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‘डिकॉलोनाइजेशन’ और अधिक भारत-वंशज CEOs को आगे लाने की नई पहल

वैश्विक CEOs प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक कार्यक्रमों में प्रमुखता से शामिल रहे हैं; PM ने अपने 2024 के स्वतंत्रता दिवस भाषण में भारत-वंशज CEOs के वैश्विक प्रभाव का उल्लेख किया था.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद, माइक्रोसॉफ्ट के CEO सत्य नडेला ने कहा कि कंपनी देशभर में डेटा सेंटरों में 17.5 बिलियन डॉलर का निवेश करेगी. एक ट्वीट में, PM मोदी ने कहा, “AI की बात आती है तो दुनिया भारत को लेकर आशावादी है! श्री सत्य नडेला के साथ बहुत ही सार्थक चर्चा हुई…” जिस दिन PM ने नडेला से राष्ट्रीय राजधानी में मुलाकात की, उसी दिन उन्होंने अन्य CEOs से भी मुलाकात की, चाहे वे वैश्विक हों या भारत-वंशज नेता.

दो नेता, हालांकि, जिन्होंने PM मोदी के सार्वजनिक कार्यक्रमों में लगातार प्रमुखता पाई है भारत-वंशज वैश्विक CEOs और लोकप्रिय टेक आइकॉन होने के नाते, वे हैं नडेला और सुंदर पिचाई. अपने इंटरव्यूज़ में भी PM ने “माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी कंपनियों में भारत-वंशज CEOs की उपस्थिति” का जिक्र किया है.

यह अक्सर स्वीकार किया जाता है कि भारत की तकनीकी शिक्षा प्रणाली, खासकर IIT और IIM द्वारा संचालित इकोसिस्टम, CEOs और वैश्विक टेक आइकॉन तैयार करने और उन्हें पोषित करने में महत्वपूर्ण रहा है, जिनमें से कई आज सिलिकॉन वैली में भी महत्वपूर्ण पदों पर हैं.

हाल ही के एक पॉडकास्ट में पिचाई ने अपने बचपन पर बात की. उन्होंने कहा: “मैं चेन्नई में बड़ा हुआ. घर के बाहर क्रिकेट खेलने की प्यारी यादें हैं… कंप्यूटर से पहले… अखबार और किताबों के माध्यम से ही मुझे दुनिया की जानकारी मिली… मेरे दादा मेरे जीवन में बड़ी प्रेरणा थे. वे पोस्ट ऑफिस में काम करते थे. वे भाषा में बहुत अच्छे थे. उनकी अंग्रेजी… उनकी हैंडराइटिंग आज भी सबसे सुंदर हैंडराइटिंग है जो मैंने कभी देखी है… उन्होंने ही मुझे किताबों से परिचित कराया… किताबें मेरे जीवन का बड़ा हिस्सा थीं… यह आश्चर्य नहीं है कि मैं गूगल में आया, क्योंकि गूगल का मिशन मुझसे बहुत गहराई से जुड़ता था. ज्ञान तक पहुंच, मैं इसके लिए हमेशा उत्सुक था…”

अन्य भारत-वंशज CEOs की भी ऐसी ही कहानियाँ हैं. उदाहरण के लिए, नडेला हैदराबाद के एक पब्लिक स्कूल में गए और उनके कई सहपाठी भी आगे चलकर वैश्विक कंपनियों का नेतृत्व करने तक पहुंचे.

इस बीच, भारतीय शिक्षा प्रणाली, जिसमें तकनीकी शिक्षा का इकोसिस्टम भी शामिल है, इस समय बड़े बदलाव से गुजर रही है, क्योंकि केंद्र सरकार मूल भाषाओं में सीखने को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित कर रही है. हाल के हफ्तों में, PM ने “औपनिवेशिक दासता की मानसिकता” से छुटकारा पाने के लिए दस साल का समय-सीमा तय करने पर भी जोर दिया है.

BW बिजनेसवर्ल्ड को दिए एक हालिया इंटरव्यू में किशोर महबूबानी ने कहा कि “विचारों की दुनिया में वैश्विक पुनर्संतुलन” जारी है और पश्चिम के लोकप्रिय मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर ग्लोबल साउथ के खिलाफ पक्षपात भी मौजूद है.

तो भारतीय तकनीकी शिक्षा प्रणाली में “डिकॉलोनाइजेशन” की यह प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी?

BW बिजनेसवर्ल्ड ने हाल ही में IIT जोधपुर के डायरेक्टर से इस विषय पर सवाल किया (यहाँ हिंदी भाषी क्षेत्रों के कई छात्रों ने इंजीनियरिंग विषयों को हिंदी में पढ़ने की इच्छा जताई है). संस्थान के डायरेक्टर ने कहा: “…यह दोहरी सशक्तिकरण तकनीकी सीख अपनी मातृभाषा में और साथ ही अंग्रेजी कौशल का विकास एक परिवर्तनकारी मॉडल है. यह दशकों पुरानी उस खाई को पाटता है, जहाँ भाषा ग्रामीण या टियर 2, टियर 3 शहरों के प्रतिभाशाली छात्रों के लिए अनावश्यक बाधा बन जाती थी.”

शायद अब समय आ गया है कि गढ़चिरौली और गांदरबल, दंतेवाड़ा और लोहरदगा की लड़कियों और लड़कों के लिए समान अवसर तैयार किए जाएँ, ताकि वे भी सत्य नडेला और सुंदर पिचाई की तरह वैश्विक CEOs और टेक लीडर्स बनने का सपना देख सकें.

अपने 2024 के स्वतंत्रता दिवस भाषण में PM मोदी ने कहा था: “…मुझे उतना ही गर्व है कि आज वैश्विक स्तर पर कई भारतीय CEOs प्रभावशाली भूमिकाएँ निभा रहे हैं. यह संतोष का विषय है कि जहाँ एक ओर हमारे CEOs वैश्विक बिजनेस परिदृश्य में छाए हुए हैं, वहीं दूसरी ओर एक करोड़ माताएँ और बहनें महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर ‘लखपति दीदी’ बन रही हैं.”

सुमन के झा, बीडब्ल्यू रिपोर्टर्स
(लेखक पूर्व कार्यकारी संपादक और बीडब्ल्यू बिजनेसवर्ल्ड के डिप्टी एडिटर रह चुके हैं.)

 


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