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CM देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में महाराष्ट्र का कायाकल्प

लेखक आचार्य पवन त्रिपाठी के अनुसार महाराष्ट्र की जनता का स्पष्ट जनादेश यही दर्शाता है कि अब राज्य को स्थायीत्व, विकास और दूरदर्शी नेतृत्व की आवश्यकता है, जिसे देवेंद्र फडणवीस ने बखूबी निभाया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

महाराष्ट्र के राजनीतिक इतिहास में यशवंतराव चव्हाण को संयुक्त महाराष्ट्र आन्दोलन के बाद राज्य में मंगल कलश को लाने का श्रेय जाता है. वसंतराव नाईक सबसे लंबे कार्यकाल तक मुख्यमंत्री रहे. लेकिन महाराष्ट्र के कोने-कोने में मंगल कार्यों को पहुंचाने का श्रेय अगर किसी को जाता है तो वो वर्तमान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस हैं.
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र को विकास की अभूतपूर्व गति प्रदान की है. आज टेस्ला की कार हिंदुस्तान में लॉन्च होती है तो इस कार को स्वागत करते हुए फडणवीस जी की तस्वीर सबसे पहले प्रकाशित होती है. उनके नेतृत्व में महाराष्ट्र विदेशी प्रत्यक्ष निवेश प्राप्त करने वाला सबसे बड़ा राज्य बन गया है.
 
मुख्यमंत्री फडणवीस के नेतृत्व में महाराष्ट्र कारोबार में भी शीर्ष पर मौजूद है. वर्त्तमान सरकार के कार्यकाल में वो परियोजनाएं भी साकार होती दिख रही हैं जो कई दशक से लटकी हुई थीं. उदाहरण की तौर पर मुंबई और न्हावाशेवा को जोड़ने वाले अटल सेतु की परिकल्पना 1964 में की गई थी, लेकिन पूरे छह दशक बाद देवेन्द्र फडणवीस जी के ही कार्यकाल में न्हावाशेवा सी लिंक परियोजना की मंजूरी, कार्यान्वयन और लोकार्पण हो सका.
 
इसी तरह से मुंबई की कोस्टल रोड परियोजना की परिकल्पना 1952 में की गई थी. तब से लेकर कई दशक तक ये परियोजना सिर्फ कागजों पर बनी रही. विधान मंडल की प्रश्नोत्तरी में भी बार-बार इस परियोजना पर प्रश्न पूछे गए और सरकार ने इससे जुड़े हर सवाल का सटीक उत्तर दिया. उन्होंने अपने प्रथम कार्यकाल में कोस्टल रोड की परियोजना का शिलान्यास किया और उनके ही कार्यकाल में ही ये योजना लोकार्पित की गई.
 
दो और परियोजनाएं हैं जो हर किसी की नजर में हैं. पहली मुंबई मेट्रो की परियोजना और दूसरी मुंबई में मेट्रो परियोजना का विस्तार। बॉम्बे अर्बन टाउन प्लानिंग 1, जो 1970 के दशक में प्रारंभ हुई. मुंबई में मेट्रो के एक चरण का निर्माण कार्य ही हो पाया. इस परियोजना का एक फेज तो प्रारंभ हो गया लेकिन मुंबई मेट्रो के कई कॉरिडोर, जैसे- मेट्रो लाइन 2ए, मेट्रो लाइन 7 और मेट्रो लाइन 3, जैसी परियोजनाओं की भी मंजूरी से लेकर लोकार्पण तक देवेन्द्र फडणवीस जी के कार्यकाल में ही संभव हो सका. लेकिन जब ढाई वर्षों के लिए 2019 से 2022 की कार्यावधि में सीएम फडणवीस सत्ता में नहीं थे तो मेट्रो की इन परियोजनाओं को तत्कालीन उद्धव ठाकरे की सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया था, यार्ड के विवाद के नाम पर परियोजनाएं रोक दी गई थीं.
 
फडणवीस की सरकार बनते ही इस परियोजनाओं को गति मिलना प्रारंभ हुआ. मुंबई ही नहीं नागपुर मेट्रो का भी शुभांरभ उन्हीं के कार्यकाल में हुआ. ठाणे समेत अन्य कई शहरों में मेट्रो की परियोजनाएं चल रही हैं. जब तक वो सीएम नहीं बने थे तब तक अलग राजनीतिक का मुद्दा अक्सर सुर्खियों में छाया रहता था. महाराष्ट्र के विकास के नाम पर राजनीति के साथ सौतेला व्यवहार होता था. कई दशक से राजनीति करने वालों ने जिस तरह से विदर्भ को विकास की हिस्सेदारी से वंचित रखा था, उससे पृथक विदर्भ की मांग गूंज रही थी लेकिन फडणवीस जी ने मुख्यमंत्री बनते ही समृद्धि महामार्ग परियोजना की संकल्पना प्रस्तुत कर अपने कार्यकाल में ही 700 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस वे को साकार कर दिया. जब से समृद्धि महामार्ग का लोकार्पण हुआ है तब से दोनों की दूरी सिमट सी गई है. इस समृद्धि महामार्ग ने मुंबई के हृदय से नागपुर के हृदय को जिस तरह से जोड़ा है, उसने नाकारात्मक राजनीति करने वालों की बोलती बंद कर दी. ये महाराष्ट्र की जीवन रेखा बन गई है. इस जीवन रेखा को साकार करने के संकल्पनाकार भी देवेन्द्र फडणवीस हैं. गड़चिरौली जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्र में विकास की योजनाओं को पहुचाने का कार्य देवेंद्र फडणवीस ने किया.
 
फडणवीस जी के कार्यकाल में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की सड़कों का क्रन्तिकारी कायाकल्प हुआ. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना पर उन्होंने इतना ज़बरदस्त फोकस किया है कि आज महाराष्ट्र का लगभग हर गांव सड़क के नेटवर्क से जुड़ गया है. महाराष्ट्र में हमेशा अकाल का भयंकर असर होता था. इन्होंने अपने पहले कार्यकाल में 11 हजार गांवों को जल युक्त शिवार अभियान से जोड़कर जिस तरह जल समृद्धि योजना को साकार किया उससे  महाराष्ट्र का बड़ा हिस्सा अकाल मुक्त हो सका. किसानों की ऋण माफ़ी के तहत छत्रपति शिवाजी महाराज की शेतकरी सम्मान योजना लाकर बड़े पैमाने पर किसानों को राहत प्रदान की गई.
 
पूरे देश में नरेंद्र मोदी जी ने मेक इन इंडिया का कार्यक्रम चलाया, उसका परिणाम आज दिखाई दे रहा है. भारत आज मोबाइल, ऑटोमोबाइल, फार्मा जैसे तमाम क्षेत्रों में न सिर्फ आत्मनिर्भर बना है, बल्कि बड़े निर्यातक के तौर पर भी उभरा है. उसी तरह से सीएम फडणवीस ने मेक इन महाराष्ट्र को बल दिया जिससे फॉक्सकॉन जैसी कंपनियां भी महाराष्ट्र की ओर आकर्षित हुईं. और यदि बीच के दिनों में उद्धव ठाकरे का कार्यकाल न आया होता तो ये निश्चित था कि फॉक्सकॉन और वेदांता की सेमीकंडक्टर परियोजना महाराष्ट्र में साकार हुईं होती.
 
मैगेनेटिक महाराष्ट्र जैसे समिट का आयोजन करके लाखों-करोड़ों रुपयों के एमओयू फडणवीस जी के कार्यकाल में ही साकार हुए और दूसरे दावोस में सीएम फडणवीस विश्वस्तरीय सीईओ की ही तरह महारष्ट्र के लिए निवेश आकर्षित करने में भी सफल रहे. पूरे देश में सर्वाधिक स्मार्ट सिटी के रूप में शुमार पुणे, ठाणे, नागपुर जैसे शहरों का भी कायाकल्प फडणवीस जी के ही कार्यकाल में हुआ. उन्होंने अपने कार्यकाल में मुंबई और पुणे जैसे बड़े शहरों को संसाधन मुहैया कराने के साथ ही महाराष्ट्र के गांवों को भी सुविधा संपन्न बनाकर उसके जीवन स्तर को ऊपर उठाया.

महाराष्ट्र की जनता ने देवेंद्र फडणवीस को  स्पष्ट जनादेश देकर यह संदेश दिया है कि अब केवल विकास एवं नीतिगत फैसले लेने वाले तथा सकारात्मक राजनीति करने वाले ही सफल होंगे.

अतिथि लेखक-आचार्य पवन त्रिपाठी  कोषाध्यक्ष , श्री सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई

(डिस्क्लेमर : इस लेख में शामिल विचार लेखक के निजी विचार हैं, यह जरूरी नहीं कि ये प्रकाशन के विचारों या दृष्टिकोण को भी दर्शाते हों.)


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