✕

होम / एक्सपर्ट ओपिनियन / चीन की घेरेबंदी का जवाब: भारत की उभरती परिधि रणनीति

चीन की घेरेबंदी का जवाब: भारत की उभरती परिधि रणनीति

भारत की विदेश नीति अब रक्षात्मक ढांचे से बाहर निकलकर एक नई दिशा में बढ़ रही है, जिसमें न केवल अपनी सीमाओं की रक्षा, बल्कि चीन की रणनीतिक परिधि को प्रभावित करने का प्रयास भी शामिल है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

अक्टूबर में भारत मंगोलिया के राष्ट्रपति उखनागीन खुरेलसुख के स्वागत में लाल कालीन बिछाएगा. सिर्फ दो महीने बाद, व्लादिमीर पुतिन वार्षिक भारत-रूस शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली पहुंचेंगे. इन दोनों दौरों को एक साथ देखें तो यह भारत की एक सोची-समझी कोशिश को दर्शाता है. उन देशों के साथ संबंधों को गहराना जो चीन की सीमाओं पर स्थित हैं. संदेश स्पष्ट है: अगर चीन पाकिस्तान, नेपाल और म्यांमार के माध्यम से भारत को घेरने की कोशिश कर रहा है, तो दिल्ली अब चुपचाप बीजिंग की अपनी परिधि को आकार देने के तरीके तलाश रही है.

सीमा प्रबंधन से बिना सीमाओं वाली रणनीति तक

कई वर्षों तक भारत की चीन नीति बचाव पर केंद्रित रही, जिसमें सीमा की सुरक्षा, तनाव के संकेत देना और कुछ हद तक आर्थिक दूरी बनाना शामिल था. इसके विपरीत, चीन की रणनीति हमेशा विस्तार और अपने चारों ओर प्रभाव बढ़ाने की रही है. उसने मध्य एशिया, रूस, मंगोलिया और दक्षिण पूर्व एशिया जैसे क्षेत्रों में अपने लिए साझेदार, सुरक्षात्मक क्षेत्र (बफर जोन) और वैकल्पिक रास्ते बनाए. अब भारत भी इसी तरह का रास्ता अपनाने की कोशिश कर रहा है टकराव के लिए नहीं, बल्कि संतुलन बनाने के लिए. भारत उन देशों से रिश्ते मजबूत कर रहा है जो चीन के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं. मंगोलिया और रूस के नेताओं की भारत यात्रा इस नए, व्यापक नजरिए को दिखाती है. ये दोनों देश आकार और दृष्टिकोण में अलग हैं, लेकिन दोनों ही चीन की सीमा के पास भारत को रणनीतिक बढ़त दिला सकते हैं.

मंगोलिया: भारत की विश्वसनीयता की परीक्षा

मंगोलिया "दिग्गजों के बीच फंसी छोटी शक्ति" का क्लासिक उदाहरण है. यह एक स्थल-रुद्ध, संसाधन-संपन्न देश है जो अपने 90% से अधिक व्यापार के लिए चीन पर निर्भर है. उलानबटार लंबे समय से "तीसरे पड़ोसी" की नीति अपना रहा है. भारत, जापान और अमेरिका जैसे देशों के साथ संबंधों के माध्यम से संतुलन की तलाश. भारत के लिए, मंगोलिया एक सभ्यतागत साझेदार (बौद्ध धर्म के माध्यम से जुड़ा हुआ) और एक भू-राजनीतिक संकेत है: कि नई दिल्ली चीन की उत्तरी सीमा के साथ ऐसे तरीकों से जुड़ सकता है जो सांस्कृतिक, विकासात्मक और रणनीतिक हैं.

भारत पहले ही $1 बिलियन की ऋण रेखा की पेशकश कर चुका है और मंगोलिया की पहली तेल रिफाइनरी बनाने में मदद कर रहा है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या भारत वास्तव में डिलीवर कर सकता है. उलानबटार में वादों की तुलना में पाइपलाइन, छात्रवृत्तियों और विश्वसनीय रक्षा सहयोग अधिक मायने रखते हैं. अगर खुरेलसुख की यात्रा इन परियोजनाओं में तेजी लाती है, तो मंगोलिया भारत को एक गंभीर तीसरे पड़ोसी के रूप में देखेगा. अगर नहीं, तो चीन की भारी उपस्थिति यूं ही बनी रहेगी.

रूस: एक साझेदार जिसे चीन अपना मान बैठा है

अगर मंगोलिया पैमाना बनाने की बात है, तो रूस पैमाना संतुलित करने की. आज मास्को पश्चिमी प्रतिबंधों और यूक्रेन युद्ध के कारण अनिवार्यता के तहत बीजिंग से जुड़ा हुआ है. फिर भी यह चीन की उत्तरी सीमा और मध्य एशियाई पिछवाड़े को आकार देने वाली एक प्रमुख शक्ति बना हुआ है.

भारत रूस को चीन की कक्षा से बाहर नहीं खींच सकता. लेकिन यह पूर्ण अधिपत्य को रोक सकता है. वार्षिक शिखर सम्मेलनों, रक्षा संबंधों और ऊर्जा सहयोग को बनाए रखकर, नई दिल्ली एक बहुध्रुवीय स्थान को जीवित रखती है जिसमें रूस भारत को सिर्फ तेल या हथियारों का जूनियर खरीदार नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखता है. पुतिन की दिसंबर यात्रा आश्वासन और अवसर दोनों है: आश्वासन कि भारत अभी भी रूस को उसकी चीनी झुकाव के बावजूद महत्व देता है, और अवसर कि क्षेत्रीय संपर्कों मध्य एशिया से आर्कटिक तक पर चर्चा हो सके, जो बीजिंग के एकाधिकार को जटिल बनाते हैं.

एक परिधि रणनीति आकार ले रही है

मिलकर देखें तो मंगोलिया और रूस भारत की उभरती हुई परिधि रणनीति के दो पहलुओं को दर्शाते हैं. पहला, मंगोलिया जैसे छोटे राज्यों के साथ: विश्वसनीय परियोजनाओं, सांस्कृतिक कूटनीति और रक्षा साझेदारियों के माध्यम से चीनी प्रभुत्व के विकल्प पेश करना. और दूसरा, रूस जैसे प्रमुख शक्तियों के साथ: इतनी संलग्नता बनाए रखना कि चीन को निर्विवाद प्रधानता का आनंद न मिल सके.

यह द्वैत आवश्यक है. अगर भारत मंगोलिया को अधिक महत्व देता है, तो जोखिम है कि यह प्रतीकात्मक इशारों तक सीमित रह जाए. अगर रूस को अधिक महत्व देता है, तो जोखिम है कि यह पश्चिम के साथ उसके विवादों में फंस जाए. दोनों का संतुलन बनाए रखकर, भारत चीन की रणनीति का प्रतिबिंब बनने लगता है, एक प्रतिद्वंद्वी को विकल्पों और संबंधों से घेरना जो उसकी पकड़ को कमजोर करें.

बचने योग्य खतरे

हालांकि, ऐसी रणनीति को तीन जालों से बचना चाहिए:

1. सारहीन प्रतीकवाद : मंगोलिया चीन को नाराज करने का जोखिम तब तक नहीं उठाएगा जब तक भारत डिलीवरी नहीं दिखाता. इसी तरह, रूस भारत की ओर नहीं झुकेगा जब तक वार्षिक शिखर सम्मेलन वास्तविक सहयोग में तब्दील न हो जाएं.

2. शून्य-राशि की सोच : भारत को अपने साझेदारों पर नई दिल्ली और बीजिंग के बीच “चुनाव” करने का दबाव नहीं बनाना चाहिए. मंगोलिया और रूस दोनों बचाव की नीति अपनाएंगे. भारत को इसे स्वीकार करना होगा और इसी के भीतर काम करना होगा.

3. विस्तृत चाप की उपेक्षा : चीन-परिधि रणनीति केवल दो दौरों पर आधारित नहीं हो सकती. मध्य एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और रूसी सुदूर पूर्व सभी महत्वपूर्ण हैं, इसलिए इस रणनीति को एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि किसी एक बार की कोशिश या सीमित पहल के रूप में समाप्त मान लेना चाहिए.

बीजिंग की रणनीति से सबक

चीन लंबे समय से भारत की परिधि को उपजाऊ भूमि के रूप में देखता रहा है: नेपाली अवसंरचना में निवेश, पाकिस्तान को एक प्रॉक्सी के रूप में उपयोग करना, म्यांमार को बंदरगाह और हथियार प्रदान करना. भारत भी अब उसी रणनीति को अपना रहा है. अगर यह दृष्टिकोण स्थायी होता है, तो यह बीजिंग को एक संकेत भेजेगा: कि भारत न केवल हिमालय या हिंद महासागर, बल्कि ग्रेट वॉल के उत्तर में बसे रणनीतिक क्षेत्र को भी आकार दे सकता है.

अक्टूबर और दिसंबर से आगे

असल परीक्षा कार्यान्वयन की होगी. अगर राष्ट्रपति खुरेलसुख नई दिल्ली से हस्ताक्षरित, प्रगति कर रही परियोजनाओं के साथ लौटते हैं, तो मंगोलिया का भारत में विश्वास गहरा होगा. अगर पुतिन का दिसंबर शिखर सम्मेलन दीर्घकालिक ऊर्जा, रक्षा और संपर्क साझेदारियों की पुष्टि करता है, तो रूस भारत को एक आवश्यक संतुलनकर्ता के रूप में देखना जारी रखेगा.

मिलकर देखा जाए, तो ये यात्राएं किसी बड़ी शुरुआत का संकेत हो सकती हैं. एक ऐसी भारतीय विदेश नीति की, जो अब केवल अपनी सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि चीन से परे के क्षेत्रों को आकार देने में भी आत्मविश्वासी है.

(डिस्क्लेमर : इस लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी हैं और आवश्यक नहीं कि यह प्रकाशन के विचारों को दर्शाते हों.)

सिद्धार्थ अरोड़ा, अतिथि लेखक

(सिद्धार्थ अरोड़ा एक मैकेनिकल इंजीनियर और एमबीए (मैनेजमेंट डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट) हैं, जो वर्तमान में डेलॉइट में एआई/एमएल प्रोडक्ट मैनेजर के रूप में कार्यरत हैं और अंतरराष्ट्रीय संबंधों व विदेश नीति में गहरी रुचि रखते हैं.)

 

 


टैग्स
सम्बंधित खबरें

कविता में एक शोकगीत: मेरे मित्र और बैचमेट, हेमचंद सिरोही, IAS

केजे अल्फोंस लिखते हैं, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी और बिहार के पूर्व राज्य चुनाव आयुक्त के रूप में, हेमचंद सिरोही को प्रशासनिक कुशलता, जन-केंद्रित शासन और जनसेवा में योगदान के लिए व्यापक सम्मान प्राप्त था. उनके योगदानों में महाबोधि मंदिर को यूनेस्को की विश्व धरोहर की मान्यता दिलाना और जमीनी स्तर पर विकास की पहल शामिल थीं.

4 days ago

दो दुनियाओं के बीच जिंदगी: उथल-पुथल भरे समय की चुनौती

लेखक के अनुसार, हमारे आसपास की दुनिया उतनी नहीं बदली है, जितनी हमारे दिमाग के भीतर की दुनिया बदल गई है. लगातार आती खबरों, सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से पैदा होने वाली चिंताओं के इस दौर में चुनौती है अपना ध्यान फिर से अपने नियंत्रण में लेना और उन चीजों पर फोकस करना, जिन्हें हम नियंत्रित कर सकते हैं.

4 days ago

कलाकार की अनंत रेखाएं: जोगेन चौधरी को श्रद्धांजलि

87 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले प्रख्यात कलाकार अपने पीछे ऐसी विशिष्ट कला छोड़ गए हैं, जो उनकी खास क्रॉस-हैचिंग शैली, असामान्य रेखाओं और गहराई से मानवीय चित्रों के लिए पहचानी जाती है.

5 days ago

समुद्र मंथन का अर्थशास्त्र: समृद्धि के लिए विरोधी शक्तियों की जरूरत क्यों है

लेखिका प्रियंका शर्मा कैंतुरा इस लेख में बताती हैं कि देवताओं, असुरों और लक्ष्मी के प्राकट्य की प्राचीन कथा प्रतिस्पर्धा, सहयोग और धन सृजन के बारे में क्या सीख देती है.

1 week ago

जेमी बीटन: असाधारण दिमाग और अरबों डॉलर के कारोबार के पीछे ज्योतिषीय गणना

क्रिमसन एजुकेशन के संस्थापक की शैक्षणिक महत्वाकांक्षा, उद्यमशीलता में उभार और 2027 की संभावनाओं का ज्योतिषीय विश्लेषण

1 week ago


बड़ी खबरें

दिल्ली में 1 नवंबर से BS-6 से पुराने वाहनों की नो एंट्री, जानें किन गाड़ियों को मिलेगी छूट

इस फैसले का असर दिल्ली से सटे हरियाणा के शहरों से आने वाले वाहनों पर भी पड़ेगा. खासतौर पर गुरुग्राम और फरीदाबाद से दिल्ली आने वाले वाहन चालकों को इस नियम का ध्यान रखना होगा.

1 day ago

सरदार पटेल के विचारों पर आगे बढ़ रहा भारत, रक्षा उत्पादन 1.80 लाख करोड़ रुपये के पार: राजनाथ सिंह

सरदार पटेल की 151वीं जयंती पर भारत-भारती ने दिल्ली में आयोजित किया राष्ट्रीय समारोह, रक्षा मंत्री ने कहा- राष्ट्रीय एकता और अखंडता को चुनौती देने वाली ताकतों के खिलाफ देश एकजुट रहेगा

20 hours ago

तमिलनाडु में 5 लाख से अधिक ग्रामीण घरों को मिलेगा ब्रॉडबैंड कनेक्शन, केंद्र ने दी सब्सिडी को मंजूरी

संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के तहत तमिलनाडु के 4,767 गांवों तक मांग के आधार पर ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाई जाएगी. केंद्र की वित्तीय सहायता से ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट नेटवर्क का विस्तार और डिजिटल सेवाओं तक पहुंच आसान होगी.

1 day ago

सोना 4,200 रुपये और चांदी 10 हजार रुपये टूटी, एक साल के निचले स्तर पर पहुंचे भाव; जानें गिरावट की वजह

MCX पर चांदी करीब 5 फीसदी और सोना 3 फीसदी तक टूट गया. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई.

1 day ago

IDBI बेच रही थी LIC, उसी दौरान Fairfax की कंपनी के बोर्ड में भी रहे LIC के निदेशक

पूर्व नीति आयोग प्रमुख, RBI के डिप्टी गवर्नर, SEBI बोर्ड के सदस्य, रक्षा सचिव और LIC के चेयरमैन जैसे सार्वजनिक पदों पर रह चुके लोगों को Fairfax की भारतीय कंपनियों ने अपने साथ जोड़ा.

1 day ago