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मीडिया इंडस्ट्री में बहुत बड़ा नाम हैं प्रणय रॉय, NDTV एपिसोड से खत्म नहीं होंगे

1984 के चुनावी कवरेज के बाद, प्रणय रॉय अपने साप्ताहिक शो 'द वर्ल्ड दिस वीक' के साथ दूरदर्शन पर एक नियमित चेहरा बन गए थे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

  • विवेक शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार

NDTV को लेकर चल रहीं खबरें मुझे 1984 के दौर में वापस ले गई हैं. ये वे दिन थे, जब भारत निजी TV चैनलों से बहुत दूर था. किसी को नहीं पता था कि ट्विटर, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसा कुछ हमें अपने आगोश में ले लेगा. उन दिनों मैं दिल्ली यूनिवर्सिटी का छात्र था और गर्मी की छुट्टियों में ग्रेटर कैलाश-पार्ट-1 के अर्चना सिनेमा शॉपिंग आर्केड में स्थित एक बड़े टीवी शोरूम में काम कर रहा था, जो मेरे दोस्त की फैमिली का था. 

वीडियो लाइब्रेरी आते थे रॉय दंपति 
यह TV शोरूम वेस्टन कंपनी का था और वहां एक विशाल वीडियो लाइब्रेरी भी थी. उन दिनों VCR काफी प्रचलित थे. किराए पर वीडियो कैसेट लेने के लिए दक्षिण और नई दिल्ली के सिनेमा प्रेमी वहां जमा होते थे. जबकि मैं दूर-दूर तक भी इससे जुड़ा नहीं था, मैं हर समय वहां लोगों को आते-जाते देखता था. उस वीडियो लाइब्रेरी को वेस्टन कंपनी के फाउंडर सुंदर वचानी के बेटे कमल वाचानी के कुछ कर्मचारी संभालते थे. मुझे अच्छी तरह याद है कि कमल भाई बहुत विनम्र व्यक्ति थे और अपने ग्राहकों के साथ बातचीत किया करते थे. प्रणय रॉय और राधिका रॉय उस लाइब्रेरी में नियमित रूप से आया करते थे. वे ग्रेटर कैलाश बरसाती (Greater Kailash Barsati) में रहते थे और अपनी चॉकलेटी रंग की फिएट कार से आते थे.

पहला लाइव इलेक्शन कवरेज
वो प्रणय रॉय थे, मुझे यह तब पता चला जब वे 1984 में शायद पहला लाइव इलेक्शन कवरेज कर थे. विनोद दुआ उस समय उनके साथ थे. वो 24×7 इलेक्शन कवरेज भारतीय TV दर्शकों के लिए अनोखा अनुभव था, जिसे काफी सराहा गया. उस समय तक मैं म्यूजिक नेस्ट की नौकरी छोड़ चुका था, हालांकि आदरणीय सुंदर वचानी ने मुझे अपनी वेस्टन कंपनी में प्रमुख जिम्मेदारियां सौंपने का वादा किया था. मैं और उनका बेटा एक बार फिर साथ पढ़ाई करने लगे और हमारी दोस्ती चलती रही.

चैनलों को उपलब्ध कराते थे कंटेंट 
बेशक, 1984 के उस इलेक्शन कवरेज ने भारतीय टीवी का चेहरा हमेशा के लिए बदल दिया था. श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या और सिख विरोधी दंगों के बाद लोकसभा चुनाव हुए थे. 1984 के चुनावी कवरेज के बाद, प्रणय रॉय अपने साप्ताहिक शो 'द वर्ल्ड दिस वीक' के साथ दूरदर्शन पर एक नियमित चेहरा बन गए थे. उस शो ने दुनिया की प्रमुख घटनाओं को जानने के इच्छुक समझदार दर्शकों के बीच गहरा प्रभाव डाला था. अपनी बहुत ही गरिमापूर्ण और शानदार एंकरिंग के साथ, प्रणय रॉय यकीनन इंडियन TV न्यूज का चेहरा थे. NDTV के लॉन्च होने से पहले भी उनकी कंपनी विभिन्न चैनलों को कंटेंट उपलब्ध करा रही थी.

HT स्पोर्ट्स डेस्क के वो दिन
1986 में, मैं हिंदुस्तान टाइम्स समूह से जुड़ गया. ये वो दिन थे जब HT स्पोर्ट्स डेस्क के एक हिस्से को IP एक्सटेंशन में बन रहे स्पोर्ट्स अपार्टमेंट का ऑफिस बना दिया गया था. एम. माधवन, विनोद वार्ष्णेय, अरुण कुमार, डॉ. कैलाश पापने जैसे HT के दिग्गज पत्रकार काम खत्म करने के बाद वहां आते थे. हम खेल प्रेमी भी पीसी निगम, सीएस राव, जयदीप बसु, संदीप नकई और अन्य दिग्गजों के साथ स्पोर्ट्स पर चर्चा करने के लिए अक्सर वहां जाते थे. Anil Saari भी अक्सर हमारे साथ जुड़ते थे, क्योंकि HT संडे रूम HT स्पोर्ट्स के बगल में था.

विनोद वार्ष्णेय ने कराई थी मुलाकात
और एक दिन जब हम वहां किसी मुद्दे पर चर्चा कर रहे थे, तो हमने देखा कि प्रणय रॉय वहां खड़े हैं और विनोद वार्ष्णेय से बात कर रहे हैं. दरअसल, वह स्पोर्ट्स अपार्टमेंट स्थित अपने फ्लैट की क्वार्टरली इनस्टॉलमेंट देने पहुंचे थे. वह 80 का दशक था और प्रणय पहले से ही भारतीय TV न्यूज के स्टार बन चुके थे. विनोद वार्ष्णेय ने हम सभी को उनसे मिलवाया. वह दो मिनट हमारे साथ रहे. यहां तक कि हमारे साथ HT हाउस की कड़क चाय भी पी. मैंने उन्हें बताया कि मैं म्यूजिक नेस्ट के लिए काम कर रहा था, जहां वह नियमित रूप से आते थे. हमने संक्षेप में उन दिनों की यादों को साझा किया और फिर वे वहां से चले गए. लेकिन मैं उन्हें समय-समय पर मिलता रहा.

इंडस्ट्री में रॉय बहुत बड़ा नाम
म्यूजिक नेस्ट और HT हाउस अब महज यादें हैं, मैं अभी भी सोचता हूं कि कैसे प्रणय रॉय जैसे लोगों ने अपने रास्ते में आने वाले अवसरों को पहचाना और भारत में एक मजबूत नाम बन गए. उन्होंने उसी जगह (अर्चना सिनेमा कॉम्प्लेक्स) से अपना वेंचर शुरू किया, जहां वे वीडियो कैसेट लेने जाते थे, उनकी पसंद थ्रिलर हुआ करती थी. वह अब उस परिसर के मालिक बन गए हैं, जो शुरू में दिल्ली के एक बड़े व्यापारी आत्मा राम चड्ढा का था. बाद में  प्रणय और राधिका रॉय ने करोड़ों का साम्राज्य स्थापित किया. वे अब बरसाती में नहीं रहते, उन्होंने अपना आईपी एक्सटेंशन फ्लैट वाला भी बेच दिया है. भले ही गौतम अडानी उनके पैरों के नीचे से जमीन खींचने में कामयाब हो जाएं, लेकिन मीडिया इंडस्ट्री में रॉय बहुत बड़ा नाम है, जो इतनी जल्दी गायब होने वाला नहीं है.


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