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BW Disrupt: फंडरेजिंग को फ्रेंडरेजिंग में बदलना ही है असली लीडरशिप

BW Disrupt के Social Impact इवेंट में आयोजित पैनल डिस्कशन में अलग-अलग क्षेत्रों के एक्सपर्ट्स ने अपने विचार पेश किए.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

BW Disrupt Social Impact के दूसरे एडिशन का आयोजन दिल्ली में किया जा रहा है. अलग-अलग सेक्टर्स की दिग्गज हस्तियां यहां अपने विचार और सोशल इम्पैक्ट से जुड़े अनुभव साझा कर रही हैं. इवेंट के दौरान एक पैनल डिस्कशन में Yuva Unstoppable के Founder Amitabh Amit Shah, Nabet India के Co-Founder Arjun Mishra, पत्रकार एवं सोशल एक्टिविस्ट Deepika Narayan Bhardwaj, Aam Aadmi Party के प्रवक्ता Sarvesh Mishra, Peepal Tree Foundation की Co-Founder, Managing Trustee Samita Roy और Sassiest की Founder एवं Chief Executive Officer Aishwarya Dua ने भाग लिया. जबकि मॉडरेटर के रूप में United Nations Population Fund की कम्युनिकेशन एवं मीडिया स्पेशलिस्ट Pinki Pradhan उपस्थित रहीं.

आजकल फंडरेजिंग का है चलन
पैनल डिस्कशन की शुरुआत पर्पस एंड लीडरशिप के अर्थ से शुरू हुई. सबसे पहले अपनी बात करते हुए Yuva Unstoppable के Founder अमिताभ अमित शाह ने कहा -  मेरा पर्पस बिल्कुल क्लियर है. मुझे केवल गरीब बच्चे ही नहीं बल्कि सबकी सेवा करनी है. फिर चाहे वो कोई करोड़पति हो, राजनेता हो या कोई. मेरा मानना है कि यदि आप लोगों से अच्छे से बात करते हैं, उनके लिए समय निकालते हैं, उनकी मदद करते हैं, तो इस तरह आप हर मिलने वाले व्यक्ति की सेवा कर सकते हैं. अमिताभ ने आगे कहा, 'आजकल लोग फंडरेज बहुत करते हैं, जैसे कोई एनिमल के लिए कुछ कर रहा है, तो उसके लिए फंड चाहता है. किसी का अच्छा स्टार्टअप है, तो वो उसके लिए पैसा चाहता है. मुझे लगता है कि हमें फंडरेजिंग को बदलकर फ्रेंडरेजिंग करना चाहिए, ये लीडरशिप में बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है. जहां तक बात मेरे रोल मॉडल की है, तो वो अब्दुल कलम हैं. एक बार मैंने उनसे पूछा था कि सर देश कैसे बदल सकते हैं? उन्होंने कहा - अमिताभ घर जाकर मां के सामने स्माइल करना. क्योंकि अगर इसके जवाब में मां स्माइल करेगी, तो पूरा परिवार स्माइल करेगा. इसलिए यदि आप कुछ लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाते हैं, तो बहुत कुछ बदल सकता है'.

अच्छी सोच वाली हो टीम
साथ काम करने वाले लोगों की टीम से जुड़े एक सवाल पर अमिताभ ने कहा - 20 साल की उम्र में मैंने अपने कुछ दोस्तों के साथ एक अलग शुरुआत की थी. हम अनाथालय, वृद्धाश्रम जाते, वहां कुछ टाइम बिताते, उन्हें सिखाते थे. आज भी मेरे साथ के करीब 50 लोगों ने यही करना चुना - समाजसेवा. मेरा मानना है कि टीम में अच्छी सोच वाले लोग शामिल होने चाहिए. यदि उनकी सोच अच्छी होगी, तो बाकी चीजें सिखाई जा सकती हैं. समस्या के समाधान पर बोलते हुए अमिताभ ने कहा कि मेरे पिता ने बचपन में मुझसे कहा था कि हर रोज 10 अच्छी चीजों के बारे में लिखो, उन्हें धन्यवाद दो. 25 साल तक मैंने यही किया तो अब कोई समस्या भी आती है तो मुझे लगता है कि उसमें भी कुछ अच्छा ही होगा. जब आपकी पहली सोच ही यह है, तो आप समाधान भी आसानी से निकाल लेते हैं.

क्या चुनेंगे चैरिटी या अवसर?
Nabet India के Co-Founder अर्जुन मिश्रा ने कहा -  चैरिटी या अवसर, अक्सर लोग चैरिटी को चुनते हैं, लेकिन मैं अवसर में विश्वास रखता हूं. मैं विकलांग लोगों के लिए काम करता हूं और मैंने पाया है कि विकलांगता लोगों के लिए चुनौती नहीं है, बल्कि उन्हें किस तरह से देखा जाता है ये असली चुनौती है. शुरुआत में जब मैं लोगों के पास जाता था और उनसे कहता था कि हमारी विकलांग लोगों की टीम क्वालिटी वर्क प्रोड्यूस कर सकती है, तो वो मुझे चैरिटी का चेक थमा देते थे. मैंने कभी वो चेक नहीं लिया, क्योंकि ये मेरे और मेरे लोगों के सम्मान के खिलाफ था. टीम से जुड़े सवाल पर मिश्रा ने कहा कि टीम को कॉज पता होना जरूरी है. उन्हें यह अच्छे से समझ आना चाहिए कि कंपनी या संगठन क्या चाहता है. मुझे लगता है कि ट्रबलमेकर को टीम से तुरंत बाहर किया जाना चाहिए, क्योंकि एक व्यक्ति दूसरों को भी गलत काम के लिए प्रेरित कर सकता है. मैं लगातार अपनी टीम के संपर्क में रहता हूं, मीटिंग करता रहता हूं.   

पैसा सबसे बड़ी चुनौती
पत्रकार और सोशल एक्टिविस्ट Deepika Narayan Bhardwaj ने कहा - मेरे लिए लीडरशिप विद पर्पस का मतलब है एक ऐसा कॉज जो आपके दिल के करीब हो और आप अपने जीवन के हर दिन उसके लिए काम करते रहें. जहां तक बात रोल मॉडल की है, तो मेरे लिए वो मेरे पैरेंट्स हैं. अधिकांश लोग सोचते हैं कि पड़ोस वाले घर से कोई एक्टिविस्ट निकल जाए, लेकिन बहुत कम लोग ऐसे होते हैं, जो चाहते हैं कि उनके घर में कोई एक्टिविस्ट हो और मेरे पैरेंट्स ने यही किया. अपनी सबसे बड़ी चुनौती के बारे में बात करते हुए दीपिका ने कहा - हमारे प्रोफेशन में पैसा सबसे बड़ी चुनौती रहती है. लेकिन समाज के लिए कुछ करने का जज्बा हमें उससे जोड़े रहता है. मैंने दहेज के झूठे मामलों में फंसे पुरुषों पर डाक्यूमेंट्री बनाई. हजारों लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें इस तरह के झूठे मामलों में फंसा दिया जाता है, मगर उनकी आवाज अक्सर अनसुनी हो जाती है. इसलिए मैं उनकी आवाज बनी. मुझे इसके लिए काफी कुछ सुनना भी पड़ा. मुझे महिला विरोधी तक करार दिया गया, लेकिन सोशल जस्टिस के लिए मेरी लड़ाई जारी है.    

हमारे लीडर्स का पर्पस क्लियर 
Aam Aadmi Party के प्रवक्ता सर्वेश मिश्रा ने अपनी बात रखते हुए कहा - मेरी लाइफ में शुरू से एक पर्पस रहा है - भ्रष्टाचार मुक्त देश, अच्छी गवर्नमेंट और बेहतर शिक्षा. इसलिए जब आम आदमी पार्टी में मुझे वो पर्पस नजर आया, तो मैं और मेरे जैसे असंख्य युवा उसका हिस्सा बन गए. हमारे लीडर का पर्पस क्लियर है, हमारी पार्टी शिक्षा पर वोट मांगती है. एक घटना का जिक्र करते हुए मिश्रा ने कहा कि उन दिनों में UPSC की तैयारी आकर रहा था. किरण बेदी की एक सभा जनलोकपाल को लेकर थी. मैं मनीष सिसोदिया के साथ वहां पहुंचा था. मैंने उनसे पूछा कि जनलोकपाल कितने दिन में आ जाएगा, क्योंकि हमें वापस जाकर पढ़ाई भी करनी है. इस पर उन्होंने कहा - यदि वापस जाने का मन बना लिया है, तो चले जाओ. क्योंकि इसमें कम से कम 20 साल लगेंगे, तो कहने का मतलब है कि इस तरह कई नेताओं ने रास्ता दिखाया. सर्वेश मिश्रा ने आगे कहा कि शार्क टैंक इंडिया की तरह दिल्ली सरकार ने 'बिजनेस ब्लास्टर' नामक योजना शुरू की, हमने स्कूली बच्चों से कहा कि यदि उनके पास कोई अच्छा बिजनेस आईडिया है, तो हम फंड देंगे. 12वीं क्लास से छोटे बच्चों ने कई आईडिया दिए और सरकार ने उन्हें 7 करोड़ रुपए का फंड भी मुहैया कराया. 

पैसे से ही मिलता है सम्मान
Peepal Tree Foundation की Co-Founder एवं Managing Trustee समिता रॉय ने कहा कि लाइफ में कोई एक रोल मॉडल नहीं होता. मैंने सफाई कर्मचारी के रूप में शुरुआत की. मैं गारमेंट फैक्ट्री से वेस्ट कलेक्ट करती और उस वेस्ट से खूबसूरत चीजें बनाती. जैसे कि कुशन कवर, टैबल मैट आदि. अब यह काम बड़े स्केल पर हो रहा है. पहले मैं अमेजन पर अपने प्रोडक्ट बेचती थी, मगर अब अपनी साइट के जरिए बेचती हूं. हम महिलाओं को इस तरह के प्रोडक्ट बनाने के लिए ट्रेनिंग देते हैं, ताकि वो सशक्त बन सकें. हर कोई जो लाइफ में कुछ करना चाहता है, मुझे प्रेरित करता है. मैं आज 60 बच्चों वाला स्कूल भी चलाती हूं. रॉय का मानना है कि पैसे से सम्मान आता है, इसलिए सम्मान लायक पैसा तो कमाना ही चाहिए. टीम से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि टीम ऐसी होनी चाहिए, जो आपके विचारों से अवगत हो, जिसे आपके विजन की जानकारी हो. 

समाज को सोच बदलने की जरूरत  
Sassiest की Founder एवं Chief Executive Officer ऐश्वर्या दुआ ने कहा - पर्पस जिंदगी से आता है. Sassiest महिलाओं और LGBTQIA+ के लिए वेलनेस ब्रैंड है. ऐसे में हर वो महिला जो हमारे प्रोडक्ट्स से संतुष्ट होकर अपने चेहरे पर बड़ी सी स्माइल लाती है, हमें प्रेरित करती है. यही हमारा उद्देश्य है जिनकी जरूरतों को पूरा करना. उन्होंने कहा कि आज भी सेक्सुअल हेल्थ मेल सेंट्रिक है, महिलाओं का इस पर बात करना समाज को नागवार गुजरता  है. जरूरत है, नए नियम बनाए जाएं. सेक्स एजुकेशन को सामान्य बनाया जाए. ऐसा माहौल निर्मित हो, जहां बच्चे खुलकर अपने पैरेंट्स से इस पर बात कर सकें.


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