✕

होम / एक्सपर्ट ओपिनियन / कैसे गुजराती और मारवाड़ी बनाते हैं व्यापार और वित्त में दबदबा

कैसे गुजराती और मारवाड़ी बनाते हैं व्यापार और वित्त में दबदबा

डॉ. पवन सोनी लिखते हैं कि अन्य व्यावसायिक समूहों के लिए यह एक महत्वपूर्ण सीख हो सकती है, जो अक्सर अपने उद्यम को बनाए रखने के लिए संघर्ष करते हैं या कॉर्पोरेट करियर के अंतिम दौर में हैं,

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

उदारीकरण से पहले का भारत एक व्यावसायिक समुदाय मारवाड़ियों का गढ़ था. बिरला, बजाज, डालमिया, पोद्दार, कोठारी, लोहिया, सिंघानिया, झुनझुनवाला, बांगुर, गोयनका, रुईया और श्रीराम जैसे नाम केवल भरोसे का प्रतीक नहीं थे, बल्कि ईर्ष्या का कारण भी थे. उनका व्यावसायिक कौशल, सामाजिक पूंजी और वित्तीय पकड़ भौगोलिक सीमाओं और पीढ़ियों से परे था. यह प्रभाव केवल कोलकाता, मद्रास और बॉम्बे जैसे बड़े शहरों तक ही सीमित नहीं था, बल्कि उन कस्बों और गांवों तक फैला हुआ था, जहां स्थानीय उद्यमी आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए मौजूद नहीं थे.

वहीं गुजराती तुलनात्मक रूप से बहुत कम और बिखरे हुए थे. कुछ ही व्यावसायिक घराने थे जिन्होंने प्रभाव छोड़ा, जैसे मफतलाल, लालभाई, पटेल और देसाई. पारसी-गुजराती समुदाय को भी नहीं भूलना चाहिए, जिसे वाडिया, गोदरेज और शापूरजी पालोनजी जैसे नामों ने आकार दिया. लेकिन सदी के मोड़ पर और विशेष रूप से हाल के वर्षों में एक अलग तस्वीर सामने आई है, जहां गुजराती समुदाय ने देश और विदेश दोनों में प्रमुख भूमिका निभाई है.

बाहरी रूप से देखने पर ये दोनों समुदाय काफी समान प्रतीत होते हैं, खासकर जब आप पुराने शहरों के प्रतिष्ठानों का दौरा करते हैं. लेकिन हाल के समय में इनकी कार्यशैली और सफलता की दिशा में बड़ा अंतर आ गया है. तीन मुख्य अंतर प्रमुख रूप से उभरते हैं. पहला है लक्ष्य की साहसिकता और उसे प्राप्त करने के तरीके. दूसरा है जोखिम प्रबंधन की धारणा और प्रक्रिया. तीसरा है खर्च करने का तरीका और पैसे का प्रवाह.

विश्वास और तर्क की सीमाएं

सब कुछ बड़ा सोचने और विश्वास व तर्क की सीमाएं तोड़ने की क्षमता से शुरू होता है. जहां अधिकांश मारवाड़ी व्यवसाय पीढ़ियों में विकसित होते हैं, वहीं एक गुजराती व्यावसायिक परिवार एक ही जीवनकाल में उसी स्तर का प्रभाव और विस्तार हासिल कर सकता है. अंबानी, शांघवी, पटेल (जाइडस), मेहता (टॉरेंट) और अडानी जैसे कई पहले पीढ़ी के अमीरों ने नई जमीन पर अद्भुत सफलता पाई है. अफ्रीका के कई देशों में गहराई से जुड़े गुजराती घरानों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, जैसे करीमजी जिवांजी फैमिली (तंजानिया), चंदरिया फैमिली (केन्या), माधवानी ग्रुप (युगांडा) और मोताला फैमिली (दक्षिण अफ्रीका).

भारत और विदेशों में यह विस्तार लक्ष्य की साहसिकता और संसाधनों को फैलाने की क्षमता से आया है. जहां मारवाड़ी समुदाय धार्मिक विश्वासों और सामाजिक बंधनों के कारण सात समंदर पार जाने से हिचकता है, वहीं गुजराती लोग विदेश में अपने पांव जमाने के लिए पूरी तरह तैयार रहते हैं. बड़े पैमाने और गति की एक और मिसाल है परंपरागत व्यापार आधारित व्यवसायों से हटकर नए क्षेत्रों जैसे वस्त्र, फार्मास्यूटिकल्स, उपभोक्ता वस्तुएं, परिधान और आभूषणों में कदम रखना. यह पारंपरिक व्यापार आधारित या कमोडिटी व्यवसायों से एक बड़ा बदलाव है, जिसमें मारवाड़ी समुदाय, विशेष रूप से बिरला ग्रुप, माहिर रहा है.

जोखिम को देखने का नजरिया

दूसरा और कम स्पष्ट पक्ष है जोखिम को देखने की धारणा और उसे प्रबंधित करने की क्षमता. एक मारवाड़ी के लिए व्यापार का मतलब एक नियंत्रित सीमा में काम करना है, जहां लाभ और हानि की सीमा निश्चित होती है. इसलिए इस समुदाय में वित्तीय रूप से पूरी तरह डूब जाना दुर्लभ है, लेकिन रातों-रात सफलता भी कम ही देखने को मिलती है. पारंपरिक पारिवारिक व्यवसाय में पीढ़ियों तक निवेश किया जाता है और फिर धीरे-धीरे लाभ की अपेक्षा की जाती है. यही पारिवारिक एकजुटता की व्याख्या करता है, जो दोनों समुदायों की एक समान विशेषता है. लेकिन गुजराती व्यापार को एक ‘जुआ’ मानते हैं. उनके लिए यह उच्च जोखिम और उच्च रिटर्न का खेल है.

और चूंकि पूंजी आमतौर पर समुदाय के भीतर से आसानी से मिल जाती है, पूंजी की लागत अधिक नहीं होती, और कुछ न कुछ व्यावसायिक अनुभव पारिवारिक पृष्ठभूमि से आता ही है, इसलिए नए क्षेत्रों में जोखिम लेने को प्रोत्साहन मिलता है. एक मारवाड़ी यह सोचते हुए रुक सकता है कि ‘क्या गलत हो सकता है’, जबकि एक गुजराती सोचते नहीं थकता कि ‘क्या-क्या सही हो सकता है’. यह नीचे की ओर देखने और ऊपर की ओर देखने की मानसिकता दीर्घकाल में बड़ा अंतर पैदा करती है. परिणामस्वरूप, गुजराती के लिए गति और विस्तार अधिक महत्वपूर्ण हैं, जबकि मारवाड़ी इसे अगली पीढ़ी के लिए छोड़ना बेहतर मानते हैं.

खर्च, खाने और त्योहारों की संस्कृति

आखिरी और सबसे स्पष्ट अंतर है गुजराती पैसे कैसे खर्च करते हैं. व्यंजनों की संख्या और त्योहारों की भव्यता इस बात का इशारा करती है कि एक औसत गुजराती कितना खर्चीला हो सकता है या होता है. स्विट्जरलैंड की अल्प्स से लेकर सहारा के रेगिस्तान तक आप किसी गुजराती को देख सकते हैं, एक विशिष्ट समूह में, अपने आसपास के माहौल को आकार देते हुए. उनकी दोस्ती, आवाज, सामान और मोलभाव करने की कला जगत प्रसिद्ध है, लेकिन यह भी साफ है कि वे खुद पर खर्च करना पसंद करते हैं.

रुपये-रुपये पर देखें तो एक मारवाड़ी खर्च करने में अधिक सतर्क हो सकता है चाहे वह शादी हो या अन्य सामाजिक आयोजन गुजराती की तुलना में. यह खर्च करने की प्रवृत्ति केवल त्योहारों तक सीमित नहीं है और इसके दो प्रभाव हैं. पहला, यह पैसे को अर्थव्यवस्था में प्रवाहित करता है, जिससे हर कोई लाभान्वित होता है, जैसा कि गुजरात के कई हिस्सों में देखा गया है. दूसरा, यह संपर्क बढ़ाता है, जिससे नए व्यापारिक अवसर खुलते हैं.

बड़े सपने देखने, अधिक जोखिम लेने और अधिक खर्च करने का यह त्रिस्तरीय प्रभाव एक चक्र बनाता है, जो अगली पीढ़ी के लिए भी एक आकर्षक जीवन मॉडल बन जाता है. क्यों नहीं कोई वारिस दुनिया घूमे, अपनी जीवनशैली पर खर्च करे, आत्मनिर्भर बने और फिर भी परिवार, भोजन और त्योहारों की गोद में रहे? शायद अन्य व्यावसायिक घरानों के लिए इसमें सीख है, जो अपने व्यापार को चलाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, या जो कॉर्पोरेट जीवन के अंतिम पड़ाव पर हैं. सोचने लायक बात है, और यहां "खाने" पर मजाक भी इरादतन है.

(डिस्क्लेमर : इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं और यह प्रकाशन के विचारों को आवश्यक रूप से प्रतिबिंबित नहीं करते.)

डॉ. पवन सोनी, अतिथि लेखक

(डॉ. पवन सोनी Design Your Thinking और Design Your Career पुस्तकों के बेस्टसेलिंग लेखक हैं.)


टैग्स
सम्बंधित खबरें

कविता में एक शोकगीत: मेरे मित्र और बैचमेट, हेमचंद सिरोही, IAS

केजे अल्फोंस लिखते हैं, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी और बिहार के पूर्व राज्य चुनाव आयुक्त के रूप में, हेमचंद सिरोही को प्रशासनिक कुशलता, जन-केंद्रित शासन और जनसेवा में योगदान के लिए व्यापक सम्मान प्राप्त था. उनके योगदानों में महाबोधि मंदिर को यूनेस्को की विश्व धरोहर की मान्यता दिलाना और जमीनी स्तर पर विकास की पहल शामिल थीं.

4 days ago

दो दुनियाओं के बीच जिंदगी: उथल-पुथल भरे समय की चुनौती

लेखक के अनुसार, हमारे आसपास की दुनिया उतनी नहीं बदली है, जितनी हमारे दिमाग के भीतर की दुनिया बदल गई है. लगातार आती खबरों, सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से पैदा होने वाली चिंताओं के इस दौर में चुनौती है अपना ध्यान फिर से अपने नियंत्रण में लेना और उन चीजों पर फोकस करना, जिन्हें हम नियंत्रित कर सकते हैं.

4 days ago

कलाकार की अनंत रेखाएं: जोगेन चौधरी को श्रद्धांजलि

87 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले प्रख्यात कलाकार अपने पीछे ऐसी विशिष्ट कला छोड़ गए हैं, जो उनकी खास क्रॉस-हैचिंग शैली, असामान्य रेखाओं और गहराई से मानवीय चित्रों के लिए पहचानी जाती है.

5 days ago

समुद्र मंथन का अर्थशास्त्र: समृद्धि के लिए विरोधी शक्तियों की जरूरत क्यों है

लेखिका प्रियंका शर्मा कैंतुरा इस लेख में बताती हैं कि देवताओं, असुरों और लक्ष्मी के प्राकट्य की प्राचीन कथा प्रतिस्पर्धा, सहयोग और धन सृजन के बारे में क्या सीख देती है.

1 week ago

जेमी बीटन: असाधारण दिमाग और अरबों डॉलर के कारोबार के पीछे ज्योतिषीय गणना

क्रिमसन एजुकेशन के संस्थापक की शैक्षणिक महत्वाकांक्षा, उद्यमशीलता में उभार और 2027 की संभावनाओं का ज्योतिषीय विश्लेषण

1 week ago


बड़ी खबरें

दिल्ली में 1 नवंबर से BS-6 से पुराने वाहनों की नो एंट्री, जानें किन गाड़ियों को मिलेगी छूट

इस फैसले का असर दिल्ली से सटे हरियाणा के शहरों से आने वाले वाहनों पर भी पड़ेगा. खासतौर पर गुरुग्राम और फरीदाबाद से दिल्ली आने वाले वाहन चालकों को इस नियम का ध्यान रखना होगा.

1 day ago

सरदार पटेल के विचारों पर आगे बढ़ रहा भारत, रक्षा उत्पादन 1.80 लाख करोड़ रुपये के पार: राजनाथ सिंह

सरदार पटेल की 151वीं जयंती पर भारत-भारती ने दिल्ली में आयोजित किया राष्ट्रीय समारोह, रक्षा मंत्री ने कहा- राष्ट्रीय एकता और अखंडता को चुनौती देने वाली ताकतों के खिलाफ देश एकजुट रहेगा

20 hours ago

तमिलनाडु में 5 लाख से अधिक ग्रामीण घरों को मिलेगा ब्रॉडबैंड कनेक्शन, केंद्र ने दी सब्सिडी को मंजूरी

संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के तहत तमिलनाडु के 4,767 गांवों तक मांग के आधार पर ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाई जाएगी. केंद्र की वित्तीय सहायता से ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट नेटवर्क का विस्तार और डिजिटल सेवाओं तक पहुंच आसान होगी.

1 day ago

सोना 4,200 रुपये और चांदी 10 हजार रुपये टूटी, एक साल के निचले स्तर पर पहुंचे भाव; जानें गिरावट की वजह

MCX पर चांदी करीब 5 फीसदी और सोना 3 फीसदी तक टूट गया. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई.

1 day ago

IDBI बेच रही थी LIC, उसी दौरान Fairfax की कंपनी के बोर्ड में भी रहे LIC के निदेशक

पूर्व नीति आयोग प्रमुख, RBI के डिप्टी गवर्नर, SEBI बोर्ड के सदस्य, रक्षा सचिव और LIC के चेयरमैन जैसे सार्वजनिक पदों पर रह चुके लोगों को Fairfax की भारतीय कंपनियों ने अपने साथ जोड़ा.

1 day ago