होम / एक्सपर्ट ओपिनियन / BW Sustainability: Sri City के प्रेसिडेंट ने बताया डाइवर्सिफाइड इंडस्ट्रियल बेस का महत्व

BW Sustainability: Sri City के प्रेसिडेंट ने बताया डाइवर्सिफाइड इंडस्ट्रियल बेस का महत्व

श्री सिटी के बारे में बात करते हुए सतीश कामत ने कहा कि हमने 2008 में शुरुआत की थी और महज 15 सालों में काफी कुछ हासिल कर लिया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

BW BusinessWorld द्वारा आयोजित सस्टेनेबल वर्ल्ड कॉन्क्लेव एवं अवॉर्ड्स के 5वें संस्करण में अलग-अलग सेक्टर्स की हस्तियां अपने विचार पेश कर रही हैं. इसी कड़ी में आंध्र प्रदेश स्थित श्री सिटी (Sri City) के प्रेसिडेंट सतीश कामत (Satish Kamat) ने सस्टेनेबल डेवलपमेंट के मॉडल के रूप में श्री सिटी की खासियत पर प्रकाश डाला. साथ ही उन्होंने बताया कि बिजनेस की सफलता तभी संभव है जब समाज और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए एक बैलेंस बनाकर आगे बढ़ा जाए. सतीश कामत ने कहा कि श्री सिटी आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में निर्मित एक इंटीग्रेटेड बिजनेस सिटी है. 2008 में स्पेशल इकॉनोमिक जोन (SEZ) के रूप में इसकी स्थापना की गई थी और महज 15 सालों में इसने बहुत कुछ हासिल किया है. आज यहां कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों की शाखाएं व कारखाने हैं.

हमारे DNA में है सस्टेनेबलिटी 
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए सतीश कामत ने कहा कि बिजनेस को सोसाइटी और एनवायरनमेंट के प्रति दयालु होना चाहिए. इन सबके बीच अच्छे तालमेल की जरूरत है, बगैर इसके व्यवसाय को सफलता नहीं मिल सकती. सस्टेनेबलिटी पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि सस्टेनेबलिटी हमारे DNA में है. हमारे फाउंडर Ravindra Sannareddy ने अमेरिका में एनवायरनमेंट साइंस पर काम किया है. वह पर्यावरण संरक्षण की भूमिका को अच्छे से समझते हैं और Sri City इसका एक नायब नमूना है. हमने पर्यावरण को नकारात्मक रूप से प्रभावित किए बिना इस शहर का निर्माण किया है. 10 हजार एकड़ में फैली श्री सिटी, आंध्र के पिछड़े इलाके में बनाई थी, ताकि यहां के लोगों के जीवनस्तर में सुधार किया जा सके. आज यहां स्थानीय गांवों के विकास के साथ-साथ रिवर्स माइग्रेशन देख जा रहा है. पहले यहां से लोग चेन्नई, तमिलनाडु जैसी जगहों पर काम के लिए जाते थे, लेकिन अब यहां वापस आ रहे हैं. 

ये भी पढ़ें - दुनिया के कई देशों में ग्‍लोबल वार्मिंग का असर दिखना शुरू हो चुका है: डॉ. अनुराग बत्रा

सिटी ग्रोथ के अलग-अलग मॉडल
Sri City के प्रेसिडेंट ने कहा कि आजकल 7 ट्रिलियन, 10 ट्रिलियन इकॉनोमी की बात होती है. यदि हमें इसे हकीकत में बदलना है, तो हमारे शहरों को इन्फ्रास्ट्रक्चर की फाउंडेशन लेयर बनना होगा. उन्हें इस तरह विकसित होना होगा कि राष्ट्रीय स्तर पर अर्थव्यवस्था में कोई बड़ा योगदान दे सकें. एक रिपोर्ट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले समय में लगभग आधा भारत शहरों में रहेगा, इसलिए सिटी ग्रोथ के अलग-अलग मॉडल जरूरी हैं. हमारे फाउंडर चेन्नई की भागदौड़ से दूर हांगकांग और Shenzhen मॉडल पर आधारित कुछ करना चाहते थे. और उनकी इसी चाहत से श्री सिटी का निर्माण हुआ. हांगकांग एक जमाने में विनिर्माण हब था. चीन ने तेज आर्थिक विकास के लिए Shenzhen में कई स्पेशल इकॉनोमिक जोन (SEZ) शुरू किए थे. अब आप देखेंगे कि हांगकांग और Shenzhen की अर्थव्यवस्था एक ही आकार की हो गई है. कहने का मतलब है कि यदि आइडिया और इम्प्लीमेंटेशन सही तरीके से हो, तो मुख्य शहर को छेड़े बिना भी दूसरा शहर बसाया जा सकता है. मुख्य शहर की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किए बिना, एक अलग अर्थव्यवस्था बनाई जा सकती है. 

4 बिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश
श्री सिटी के बारे में बात करते हुए सतीश कामत ने कहा कि हमने 2008 में शुरुआत की थी और महज 15 सालों में काफी कुछ हासिल कर लिया है. मौजूदा वक्त में हमारे इस शहर में 28 देशों की 210 कंपनियां हैं. हर 15 दिनों में एक कंपनी हमसे जुड़ती है. इन सभी कंपनियों ने 4 बिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है, इससे 60 हजार नई इंडस्ट्रियल नौकरियां उत्पन्न हुई हैं. भारत में हमारी गिनती बेस्ट नॉन-IT SEZ में होती है. हमारा एक्सपोर्ट लगातार बढ़ रहा है. श्री सिटी में फिलहाल 8 से 10 हजार लोग रहते हैं और आने वाले समय में यह आंकड़ा एक लाख के पार जा सकता है. डाइवर्सिफाइड इंडस्ट्रियल बेस के महत्व को समझाते हुए कामत ने कहा - हमने लगभग सभी सेक्टर्स को कवर किया है. ऑटोमोबाइल, FMCG से लेकर इलेक्ट्रोनिक तक करीब-करीब हर सेक्टर से जुड़ी कंपनी हमसे कनेक्ट है. ऐसे में हम किसी एक सेक्टर या इंडस्ट्री पर निर्भर नहीं हैं. इसका फायदा ये होता है कि अगर कोई एक सेक्टर बेहतर नहीं कर रहा, तो उसका असर पूरे शहर पर नहीं पड़ेगा, क्योंकि दूसरे सेक्टर उस कमी को पूरा कर देंगे. 
 


टैग्स
सम्बंधित खबरें

टैगोर से टाटा तक: पश्चिम बंगाल अवसरों की भूमि

उद्योग पेशेवर डॉ. अजय शर्मा लिखते हैं, 1960 के दशक में भारत के जीडीपी में बंगाल की हिस्सेदारी 10% से अधिक थी, जो 2023-24 तक घटकर लगभग 5.6% रह गई है.

2 hours ago

बंगाल के जनादेश का सम्मान जरूरी: भरोसा लौटे, गौरव पुनर्जीवित हो, सम्मान स्थापित हो

प्रबल बसु रॉय लिखते हैं, शासन का अगला चरण, चाहे स्थानीय स्तर पर इसका नेतृत्व कोई भी करे, भाषण या इरादों के आधार पर नहीं आंका जाएगा, इसे परिणामों के आधार पर परखा जाएगा.

2 hours ago

अहंकार का अंत: कमल मुस्कुरा रहा है

पश्चिम बंगाल का औद्योगिक केंद्र से आर्थिक ठहराव तक का सफर दशकों की नीतियों और राजनीतिक बदलावों के जरिए समझा जा सकता है, साथ ही इसके पुनरुत्थान की संभावनाओं पर भी बहस जारी है.

23 hours ago

प्रसार भारती में प्रसून होने का महत्व

टाटा मोटर्स के सीएमओ शुभ्रांशु सिंह लिखते हैं, विज्ञापन ने प्रसून जोशी को सटीकता और जटिलता को कुछ यादगार शब्दों में समेटने की क्षमता दी.

1 day ago

गोदरेज इंडस्ट्रीज की नई ब्रांड पहचान: सिर्फ डिजाइन नहीं, बड़े बदलाव का संकेत

इस लेख में लेखक गणपति विश्वनाथन ने गोदरेज इंडस्ट्रीज की रीब्रांडिंग और उसके मौजूदा संकेतों का विश्लेषण किया है.

3 days ago


बड़ी खबरें

BW The Future Finance Office में मुख्य अतिथि होंगे यूपी के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक

एक ओर जहाँ फाइनेंस लीडरशिप और एंटरप्राइज लीडरशिप के बीच की सीमा पूरी तरह समाप्त हो रही है. वहीं, CFO की भूमिका के भविष्य को नए सिरे से परिभाषित करने के उद्देश्य से भारत के टॉप फाइनेंस लीडर्स 8 से 10 मई तक लखनऊ में एकत्र होंगे.

2 hours ago

मलेशिया और भारत में नए सीईओ की नियुक्ति के साथ Lockton ने एशिया में नेतृत्व को किया मजबूत

यह नियुक्तियां लॉकटन की एशिया में बढ़ती उपस्थिति और भविष्य की विकास योजनाओं को और मजबूती प्रदान करेंगी.

1 hour ago

मुखर्जी के गृह राज्य में भगवा लहर: पश्चिम बंगाल में BJP की ऐतिहासिक बढ़त

चुनाव परिणामों को ऐतिहासिक और अभूतपूर्व बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह जनता के विश्वास और विकास की राजनीति का परिणाम है.

4 hours ago

टैगोर से टाटा तक: पश्चिम बंगाल अवसरों की भूमि

उद्योग पेशेवर डॉ. अजय शर्मा लिखते हैं, 1960 के दशक में भारत के जीडीपी में बंगाल की हिस्सेदारी 10% से अधिक थी, जो 2023-24 तक घटकर लगभग 5.6% रह गई है.

2 hours ago

बंगाल के जनादेश का सम्मान जरूरी: भरोसा लौटे, गौरव पुनर्जीवित हो, सम्मान स्थापित हो

प्रबल बसु रॉय लिखते हैं, शासन का अगला चरण, चाहे स्थानीय स्तर पर इसका नेतृत्व कोई भी करे, भाषण या इरादों के आधार पर नहीं आंका जाएगा, इसे परिणामों के आधार पर परखा जाएगा.

2 hours ago