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भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को आगे बढ़ाना: नट्स पर GST समानता क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत का खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र एक निर्णायक मोड़ पर है, जहाँ बादाम जैसे पौष्टिक और बहुपयोगी नट्स की भूमिका तेजी से बढ़ रही है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 11 months ago

भारत का खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र एक निर्णायक मोड़ पर है, जिसे बढ़ती घरेलू मांग और अनुकूल सरकारी नीतियों से बल मिल रहा है. जैसे-जैसे देश खाद्य नवाचार में वैश्विक नेता बनने की ओर अग्रसर है, बादाम और इस जैसे अन्य हेल्दी स्नैक्स अत्यंत बहुपयोगी सामग्री के रूप में उभर रहे हैं, जिनमें अपार संभावनाएं हैं. भारतीय संस्कृति में गहराई से रचे-बसे नट्स, विशेषकर बादाम, लंबे समय से अपने पोषण लाभों के लिए मूल्यवान रहे हैं और पारंपरिक आहार, त्योहारों और आयुर्वेद में इनकी केंद्रीय भूमिका रही है. जहां पहले ये मुख्यतः साबुत या मिठाइयों में उपयोग होते थे, अब बादाम जैसे नट्स भारत के तीव्र गति से बढ़ते खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में एक प्रमुख सामग्री के रूप में उभर रहे हैं. हालांकि, इस संभावित वृद्धि में एक बड़ा अवरोध वर्तमान वस्तु एवं सेवा कर (GST) की संरचना है.

हालांकि बादाम और पिस्ता एक ही ट्री नट श्रेणी में आते हैं, फिर भी इन पर 12% जीएसटी लगता है, जो अखरोट और काजू पर लगने वाले 5% कर की तुलना में काफी अधिक है. यह विसंगति प्रतिस्पर्धात्मक असंतुलन उत्पन्न करती है, जिससे भारत के नट्स-आधारित मूल्य संवर्धन क्षेत्र की वृद्धि बाधित होती है, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के विस्तार पर असर पड़ता है, और इस पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य सामग्री को उपभोक्ताओं के लिए कम सुलभ बनाती है. महत्वपूर्ण बात यह है कि जीएसटी लागू होने से पहले यह कर अंतर नहीं था. पूर्ववर्ती वैट प्रणाली के तहत, बादाम, काजू और अखरोट जैसे अन्य नट्स पर 16 से अधिक राज्यों में समान रूप से 5% कर लगाया जाता था और इनके बीच कोई भेद नहीं किया जाता था.

जैसे-जैसे जीएसटी व्यापक विचार-विमर्श और हितधारकों की भागीदारी से विकसित हो रहा है, इसकी वर्तमान संरचना को सरलता और समानता के सिद्धांतों के अनुरूप लाना जैसे वैट व्यवस्था में था, लंबे समय से चली आ रही उद्योग की चिंताओं को हल करने में मदद कर सकता है और भारत की व्यापक आर्थिक आकांक्षाओं के साथ-साथ बादाम जैसे हेल्दी फूड्स पर केंद्रित स्वस्थ भोजन की दिशा में भारत की प्राथमिकताओं को भी समर्थन दे सकता है. हालांकि इसमें देरी हुई है, लेकिन चल रही चर्चाएं इस बात का संकेत देती हैं कि पूर्ववर्ती मुद्दों पर सहयोग की भावना के साथ पुनर्विचार किया जा रहा है, और बादाम पर जीएसटी का युक्तिसंगत ढांचा एक सकारात्मक कदम हो सकता है.

बादाम को एक अत्यधिक बहुपयोगी सामग्री के रूप में पहचाना गया है, जिसमें कई स्वास्थ्य लाभ हैं. यह 14 से अधिक विभिन्न रूपों में उपलब्ध हैं जैसे डाइस्ड या चॉप किए गए बादाम जो कोटिंग्स, फिलिंग्स या टॉपिंग्स में टेक्सचर और क्रंच जोड़ते हैं, बादाम का आटा जो गाढ़ापन प्रदान करता है, और स्प्रेड्स के लिए बादाम बटर, बादाम पारंपरिक और आधुनिक दोनों प्रकार के व्यंजनों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. हालांकि, भारत में प्रति व्यक्ति बादाम की खपत केवल 0.2 किलोग्राम है. यह अमेरिका, जर्मनी और इटली जैसे देशों की तुलना में बहुत कम है, जहां प्रति व्यक्ति खपत 1 किलोग्राम से अधिक है.

बादाम पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, जो 15 आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करते हैं, जिनमें फाइबर और प्रोटीन शामिल हैं, साथ ही एंटीऑक्सीडेंट्स जो समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं. प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित शोध लगातार इनके स्वास्थ्य लाभों को उजागर करते रहे हैं. भारत में किए गए एक महत्वपूर्ण शोध से यह पता चला है कि भोजन से पहले बादाम का सेवन प्री-डायबिटिक व्यक्तियों में रक्त शर्करा स्तर को सुधारने में मदद कर सकता है, जो उस देश के लिए एक महत्वपूर्ण लाभ है जहां 7.7 लाख से अधिक वयस्क मधुमेह से पीड़ित हैं.

भारत में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग एक महत्वपूर्ण आर्थिक प्रेरक है, जो लगभग 8% की औसत वार्षिक दर से बढ़ रहा है और विनिर्माण क्षेत्र के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 14% तथा देश के निर्यात में 13% का योगदान देता है. महत्वपूर्ण रूप से, यह भारत के संगठित विनिर्माण क्षेत्र में सबसे बड़े रोजगार सृजनकर्ताओं में से एक है, जो ग्रामीण उद्यमियों से लेकर बड़े पैमाने पर औद्योगिक श्रमिकों तक विभिन्न स्तरों पर आजीविका प्रदान करता है. बादाम पर GST दरों का युक्तिकरण इस उच्च संभावनाशील क्षेत्र को एक महत्वपूर्ण प्रोत्साहन प्रदान कर सकता है, जिससे निर्माताओं के लिए इनपुट लागत कम होगी और बादाम दूध, मक्खन और स्नैक्स जैसे मूल्य-वर्धित उत्पादों के उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा. सामग्री पर कम GST दरें डाउनस्ट्रीम प्रसंस्करण गतिविधियों में वृद्धि को अनलॉक करने में मदद कर सकती हैं, जिससे आपूर्ति श्रृंखलाओं में हजारों नए रोजगार सृजित होंगे. यह दृष्टिकोण विशेष रूप से उन लघु एवं मध्यम उद्यमों (SMEs) को सशक्त बना सकता है, जो भारत के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं.

भारत ने स्वस्थ खानपान को एक रणनीतिक प्राथमिकता के रूप में चिन्हित किया है. बादाम आधारित मूल्य-वर्धित उद्योग में नवाचार को प्रोत्साहित करने हेतु GST शुल्कों में कटौती करना, पोषणयुक्त, स्वास्थ्यवर्धक और पौधों पर आधारित खाद्य पदार्थों की खपत को बढ़ावा देने के प्रयासों के अनुरूप है. यह देखा गया है कि पौधों पर आधारित खाद्य पदार्थ जो पारंपरिक विकल्पों की तुलना में स्वाद और किफायती दोनों ही दृष्टियों से उपयुक्त होते हैं, उनमें महत्वपूर्ण बाजार संभावनाएं होती हैं. भारत में, शाकाहारी खाद्य बाजार वर्ष 2023 में ₹12,552 करोड़ तक पहुंच गया, और विश्लेषकों का अनुमान है कि यह 2024 से 2032 की अवधि में 10.04% की संयुक्त वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) के साथ बढ़कर ₹29,718 करोड़ तक पहुंच जाएगा. वैश्विक स्तर पर भी पौधों पर आधारित खाद्य बाजार में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावनाएं हैं. वृक्षीय मेवों की श्रेणी में, बादाम नए उत्पाद विकास में अग्रणी मेवा के रूप में उभरा है, जिसमें वैश्विक स्तर पर 12,000 से अधिक नए उत्पाद लॉन्च हुए हैं. भारत में ही 2015 से बादाम-आधारित उत्पादों की शुरुआत में चार गुना वृद्धि हुई है, जिनमें तेजी से बढ़ने वाली सामग्रियों में बादाम पेस्ट, बादाम आटा, बादाम प्रोटीन और बादाम मक्खन शामिल हैं, जो पौधों पर आधारित स्नैक्स में प्रयुक्त होते हैं। इस बाजार के अवसर का विशाल आकार भारतीय खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए जबरदस्त संभावनाएं प्रस्तुत करता है, केवल घरेलू मांग को पूरा करने के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं को भी पूरा करने के लिए

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने सक्षम नीतियों के माध्यम से इस क्षेत्र की वृद्धि में एक प्रमुख भूमिका निभाई है, जिसमें निर्यात को एक प्रमुख प्रेरक के रूप में चिन्हित किया गया है. केंद्रीय मंत्री श्री चिराग पासवान ने भी वैश्विक बाजारों में भारतीय प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया है और अगले 3–4 वर्षों में मूल्य-वर्धित निर्यात में 40% वृद्धि का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है. इस दृष्टिकोण को साकार करने के लिए उच्च संभावनाशील उत्पादों को प्रोत्साहन देना आवश्यक है, और बादाम जैसे मेवे भारत को पौधों पर आधारित, पोषणयुक्त खाद्य पदार्थों के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं. इस संभाव्यता को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, समान अवसर सुनिश्चित करना है. सभी वृक्षीय मेवों पर GST को 5% पर लाना इस पोषक तत्वों से भरपूर सामग्री को भारतीय उपभोक्ताओं के लिए अधिक सुलभ बना देगा और साथ ही भारत के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को भी सशक्त बनाएगा. कर बाधाओं को कम करना पौष्टिक आहार को बढ़ावा देने और निर्यात बाजारों में भारत के मूल्य-वर्धित बादाम उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने का दोहरा लक्ष्य प्राप्त करता है. विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में अग्रसर भारत के लिए अब निर्णायक कदम उठाने का समय है.

लेखक - विजय बिजलानी, निदेशक, SAO फूड्स


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