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अकेले रहने वाले पेरेंट्स की देखभाल कैसे करें? जानिए एक्सपर्ट की जुबानी 

आज के समय में अधिकांश बच्चे काम की तलाश में घर से दूर चले जाते हैं और उनके बुजुर्ग माता-पिता को अकेले रहना पड़ता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

  • राहुल मिसरा, संस्थापक वेस्टा एल्डर केयर

माता-पिता से दूर रहने वाले बहुत से लोगों के लिए यह एक आम और गंभीर चिंता का विषय है कि उनकी सर्वोत्तम देखभाल कैसे की जाए. हालांकि, कुछ महत्वपूर्ण कारकों को ध्यान में रखकर हम अपनी क्षमताओं के अनुसार उनकी देखभाल कर सकते हैं. उदाहरण के तौर पर यदि हम नीचे दी गई बातों पर ध्यान दें, तो पेरेंट्स की देखभाल से जुड़ी चिंताओं का समाधान निकल सकता है . 

खाने-पीने का ध्यान
भोजन उनके स्वास्थ से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण कारक है. जब हम अपने माता पिता से दूर होते हैं, तो हम समय पर उनके भोजन करने न करने के बारे में अत्यधिक चिंतित होते हैं. अक्सर बुजुर्ग अपनी डाइट में कटौती कर देते हैं, वह किसी एक टाइम का खाना छोड़ देते हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं. इसके अतिरिक्त, बढ़ती उम्र के चलते बुजुर्ग चीजों को भूलने भी लगते हैं. यदि वह डिमेंशिया और अल्जाइमर जैसी बीमारियों से जूझ रहे हैं, तो संभव है कि उन्हें समय पर भोजन लेना भी याद न रहे. इतना ही नहीं, कई बुजुर्ग माता-पिता ऐसी बीमारियों से पीड़ित होते हैं, जिसमें उन्हें समय पर दवा लेने की आवश्यकता होती है और यदि वे अपनी दवाएं निर्धारित समय पर नहीं लेते तो उनके स्वास्थ्य को दीर्घकालिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. इस वजह से, आपको अपने बुजुर्ग माता-पिता को अकेले नहीं छोड़ना चाहिए. भोजन और दवाओं के साथ उनकी सहायता करना इस समस्या का एकमात्र सरल समाधान है. इसके अलावा वह लोग जो किसी निजी कारण से अपने माता पिता का हर समय ध्यान नहीं रख सकते, वे अन्य विकल्प जैसे बुजुर्ग देखभाल सेवाओं के लिए साइन अप कर सकते है, जहां उनके लिए एक ऐसा व्यक्ति नियुक्त किया जाता है जो उनकी सभी जरूरतों का ख्याल रखता है.

उन्हें जरूर करें शामिल
कोई भी अपने जीवन पर नियंत्रण खोना नहीं चाहता. विशेष रूप से ऐसे लोग जिन्हें बड़े होने पर स्वतंत्रता खोने का पहले से ही डर है. इसलिए जब आप अकेले रहते हैं, तो पेरेंट्स की देखभाल की योजना बनाते समय उन्हें जरूर शामिल करना चाहिए. इससे आपके माता-पिता को अहसास होता है कि आप उनकी परवाह करते हैं. हालांकि, शुरुआत में हो सकता है कि वे आपकी बातों का विरोध करें, इसलिए आपको संवेदनशील होकर अपने माता-पिता को अपनी बात समझानी है. जब तक उन्हें तत्काल सहायता की आवश्यकता न हो, तब तक कोशिश करें कि बहुत तेज़ी से बदलावों को लागू न करें. आप कम आक्रामक तरीकों से शुरुआत कर सकते हैं. जब तक कोई आपात स्थिति न हो, तब तक 1 या 2 महत्वपूर्ण जरूरतों पर ध्यान केंद्रित करके उनकी मदद लें. उसके बाद धीरे-धीरे अन्य चीजों की ओर बढ़ें.

वित्तीय आवश्यकता पर ध्यान 
बुजुर्गों की देखभाल करने की लागत हमेशा अधिक ही होती है, इसीलिए भविष्य के खर्चों का पहले से अनुमान लगाना एक अच्छा विचार है. उनकी चिकित्सा और देखभाल की आवश्यकता के साथ-साथ उनके रहने की संभावित व्यवस्था की लागत पर भी विचार करना चाहिए. आप उन्हें अपने साथ रहने की सलाह दे सकते हैं या रोजाना खर्चे जैसे भोजन, खाद्य आपूर्ति, गृह सुधार आदि में उनकी सहायता कर सकते हैं. पूर्वानुमान से, आप यह भी निर्धारित करने में सक्षम होंगे कि क्या वे अपने लिए आवश्यक उपचार का खर्च उठा सकते हैं या उन्हें आपसे वित्तीय सहायता की आवश्यकता होगी.

जांचें, सबकुछ ठीक है ना
पता करें कि क्या बुजुर्ग माता-पिता को पहले की परिस्थितियां याद हैं या अब उन्हें चीज़े या स्थान पहचानने में समस्या हो रही है. यदि वे अपने लिविंग रूम, किसी रिश्तेदार के घर या फ़ार्मेसी के रास्ते में बार-बार भ्रमित हो रहे हैं, तो आपको इसमें अहम कदम उठाने की आवश्यकता हो सकती है. वर्तमान में, यदि यह केवल एक या दो बार होता है, तो यह कोई समस्या नहीं है. शांत रहें क्योंकि कभी-कभी यह आम है. हालांकि, अक्सर यह सलाह दी जाती है कि आप एक संज्ञानात्मक परीक्षण के लिए डॉक्टर के साथ अपॉइंटमेंट लें ताकि डिमेंशिया के प्रकार का पता लगाया जा सके. इसे ध्यान में रखते हुए, यदि आपको पता चलता है कि आपके माता-पिता अक्सर परिचित स्थानों में खो जाते हैं, तो यह एक अहम चिंता का विषय है.


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