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Air India दुर्घटना: बीमा दावा की आखिरी तारीख करीब, परिवार जल्द करें आवेदन

ड्रीमलाइनर दुर्घटना ने अनेक परिवारों को अपूरणीय क्षति पहुंचाई है, लेकिन इस संकट की घड़ी में कार्ड-लिंक्ड एयर एक्सीडेंट इंश्योरेंस एक महत्वपूर्ण आर्थिक सहारा बन सकता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago

जब 35,000 फीट की ऊँचाई पर त्रासदी घटती है, तो बहुत कम लोग उसके व्यावहारिक परिणामों के लिए तैयार होते हैं. 12 जून 2025 को, जब अहमदाबाद से लंदन जा रहा एक एयर इंडिया ड्रीमलाइनर (Boeing 787) विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, तो पूरा देश स्तब्ध रह गया और पीछे रह गए शोक संतप्त परिवार और अनुत्तरित प्रश्न, भावनात्मक घावों को भरने में सालों लग सकते हैं, लेकिन एक महत्वपूर्ण वित्तीय अवसर तेजी से समाप्त हो रहा है, जोकि उस उड़ान की बुकिंग के लिए इस्तेमाल किए गए डेबिट और क्रेडिट कार्ड से जुड़े आकस्मिक मृत्यु बीमा का दावा करने की समय सीमा है. 

कई लोगों को जानकारी नहीं है कि कुछ डेबिट या क्रेडिट कार्ड, विशेष रूप से हाई-एंड वेरिएंट्स से टिकट खरीदने वाले यात्रियों को मुफ्त एयर एक्सीडेंट इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत कवर किया गया था. कवर राशि ₹20 लाख से ₹2 करोड़ तक होती है, जो कार्ड प्रकार और जारीकर्ता पर निर्भर करती है, लेकिन इसमें एक शर्त है: इन पॉलिसियों में अधिकांश मामलों में नॉमिनी को मृत्यु के 30 दिनों के भीतर दावा दायर करना आवश्यक होता है, जिसका अर्थ है कि इस मामले में यह समय सीमा 11 जुलाई 2025 होगी, हालांकि अलग-अलग बैंकों की शर्तें थोड़ा भिन्न हो सकती हैं.

एक अनदेखा लाभ
कार्ड-लिंक्ड एयर एक्सीडेंट कवर एक कम प्रचारित लेकिन अत्यधिक मूल्यवान लाभ है. एचडीएफसी, एसबीआई, आईसीआईसीआई, एक्सिस और अन्य बैंक अक्सर प्रमुख बीमा कंपनियों के साथ साझेदारी में अपनी प्रीमियम कार्ड योजनाओं में व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा को नियमित रूप से शामिल करते हैं.  हालांकि, यह कवरेज तभी सक्रिय होती है जब हवाई टिकट कार्ड से खरीदी गई हो, और केवल तभी जब नॉमिनी समय पर दावा दायर करे.

कई परिवार, जो अभी भी सदमे में हैं और इस शर्त से अनजान हैं, समय सीमा चूकने के खतरे में हैं. एक बार यह अवसर समाप्त हो जाने पर, बीमा कंपनियां कानूनी रूप से दावे को स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं होतीं, जिससे करोड़ों रुपये बिना दावा किए रह सकते हैं और पीड़ित परिवार वित्तीय सहायता से वंचित रह सकते हैं.

नॉमिनी को तुरंत क्या करना चाहिए
यदि आपका प्रिय व्यक्ति ड्रीमलाइनर में सवार था और आपको लगता है कि टिकट डेबिट या क्रेडिट कार्ड से खरीदा गया था, तो बिना देर किए निम्नलिखित कदम उठाएं:
1. उपयोग किए गए कार्ड की पहचान करें और बैंक स्टेटमेंट या टिकट खरीद की पुष्टि करने वाला एसएमएस ढूंढें.
2. जारीकर्ता बैंक/बीमाकर्ता से संपर्क करें और बैंक की वेबसाइट या कस्टमर केयर से आकस्मिक एयर डेथ कवर के तहत दावा प्रक्रिया प्राप्त करें.
3. तुरंत प्रारंभिक सूचना भेजें  और बीमाकर्ता को ईमेल या रजिस्टर्ड पोस्ट से औपचारिक सूचना भेजें. यह काम दस्तावेजों की कमी के बावजूद कर दें.
4. आवश्यक दस्तावेज एकत्र करें :
- हवाई टिकट या बुकिंग की पुष्टि
- मृत्यु प्रमाण पत्र
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट
- एफआईआर और घटना रिपोर्ट (यदि उपलब्ध हो)
- मृतक के साथ संबंध का प्रमाण
- नॉमिनी का पहचान पत्र और बैंक विवरण

5. पूर्ण दावा फाइल जमा करें, प्रारंभिक सूचना के बाद, बीमाकर्ता की चेकलिस्ट के अनुसार पूर्ण दस्तावेजों के साथ दावा दाखिल करें.
6. ट्रैक करें और आवश्यकता होने पर शिकायत दर्ज करें और हर ईमेल, पुष्टि और सबमिशन का रिकॉर्ड रखें. यदि 30 दिनों में उत्तर नहीं मिले, तो बीमा लोकपाल या IRDAI शिकायत पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें.

सरकार, एयरलाइनों और बीमाकर्ताओं की भूमिका
एक राष्ट्रीय त्रासदी के समय, यह प्रत्येक हितधारक की जिम्मेदारी है कि कोई भी परिवार जानकारी की कमी या नौकरशाही के कारण अपने वैध अधिकार से वंचित न रह जाए. तत्काल उठाए जाने वाले कदमों में शामिल होना चाहिए:

1. बैंक को उस दुर्भाग्यपूर्ण उड़ान से संबंधित लेन-देन की पहचान कर कार्डधारकों के परिवारों को सूचित करना चाहिए.
2. एयर इंडिया को बीमा कंपनियों के साथ यात्री सूची साझा करनी चाहिए और कार्ड के माध्यम से की गई टिकट खरीद की पुष्टि में सहायता करनी चाहिए.
3. सरकार को IRDAI को निर्देश देना चाहिए कि इस मामले में 30 दिन की समय सीमा को मानवीय दृष्टिकोण से शिथिल करें, और प्रभावित परिवारों वाले शहरों में एकल सहायता डेस्क स्थापित करें.

4. बीमा कंपनियों को सार्वजनिक सूचना जारी करनी चाहिए जिसमें दावा दायर करने की प्रक्रिया स्पष्ट और सरल शब्दों में बताई गई हो.

ये दावे क्यों महत्वपूर्ण हैं?
मॉन्ट्रियल कन्वेंशन के तहत अनिवार्य मुआवजे (लगभग ₹1.7 करोड़ प्रति मृतक यात्री) के अलावा, यह कार्ड-लिंक्ड बीमा प्रभावित परिवारों के लिए वित्तीय सहायता को दोगुना या तीन गुना तक बढ़ा सकता है. कुछ मामलों में, विशेष रूप से जब मृतक परिवार का मुख्य कमाने वाला हो, यह आश्रितों के लिए स्थिरता और संघर्ष के बीच का अंतर हो सकता है. अगर 150 यात्रियों ने पात्र कार्ड का उपयोग करके टिकट खरीदे हों और उनके नॉमिनी औसतन ₹1 करोड़ का दावा करें, तो ₹150 करोड़ या उससे अधिक की राशि का भुगतान किया जा सकता है, एक ऐसा फंड जो शिक्षा, होम लोन, स्वास्थ्य देखभाल और पीछे छूटे परिवारों की बुनियादी गरिमा में सहायता कर सकता है.

व्यापक सुधार की मांग
यह घटना यह भी रेखांकित करती है कि भारत में हवाई यात्रा बीमा को संभालने के तरीके में गहरे संरचनात्मक बदलाव की आवश्यकता है:

1. डिफॉल्ट पैसेंजर इंश्योरेंस: प्रत्येक टिकट में कम से कम ₹50 लाख का दुर्घटना कवर अंतर्निहित होना चाहिए, चाहे टिकट कैसे भी खरीदी गई हो.
2. अनिवार्य ई-नॉमिनेशन: बैंक और एयरलाइनों को बुकिंग या कार्ड सक्रियण के समय नॉमिनी विवरण एकत्र कर लिंक करना चाहिए.
3. एकीकृत दावा पोर्टल: एयरलाइन, बैंक और बीमाकर्ता से दावा दायर करने और पात्रता जांचने के लिए एकल पोर्टल भ्रम को समाप्त कर सकता है.

सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश पहले ही इस दिशा में आगे बढ़ चुके हैं. भारत के लिए इस दिशा में अग्रणी बनने में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए, ताकि हवाई यात्रियों के परिवारों की रक्षा केवल संयोग से नहीं, बल्कि सोच-समझकर की गई योजना से हो सके.

अंतिम संदेश: समय तेजी से बीत रहा है
जबकि नुकसान का दर्द शब्दों से परे है, अज्ञानता या देरी के कारण वैध वित्तीय मुआवजे से वंचित रह जाना एक दूसरी त्रासदी है, जिसे अब भी रोका जा सकता है. ड्रीमलाइनर दुर्घटना में जान गंवाने वालों के परिवारों के लिए 30 दिन की दावा समय सीमा अब लगभग समाप्त होने वाली है.

आइए भावनात्मक विनाश के साथ-साथ टाली जा सकने वाली वित्तीय कठिनाई को और न बढ़ाएं. अब समय है कि बैंक, बीमाकर्ता, सरकार और हर जिम्मेदार नागरिक यह सुनिश्चित करें कि कोई भी वैध नॉमिनी अनजान, असहाय या बिना मुआवजे के न रह जाए.

लेखक-विनोद के बंसल

(विनोद के बंसल एक अनुभवी चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं, जिनके पास वित्तीय बाजारों में 35 वर्षों से अधिक का अनुभव है. दिल्ली स्थित बंसल वैश्विक वित्तीय प्रवृत्तियों और निवेश रणनीतियों की गहरी समझ रखते हैं, जिससे वह वित्तीय क्षेत्र में एक विश्वसनीय आवाज माने जाते हैं. उनसे संपर्क किया जा सकता है: vinodkbansal@gmail.com)

 


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