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BW Disrupt : हर CSR को महिला कल्‍याण के बारे में सोचना होगा: डॉ. रंजना कुमारी

डॉ. रंजना कुमारी ने कहा कि आज भी जब ये सुनने को मिलता है कि महिलाओं के साथ रेप हो गया, आज उसे इतने टुकड़ों में काट दिया गया, तो बड़ा दर्द होता है. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

BW Disrupt के सोशल इम्‍पैक्‍ट इवेंट में अपनी बात रखते हुए सेंटर फॉर सोशल रिसर्च की निदेशक डॉ. रंजना कुमारी ने कहा कि आज हमें ये देखना होगा कि 4 दशक बाद भी हमें ये सुनने को क्‍यों मिलता है कि उस महिला से रेप हो गया, उसके साथ ये गलत व्‍यवहार हो गया, आज वो इतने टुकड़ों में मिली है. उन्‍होंने कहा कि जिस दिन तक हमारे देश में दिए जाना वाला हर सीएसआर ये नहीं सोचता कि महिला कल्‍याण के लिए क्‍या हो रहा है,  उस दिन तक महिलाओं की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आ सकता है.  

इस अवॉर्ड को दिए जाने का तरीका बेहद शानदार
उन्होंने आगे कहा-  मैं सोशल इम्‍पैक्‍ट के इस इवेंट की ज्‍यूरी में भी हूं. सभी के कामों के बीच से कुछ लोगों का चयन करना बेहद कठिन काम है. लेकिन ज्‍यूरी के द्वारा चयन करने का तरीका बेहद अच्‍छा है. लेकिन मैं आज आप लोगों के सामने कुछ महत्‍वपूर्ण मुद्दों को उठाना चाहती हूं. मुझे इस क्षेत्र में काम करते हुए 4 दशक से भी ज्‍यादा का समय हो चुका है. उन्‍होंने कहा कि मैं आपसे पूछना चाहती हूं कि आखिर इसके केन्‍द्र में कौन है. आपमें से ज्‍यादातर लोग ये कहेंगे कि एक मदर है. हम सब उसी से प्‍यार करते हैं और वो करते हैं जो उसके लिए कर सकते हैं. उन्‍होंने कहा कि हममें से ज्‍यादातर लोग ये सोचते हैं कि हम लड़का और लड़की में किसी तरह का भेदभाव नहीं करेंगे.

लेकिन सच ये है कि हम करते हैं. हममें से ज्‍यादातर लोग ये क्‍यों सोचते हैं कि लड़कियों को शादी कर लेनी चाहिए. उन्‍हें जल्‍दी से सैटल हो जाना चाहिए. कई महिला पत्रकार जो इस क्षेत्र में काम करती हैं या कह सकती हूं कि हमारे जैसी महिलाएं जो इस सोशल सेक्‍टर में काम करती हैं वो अक्‍सर कहती हैं कि मैम अब तो काफी देर हो गई है. हमारी सोसाइटी में महिलाओं को धीरे धीरे परिवार से लेकर स्‍टेट तक उनकी भूमिका को कम कर दिया जाता है. किसी एक महिला को राज्‍यपाल बना दिया जाता है. आज समाज में महिलाओं की स्थिति एक आभूषण की तरह है. आज भारत की संसद में उनकी भूमिका सिर्फ 14 प्रतिशत की है. 

रेखा देवी की कहानी बेमिसाल है
सेंटर फॉर सोशल रिसर्च की निदेशक डॉ. रंजना कुमारी ने कहा कि मैं आपके साथ एक कहानी को शेयर करना चाहती हूं, जिसमें एक रेखा देवी हैं.  वो कानपुर की रहने वाली थी. लेकिन एक दिन आधी रात को उन्‍हें कहा जाता है कि आप घर से चले जाइए. उनके दो बच्‍चे थे लेकिन वो उन्‍हें नहीं दिए गए. वो उसके बाद अपने घर गई लेकिन उन्‍हें कह दिया गया कि यहां उसका भाई रहता है, उसका परिवार रहता है तुम ऐसा कैसे कर सकती हो. उसके बाद वो किसी तरह से हम तक पहुंची. वो पढ़ी लिखी भी नहीं थी. उसके बाद धीरे-धीरे उसने किसी तरह अपने को संभाला.  उसके बाद जो हुआ उस पर शायद आप लोग विश्‍वास भी नहीं करेंगे.

उसके बाद उसने अपने उस परिवार से लड़ाई लड़ी और प्रॉपर्टी में अपना हिस्‍सा लिया. सिर्फ हिस्‍सा ही नहीं लिया बल्कि अपने बच्‍चों को भी अपने पास लिया, उन्‍हें पढ़ाया और आज उनके दोनों बच्‍चे टेक्निकल सेक्‍टर में जॉब कर रहे हैं. सिर्फ यही नहीं एक ऐसी लड़की जिसकी 12 साल में शादी हो चुकी थी और बिल्‍कुल पढ़ी लिखी नहीं थी वो आज ग्रेजुएट तक की पढ़ाई कर चुकी है.  अब सोचिए कि अगर समाज उसका साथ देता तो क्‍या होता. सोचिए हमारे देश में महिलाओं के साथ किस तरह के अत्‍याचार होते हैं.

आखिर समाज में कितनी है महिलाओं की भूमिका? 
सेंटर फॉर सोशल रिसर्च की निदेशक डॉ. रंजना कुमारी ने कहा कि आप अपनी सभी सोशल स्‍कीम को देखिए कि आखिर उनसे महिलाओं को कितना फायदा होता है. आप लोगों को अपना एक नजरिया बनाना होगा कि आखिर जब कभी भी हमारा कोई प्रोडक्‍ट आ रहा है या हम कहीं कुछ करने जा रहे हैं तो उसमें कितनी महिलाओं को उसका फायदा हो रहा है. हम कितनी महिलाओं को इस समस्‍या से बाहर लाने में कामयाब हो सके हैं. पिछले 40 सालों में ये सुनना कितना दर्ददायक होता है कि आज महिला के साथ रेप हो गया, आज महिला के साथ मिसबिहेव हो गया, आज उसे इतने टुकड़ों में काट दिया गया. लेकिन हमें इसे बदलना है, क्‍योंकि हम इसके लिए काम कर रहे हैं. हम आभारी हैं कि हमें ये मौका मिला है. 

आज भी हर लड़की स्‍कूल में क्‍यों नहीं है? 
आज हमारे भारतीय समाज में हर लड़की स्‍कूल में क्‍यों नहीं है. हम आज भी लड़की होने पर बच्‍चों को मार रहे हैं. महात्‍मा गांधी का एक कोट आपने सुना होगा, जब कभी भी आप एक आदमी को एजुकेट करते हैं तो आप एक आदमी को शिक्षित करते हैं. लेकिन जब कभी भी आप एक महिला को शिक्षित करते हैं तो आप एक नेशन को शिक्षित करते हैं. अगर हमारे देश के हर सीएसआर ने इस दिशा में सोचना शुरू कर दिया कि गर्ल एजुकेशन और महिला शिक्षा पर क्‍या हो रहा है तो उस दिन हमारे देश की स्थिति बदल जाएगी. हमें ये देखना होगा कि क्‍या हमारे ऑफिस में महिलाओं का सम्‍मान हो रहा है. क्‍या उसे वो उचित सम्‍मान मिल रहा है जो मिलना चाहिए. 
 


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