होम / एक्सपर्ट ओपिनियन / संस्थापक पर निर्भरता: क्या आपका बिज़नेस आपके बिना भी चल पाएगा?

संस्थापक पर निर्भरता: क्या आपका बिज़नेस आपके बिना भी चल पाएगा?

विनोद के. बंसल का कहना है कि अब हमें उस संस्थापक की भी सराहना करनी चाहिए जो समझदारी से ज़िम्मेदारी सौंपता है. जो सिर्फ़ कमाई नहीं, बल्कि मज़बूत सिस्टम भी बनाता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

भारत में हजारों छोटे और मध्यम स्तर के व्यवसाय हैं जिन्हें पहले पीढ़ी के उद्यमियों ने बड़ी मेहनत से खड़ा किया है. ये व्यवसाय अक्सर हर साल 50 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार करते हैं. ये सफलताएं न तो बड़े पैसों से शुरू हुई थीं, न किसी खास जान-पहचान से, और न ही किसी बड़ी विदेशी यूनिवर्सिटी की डिग्री से, इन्हें चलाने वाला था सिर्फ सपना, मेहनत और ग्राहकों की जरूरतों को समझने की लगन.

लेकिन इतनी सफलता के बाद भी एक बड़ी सच्चाई सामने आती है – इन व्यवसायों को अक्सर सिर्फ उनके संस्थापक ही चला पाते हैं. अगर कभी संस्थापक बीमार पड़ जाएं, हादसा हो जाए या उनका निधन हो जाए, तो पूरा कारोबार धीरे-धीरे बिखरने लगता है. यह एक गंभीर समस्या है जो देशभर में हर दिन चुपचाप होती रहती है.

संस्थापक पर निर्भरता का जाल

इन व्यवसायों में अक्सर सब कुछ एक ही व्यक्ति के इर्द-गिर्द चलता है — वही व्यक्ति सारे बड़े फैसले लेता है, ज़रूरी लोगों से रिश्ते बनाए रखता है और खुद ही काम को आगे बढ़ाता है. शुरूआती और बढ़ती हुई अवस्था में यह तरीका काम करता है, लेकिन जब व्यवसाय बड़ा हो जाता है, तो यही तरीका खतरनाक बन जाता है. संस्थापक ही पूरा सिस्टम बन जाता है, जिसे बदला नहीं जा सकता.

अक्सर उम्मीद की जाती है कि बच्चे कारोबार संभालेंगे, लेकिन उनके अपने शौक, सोच और योजनाएं होती हैं. हो सकता है वे यह काम करना ही न चाहें या उनमें व्यवसाय चलाने की समझ ही न हो. दूसरी ओर, संस्थापक बाहर के लोगों को लाने से डरते हैं — उन्हें लगता है इससे उनका नियंत्रण या मूल्यों से समझौता होगा। न तो कोई दूसरा नेतृत्व तैयार किया जाता है, न ही कोई सलाहकार बोर्ड होता है, और न ही किसी उत्तराधिकारी की योजना बनाई जाती है. इसके बाद जो होता है वह दुखद है — संस्थापक के जाने के कुछ ही महीनों या सालों में कभी फलता-फूलता व्यापार पूरी तरह से बिखर जाता है. 

आपका व्यवसाय आपके बाद भी चले

अगर आपने कोई कीमती चीज बनाई है, तो वह लंबे समय तक चलनी चाहिए. आपकी गैरमौजूदगी में भी कंपनी को ज़िंदा रहना चाहिए, आगे बढ़ना चाहिए, और अपने शेयरधारकों, कर्मचारियों, ग्राहकों और समाज के लिए मूल्य बनाते रहना चाहिए. यह सिर्फ धन को बचाने की बात नहीं है, यह विरासत छोड़ने की बात है. हर व्यवसाय के सामने दो रास्ते होते हैं: या तो वह संस्थापक के साथ खत्म हो जाए, या फिर एक मज़बूत संस्था बन जाए. यहां एक आसान और व्यावहारिक तरीका दिया गया है जिससे आपका व्यवसाय आपके बाद भी चलता रहे और बिना आपके भी तरक्की करता रहे.

अपने से ज़्यादा समझदार CEO को रखें

हाँ, आपसे ज़्यादा समझदार, बहुत से संस्थापक डरते हैं कि अगर उन्होंने किसी काबिल व्यक्ति को रखा, तो वह उन्हें पीछे छोड़ सकता है. लेकिन असली नेतृत्व का मतलब है किसी और को तैयार करना, न कि सब कुछ खुद पर निर्भर रखना. जब आप अभी भी काम कर रहे हों, तब एक अच्छा COO या CEO लाएं. उसे अपने साथ काम करने दें, ताकि वह बिज़नेस की सोच और तरीके को समझ सके और सबका भरोसा जीत सके, उसे फैसले लेने की ताकत दें. शुरू में ही उसे ज़िम्मेदारियां देकर परखें. मकसद यह होना चाहिए कि कंपनी आपके बिना भी अच्छे से चल सके.

मजबूत और स्वतंत्र बोर्ड बनाएं

ऐसे 5-6 भरोसेमंद और अनुभवी लोगों की एक टीम बनाएं जो फाइनेंस, कानून, रणनीति और आपके व्यवसाय से जुड़े क्षेत्र के जानकार हों. यह बोर्ड सिर्फ निगरानी नहीं करेगा, बल्कि कंपनी की निरंतरता बनाए रखने में मदद करेगा, आपके फैसलों को सवालों के नजरिए से देखेगा और नियमों का पालन सुनिश्चित करेगा. एक मजबूत बोर्ड निवेशकों का भरोसा बढ़ाता है और किसी भी संकट के समय कंपनी की बड़ी मदद बनता है.

अपने बच्चों को आज़ाद रखें, लेकिन जोड़े रखें

हो सकता है आपके बच्चे व्यवसाय चलाना न चाहें — और उन्हें इसके लिए मजबूर भी नहीं करना चाहिए. उन्हें CEO बनाने की बजाय, उन्हें हिस्सेदार (shareholder) बनने के लिए प्रोत्साहित करें. उन्हें बोर्ड की बैठकों में शामिल होने दें, कंपनी के पैसों और कामकाज को समझने दें, और पीछे से सहयोग करने का मौका दें.  वे बिना ज़बरदस्ती की ज़िम्मेदारी लिए भी व्यापार से लाभ ले सकते हैं. उन्हें उनके अपने सपनों को पूरा करने दें, और साथ ही आपके सपने का भी सम्मान करना सिखाएं.

सही निवेशकों को थोड़ा-थोड़ा हिस्सा देना शुरू करें

धीरे-धीरे 2 से 3 साल में कुछ हिस्सेदारी (equity) निजी निवेशकों, वेंचर कैपिटल फंड या सही रणनीतिक भागीदारों को दें. इसे नियंत्रण खोने की तरह मत देखें, बल्कि इसे व्यवसाय को लंबे समय तक चलाने का तरीका समझें. इनसे मिलने वाला पैसा व्यापार को बढ़ाने में मदद करेगा. साथ ही, ये निवेशक अनुशासन, ज़रूरी संपर्क और निगरानी भी लाते हैं. सबसे अहम बात यह है कि वे आपके व्यवसाय को संस्थापक पर निर्भर रहने वाली कंपनी से एक सिस्टम से चलने वाली कंपनी में बदलने में मदद करते हैं.

कंपनी को शेयर बाजार में लाने (IPO) की तैयारी करें

कंपनी को पब्लिक करना सिर्फ पैसों का फैसला नहीं है, यह सोच में बदलाव लाने का तरीका है. IPO से कंपनी को पहचान, भरोसा, अच्छा संचालन और कर्मचारियों को प्रेरणा मिलती है. अगर सही तरीके से किया जाए, तो इससे शुरुआती निवेशकों को बाहर निकलने का रास्ता भी मिलता है, और आप चाहें तो प्रमोटर के रूप में नियंत्रण बनाए रख सकते हैं. सबसे ज़रूरी बात यह है कि IPO के ज़रिए आपको रिपोर्टिंग, उत्तराधिकारी तय करने और नियमों के पालन में अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानक अपनाने पड़ते हैं — जिससे आपका व्यवसाय एक संस्था बन जाता है.

प्रणालियों, मूल्यों और ज्ञान को लिखकर सुरक्षित करें

कंपनी की संस्कृति सिर्फ आपके दिमाग में न रहे. अपने काम करने के तरीके (SOPs) को लिखकर रखें. अपने मूल्यों को साफ-साफ परिभाषित करें. फैसले लेने, कर्मचारियों की भर्ती, कामकाज और ग्राहक सेवा के लिए तय प्रक्रिया बनाएं. एक अच्छा ट्रेनिंग सिस्टम तैयार करें. यह सुनिश्चित करें कि कंपनी की सफलता को दूसरे लोग भी दोहरा सकें. यही बात एक महान संस्थापक और एक महान व्यवसाय के बीच का फर्क तय करती है.

आपातकालीन उत्तराधिकारी योजना तैयार रखें

ज़िंदगी अनिश्चित होती है, हमेशा एक बैकअप योजना तैयार रखें. अगर अचानक आप काम करने लायक न रहें, तो कौन व्यवसाय संभालेगा? ज़रूरी चेक पर कौन साइन करेगा? आपके ग्राहक और सप्लायर की जानकारी किसे है? ये बातें डर या चिंता की नहीं, बल्कि एक समझदार और प्रोफेशनल सोच की निशानी हैं.

आपकी विरासत आपसे बड़ी हो सकती है

आपने अपनी पूरी ज़िंदगी इस बिज़नेस को बनाने में लगाई है, ऐसा न हो कि आपके हटने के बाद ये बिखर जाए, इसे आपसे भी बड़ा बनने दीजिए.

जब आप एक कंपनी नहीं, बल्कि एक संस्था बनाते हैं:

• तो कर्मचारी आपके जाने के बाद भी वफादार रहते हैं.
• ग्राहक आपके ब्रांड पर भरोसा बनाए रखते हैं.
• निवेशक लंबे समय तक पैसे लगाते हैं.
• आपके परिवार को दौलत, इज़्ज़त और आज़ादी मिलती है.

यही असली विरासत होती है, आजीवन कंट्रोल से नहीं, बल्कि सही तरीके से धीरे-धीरे छोड़ने से बनती है.

आखिरी बात

भारत में हम उस उद्यमी की तारीफ़ करते हैं जो कुछ नहीं से शुरू करता है। लेकिन अब हमें उस संस्थापक की भी सराहना करनी चाहिए जो समझदारी से ज़िम्मेदारी सौंपता है. जो सिर्फ़ कमाई नहीं, बल्कि सिस्टम बनाता है. सिर्फ़ फैक्ट्री नहीं, बल्कि एक मज़बूत ढांचा खड़ा करता है. सिर्फ़ ब्रांड नहीं, बल्कि एक संस्था बनाता है.

• आज आप अपनी कंपनी की सबसे बड़ी ताकत हैं. लेकिन कल आप उसके लिए सबसे बड़ा खतरा भी बन सकते हैं.
• जब तक कंट्रोल आपके हाथ में है, तभी से उत्तराधिकारी तैयार करना शुरू कीजिए, ना कि तब जब आपको मजबूरी में देना पड़े.
• अपने बिज़नेस को अपनी सांसों के बिना भी चलने दीजिए.
• ऐसा ढांचा बनाइए जो हमेशा कुछ न कुछ मूल्य (value) पैदा करता रहे.
• आपकी विरासत जिए, भले ही आप खुद मौजूद न हों.
• अपनी विरासत को अपने साथ खत्म मत होने दीजिए.
• अपनी कंपनी को खुद से ही बचाइए.

डिस्क्लेमर- इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के अपने हैं, यह ज़रूरी नहीं कि यह विचार इस प्रकाशन (publication) के भी हों.

(लेखक- विनोद के. बंसल, विनोद के. बंसल एक अनुभवी चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं, जिन्हें फाइनेंशियल मार्केट्स में 35 साल से ज्यादा का अनुभव है. वे दिल्ली में रहते हैं और दुनियाभर के आर्थिक रुझानों और निवेश रणनीतियों की गहरी समझ रखते हैं. इसी वजह से वे फाइनेंस इंडस्ट्री में एक भरोसेमंद नाम माने जाते हैं. आप उनसे संपर्क कर सकते हैं: vinodkbansal@gmail.com)


टैग्स
सम्बंधित खबरें

मोदी @76: भारत की विकास गाथा के केंद्र में उद्योग और उद्यमिता

इस लेख में इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के महानिदेशक डॉ. राजीव सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आर्थिक विजन और भारत को एक मजबूत विनिर्माण, नवाचार और निर्यात अर्थव्यवस्था में बदलने पर विचार रखें हैं.

8 hours ago

Modi@76: मेक इन इंडिया से ‘मेड फॉर द वर्ल्ड’ तक, भारत के मैन्युफैक्चरिंग के अगले अध्याय की कमान संभालेंगे MSMEs

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के इस विशेष अवसर पर, पिछले एक दशक में भारत की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक परिदृश्य में आए बदलावों को देखना जरूरी है.

12 hours ago

मोदी @76: शिक्षा के क्षेत्र में कैसे बदला फोकस, यूनिवर्सिटी विस्तार से डिजिटल अकादमिक आईडी तक

नई शिक्षा नीति से स्किल इंडिया और APAAR तक, नरेंद्र मोदी सरकार के दौर में शिक्षा व्यवस्था में कई स्तरों पर बदलाव की कोशिश

12 hours ago

जन्मदिन विशेष: गुजरात से राष्ट्रीय मंच तक मोदी की 25 साल की यात्रा पर एक नजर

7 अक्टूबर 2001 को मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने और इस अक्टूबर में वह सरकार के प्रमुख के रूप में 25 साल पूरे करेंगे, पहले गुजरात में और उसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर, यह एक ऐसी उपलब्धि है, जिसे समकालीन भारत में बहुत कम राजनेता हासिल कर सकते हैं.

13 hours ago

मोदी @76: शिक्षा और कौशल से विकसित भारत की ओर

डॉ. विनोद बछेती लिखते हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शिक्षा, डिजिटल लर्निंग और कौशल विकास पर बढ़ा फोकस

15 hours ago


बड़ी खबरें

मोदी @76: वडनगर से दिल्ली तक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संघर्ष, संगठन और नेतृत्व के 25 साल का सफर

17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 76 वर्ष के हो गए हैं. उनके जन्मदिन के मौके पर BJP देशभर में महीने भर चलने वाला ‘सेवा संकल्प अभियान’ शुरू करेगी.

19 hours ago

मोदी के जन्मदिन पर पुतिन और ट्रंप की शुभकामनाएं, रूस-अमेरिका के साथ रिश्तों के बीच भारत का संतुलन

रूस और अमेरिका से आए जन्मदिन संदेश ऐसे समय में आए हैं, जब बदलते वैश्विक आर्थिक संबंधों के बीच भारत रणनीतिक रिश्तों, व्यापार हितों और ऊर्जा सुरक्षा के बीच संतुलन साध रहा है.

8 hours ago

मोदी @76: भारत की विकास गाथा के केंद्र में उद्योग और उद्यमिता

इस लेख में इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के महानिदेशक डॉ. राजीव सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आर्थिक विजन और भारत को एक मजबूत विनिर्माण, नवाचार और निर्यात अर्थव्यवस्था में बदलने पर विचार रखें हैं.

8 hours ago

टाटा संस में चंद्रशेखरन की री-अपॉइंटमेंट पर नोएल टाटा की आपत्ति, बोले- ‘अब आगे बढ़ने का समय’

टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन ने कहा- चंद्रशेखरन का दूसरा कार्यकाल नहीं लेने का फैसला पहले ही स्वीकार किया जा चुका था.

9 hours ago

PM मोदी @76: ड्रोन विजन से इनोवेशन से इम्पैक्ट की ओर बढ़ता भारत

कृषि, रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर सर्वे और आपदा प्रबंधन तक बढ़ रहा ड्रोन का इस्तेमाल, नीति सुधार, मैन्युफैक्चरिंग, स्किलिंग और उद्यमिता से सेक्टर को मिल रही रफ्तार

10 hours ago