुक्त राष्ट्र में उनका राजनयिक करियर हो, उनका विपुल लेखन कार्य हो, या राजनीति में उनका प्रवेश। ये सभी क्षेत्र धैर्य, अनुशासन, और सतत प्रयास की मांग करते हैं, वे गुण जिन्हें शनि, जो कि महान अनुशासक है, समय के साथ विकसित करता है.

शशि थरूर की यात्रा पर शनि ने विशेष रूप से 1997 से 2016 तक के लगभग दो दशकों के उनके शनि दशा काल के दौरान एक गहरा और निर्माणात्मक प्रभाव डाला है. एक निर्णायक अध्याय चंद्र भुक्ति (फरवरी 2008 से सितंबर 2009) के दौरान सामने आया, जब थरूर पहली बार संसद में प्रवेश किए और विदेश राज्य मंत्री नियुक्त हुए. यह मुख्यधारा की राजनीति में उनका निर्णायक प्रवेश था. यह गति मंगल भुक्ति (सितंबर 2009 से अक्टूबर 2010) में भी बनी रही, जिसने राष्ट्रीय राजनीति में उनकी पकड़ को मजबूत किया.

इसके बाद राहु भुक्ति (अक्टूबर 2010 से अगस्त 2013) आई, जिसमें थरूर मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री के रूप में कार्यरत रहे और प्रमुख नीति क्षेत्रों को संभाला. फिर बृहस्पति भुक्ति (अगस्त 2013 से मार्च 2016) आई, जो यूपीए-दो शासन के अंतिम चरण और उनके शनि दशा के समापन के साथ मेल खाती है, जो उनके सार्वजनिक जीवन के एक बुनियादी काल को प्रभावी ढंग से समाप्त करता है.

मार्च 2016 में बुध दशा के आरंभ के साथ, थरूर ने परिवर्तन के एक नए चक्र में प्रवेश किया। चंद्र भुक्ति (अप्रैल 2023 से सितंबर 2024) के दौरान उनका सांसद के रूप में चौथा कार्यकाल, साथ ही कांग्रेस कार्यसमिति में उनका शामिल होना, राजनीतिक प्रासंगिकता की एक नई लहर का संकेत था. सितंबर 2024 में प्रारंभ होने वाली मंगल भुक्ति ने तेजी से और उन्नति लाई. उन्हें संसद की विदेश मामलों पर स्थायी समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया, जो प्रभाव और जिम्मेदारी दोनों में उनकी निरंतर वृद्धि को दर्शाता है.

यह संभव है कि साढ़े साती के दौरान शशि थरूर को अपने करियर और उसकी दिशा पर गंभीरता से विचार करना पड़ा हो. यद्यपि उन्होंने विदेश मामलों और मानव संसाधन विकास जैसे प्रमुख मंत्रालयों को संभाला है, पर यह आश्चर्य की बात नहीं होगी यदि यह विद्वान सांसद महसूस करता हो कि उसकी क्षमताओं के अनुरूप उसे मान्यता या प्रभाव नहीं मिला.

कांग्रेस पार्टी को लंबे समय से एक ऐसी संस्था के रूप में देखा गया है जहाँ शक्ति गांधी परिवार के भीतर केंद्रित रहती है. दशकों पहले, एक अन्य अत्यंत योग्य और विद्वान नेता, जो दक्षिण भारत से ही थे. पी. वी. नरसिम्हा राव भी इसी प्रकार की स्थिति में थे. कई प्रमुख मंत्रालयों को संभालने के बावजूद, उन्हें यह आभास हुआ कि वे संभवतः अपने राजनीतिक करियर की ऊँचाई पर पहुँच चुके हैं और सेवानिवृत्ति की तैयारी करने लगे, जब तक कि भाग्य ने हस्तक्षेप नहीं किया. राजीव गांधी की दुखद हत्या के बाद, राव अप्रत्याशित रूप से प्रधानमंत्री बने और भारत को स्वतंत्रता के बाद के सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तनों में से एक आर्थिक उदारीकरण की ओर ले गए. पी. वी. नरसिम्हा राव की तरह ही, शशि थरूर ने भी कुछ वर्ष पहले, मई 2024 के संसदीय चुनावों से पहले सेवानिवृत्ति का संकेत दिया था. यह वही चुनाव था जिसे उन्होंने अंततः लड़ा और जीता, तथा तिरुवनंतपुरम से अपनी लोकसभा सीट बनाए रखी.

दिसंबर 2022 में, ट्विटर पर मैंने शशि थरूर के बारे में एक भविष्यवाणी ट्वीट की थी, जिसमें कहा गया था कि जनवरी से अप्रैल 2023 के बीच का समय उनके लिए लंबे समय से प्रतीक्षित प्रगति लाएगा. जनवरी 2023 में, शशि थरूर ने सार्वजनिक रूप से केरल के मुख्यमंत्री बनने की अपनी इच्छा प्रकट की. प्रतिक्रिया के बाद, उन्होंने यह बयान वापस ले लिया. कुछ महीने बाद, अगस्त में, थरूर को कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) में शामिल किया गया एक ऐसा पद जो अब तक उन्हें नहीं मिला था. रोचक बात यह है कि मीडिया रिपोर्टों ने पुष्टि की कि उन्हें शामिल करने का निर्णय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 85वें अधिवेशन के दौरान लिया गया, जो 24 से 26 फरवरी 2023 तक छत्तीसगढ़ के रायपुर में आयोजित हुआ, ठीक उसी समयावधि के मध्य में जो मैंने इंगित की थी.

जनवरी 2025 में, मैंने एक ज्योतिषीय भविष्यवाणी की थी कि शशि थरूर जल्द ही नए लक्ष्य तय करेंगे, बड़ी जिम्मेदारियाँ संभालेंगे, और वर्ष के दौरान मतदाताओं और आम जनता को साहसिक नए पहलों से चौंकाएंगे. मैंने मार्च से मई 2025 के बीच की अवधि को उनके राजनीतिक सफर में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में पहचाना था, जिसके शुरुआती संकेत फरवरी में ही सामने आ सकते थे. मैंने 2025 को थरूर के लिए "परिवर्तन का वर्ष" बताया था, एक ऐसा समय जब वह परिचित भूमिकाओं से आगे बढ़ेंगे और एक नई दिशा निर्धारित करेंगे.

भविष्यवाणी के अनुरूप, फरवरी 2025 के अंतिम सप्ताह में, शशि थरूर ने सार्वजनिक रूप से खुद को केरल के मुख्यमंत्री पद के लिए योग्य घोषित कर सुर्खियाँ बटोरीं, और यह भी कहा कि अगर पार्टी ने उनके सामर्थ्य को नहीं पहचाना तो उनके पास "अन्य विकल्प" भी हैं. तब से, पर्यवेक्षकों ने थरूर और कांग्रेस पार्टी के बीच बढ़ती दूरी को नोट किया है, जिसे कई घटनाक्रमों ने और भी प्रबल किया है.

प्रधानमंत्री के प्रति उनकी खुली प्रशंसा, उन विदेश दौरों में उनका शामिल होना जहाँ भारत-पाकिस्तान संघर्ष पर विदेशी राजधानियों को जानकारी दी गई, और हाल ही में, 1975 में लगाए गए आपातकाल की सार्वजनिक आलोचना, जो कांग्रेस पार्टी के इतिहास का एक संवेदनशील अध्याय है, कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को रास नहीं आई है. इन कदमों को कई लोग पार्टी लाइन से विचलन के रूप में देख रहे हैं, जिससे थरूर की अगली राजनीतिक चाल को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं और यह सवाल उठने लगा है कि क्या कोई बड़ा बदलाव सामने आने वाला है. नरसिंहा राव के विपरीत, थरूर के राजनीतिक करियर को गति देने के लिए शायद किसी अप्रत्याशित घटना की आवश्यकता नहीं है.

शशि थरूर के लिए ज्योतिषीय माहौल अत्यंत अनुकूल है और इसके 2026 तक अनुकूल बने रहने की संभावना है. आने वाले समय की एक झलक अगस्त 2025 में ही दिखाई दे सकती है. अगस्त के दौरान एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम होने की संभावना है, ऐसा घटनाक्रम जो थरूर के पक्ष में काम करेगा और उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को एक मजबूत बढ़ावा देगा.

थरूर के भाजपा में शामिल होने और उन्हें एक केंद्रीय मंत्रालय मिलने की अटकलें तेज हो रही हैं. इसी बीच, इस बात के भी प्रबल संकेत मिल रहे हैं कि थरूर केरल के मुख्यमंत्री बनने के इच्छुक हैं. हालांकि, कांग्रेस पार्टी ने अब तक उन्हें मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश करने के किसी इरादे का संकेत नहीं दिया है.

ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, सितारे संकेत देते हैं कि घटनाएँ अगस्त 2025 से ही घटित होना शुरू हो सकती हैं, जो उनके राजनीतिक मार्ग में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है. आने वाला वर्ष, 2026, थरूर के करियर में एक परिवर्तनकारी काल होगा,  एक ऐसा समय जब उनके सबसे महत्वाकांक्षी लक्ष्य साकार हो सकते हैं. लंबे समय से संजोए गए सपने आखिरकार साकार हो सकते हैं. यदि वे केरल विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का निर्णय लेते हैं, तो उन्हें अत्यंत अनुकूल ज्योतिषीय वातावरण का लाभ मिलेगा. सितारे किसी संकीर्ण जीत की ओर इशारा नहीं करते, वे एक प्रचंड विजय की ओर संकेत करते हैं. जो सरकार बनेगी वह संभवतः एक गठबंधन होगी, जिसमें थरूर की भूमिका केंद्रीय और प्रभावशाली होगी. इसके अतिरिक्त, वे स्वयं कुछ प्रमुख कैबिनेट विभाग अपने पास रख सकते हैं. अगस्त 2025 उनके करियर को एक नई दिशा देने के लिए तैयार है, जिससे उन्हें शक्ति और एक बढ़ी हुई सुरक्षा की भावना प्राप्त होगी, और वे अपने अंतिम लक्ष्यों के और अधिक निकट पहुँचेंगे. अगस्त की घटनाएँ कई लोगों को चौंका देंगी. उसके बाद लगभग हर महीना महत्वपूर्ण प्रगति लेकर आएगा. शशि थरूर को कोई रोक नहीं पाएगा.
 

डिस्क्लेमर: इस लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के अपने हैं और जरूरी नहीं कि यह प्रकाशन के विचारों से मेल खाते हों.

अतिथि लेखक- विक्रम चन्दीरमानी, सेलेब्रिटी एस्ट्रोलॉजर

(विक्रम चन्दीरमानी, 2001 से ज्योतिष का अभ्यास कर रहे हैं, वे वेदिक और पश्चिमी ज्योतिष के सिद्धांतों को अपनी सहज क्षमताओं के साथ मिलाकर भविष्य के बारे में गहरे Insights प्रदान करते हैं.)

 


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