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लोहे जैसी इच्छाशक्ति और पवित्र संकल्प का दशक: धर्ममार्ग पर मोदी युग का उदय

श्रद्धेय मोदी जी के जन्मदिन पर भारत की सनातन ज्ञान गंगा को समर्पित यह लेख एक आध्यात्मिक भावांजलि है मोदी युग के उस गूढ़ आयाम को समर्पित, जो शब्दों से नहीं, साधना से समझा जा सकता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 11 months ago

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत..."

जब-जब धर्म की हानि होती है, तब-तब मैं स्वयं प्रकट होता हूँ.

-भगवद गीता 4.7

एक राष्ट्र की यात्रा में कुछ क्षण ऐसे होते हैं जो समय और इतिहास की साधारण गति से ऊपर उठ जाते हैं। ये केवल नीतियों या घटनाओं से नहीं, बल्कि एक विलक्षण इच्छाशक्ति की उपस्थिति से परिभाषित युग बन जाते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व भी एक ऐसा ही युग है. आज जब वे जीवन के 75 वर्ष पूर्ण कर त्रिकालकाल में प्रवेश कर रहे हैं, वह काल जब अतीत, वर्तमान और भविष्य कर्मफल में समाहित होते हैं, तो यह अवसर केवल उनके कार्यों पर नहीं, बल्कि उनके अस्तित्व पर चिंतन का है, जो भारत की आत्मा के साथ एक हो गया है.

1. मोदी 1.0 (2014–2019): एक सोए हुए दैत्य का जागरण

2014 में जब मोदी जी ने देश की बागडोर संभाली, तब भारत अनिश्चितता, भ्रष्टाचार और आर्थिक ठहराव के दौर से गुजर रहा था. लेकिन उन्होंने आशा, आत्मसम्मान और उत्तरदायित्व की नई भाषा दी. जन धन योजना, स्वच्छ भारत, डिजिटल इंडिया, उज्ज्वला योजना, ये केवल योजनाएं नहीं थीं, बल्कि एक नवीन शासन संस्कृति का शंखनाद था. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को फिर से सभ्यता आधारित शक्ति के रूप में प्रतिष्ठा दिलाई. एक ओजस्वी नेता से उत्कृष्ट राजनेता बनने की यात्रा का यह प्रारंभ था.

2. मोदी 2.0 (2019–2024): साहसिक निर्णयों और अंतरात्मा की आवाज़ का युग**

दूसरे कार्यकाल में जो निर्णय हुए, वे केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि धार्मिक, सांस्कृतिक और कर्म आधारित सुधार थे. अनुच्छेद 370 का हटाया जाना, भारत माता की अखंडता की पुनर्स्थापना. तीन तलाक का अपराधीकरण, नागरिकता संशोधन अधिनियम, नई शिक्षा नीति, ये आत्मा से संचालित निर्णय थे. कोरोना महामारी में वैश्विक नेतृत्व के उदाहरण बने “वैक्सीन मैत्री” इसका प्रतीक है. परंतु मेरे लिए सबसे भावपूर्ण क्षण था अयोध्या में श्रीराम लला का पुनः प्रतिष्ठापन, वह क्षण जब एक हिंदू प्रधानमंत्री ने विजय में नहीं, भक्ति और समर्पण में श्रीराम के समक्ष नमन किया, वह धर्म की सर्वोच्च अभिव्यक्ति थी.

3. मोदी 3.0 (2024–वर्तमान): अमृत काल में प्रवेश और विकसित भारत का निर्माण
09-06-2024, एक विशेष दिन (संख्या 9-6-6 → 9:12), जब मोदी जी ने भारत के अमृत काल के शिल्पकार के रूप में तीसरी बार शपथ ली.  PM गति शक्ति मास्टरप्लान, सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता, G20 नेतृत्व- “एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य”, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, महिला उद्यमिता, आयुष और आयुर्वेद का पुनर्जागरण जैसी प्रत्येक पहल में भविष्यदृष्टि और आध्यात्मिक गहराई झलकती है. अब भारत केवल निर्मित नहीं हो रहा बल्कि भारत को याद किया जा रहा है.

4. जनादेश से परे एक साधक

देश के हर ऐतिहासिक और निर्णायक फैसले के पीछे मोदी के रूप में संयमी, अनुशासित, तीव्र दृष्टिवान, और पूर्णतः समर्पित पुरुष खड़ा है. प्रधानमंत्री मोदी को देखना मानो एक कर्मयोगी को देखना है, जो राजनीति की पोशाक में तपस्विता का जीवन जी रहा है. कभी भाषण में छलकते आँसू, तो कभी मंदिरों में मौन उपस्थिति वह सिर्फ एक राजनेता नहीं हैं, बल्कि एक साधक हैं, जो तपस्या, निमित्त और संकल्प के मार्ग पर अग्रसर हैं. वह एक सन्यासी जैसी मौन तपस्या में लीन रहते हैं अक्सर गलत समझे जाते हैं, लेकिन भीतर से एक अविचल स्पष्टता से संचालित होते हैं. "दो गड़गड़ाहटों के बीच का मौन ही तूफ़ान को परिभाषित करता है."

5. मेरी अनुभूति: राष्ट्रपति भवन में एक आध्यात्मिक संकेत

9 जून 2024 की रात, जब मोदी जी राष्ट्रपति भवन में शपथ ले रहे थे, उसी क्षण NDTV पर मेरी छवि और गीता का श्लोक प्रसारित हुआ: “यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत…” उस क्षण मेरे भीतर एक कंपन हुआ. यह संयोग नहीं था यह धर्म का संकेत था. धर्म अपने द्रष्टाओं को उचित स्थान पर रखता है सत्ता में नहीं, पर स्थिति में संख्याएं मात्र अंक नहीं, कर्म के संकेत हैं. 09-06-2024 → 9-6-6 → 9:12 और प्रधानमंत्री की आयु 75 → 7+5 = 12, यह दैवीय संकेत हैं कि श्रद्धेय मोदी जी को राष्ट्र के रूपांतरण के लिए चुना गया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के लिए मेरी प्रार्थना और शुभकामनाएं ! आप सदा धर्म में स्थित कर्म से प्रेरित और माया से अछूते रहें.  इस 75वें वर्ष में आपकी नीति के साथ-साथ जीवन में शांति और संतुलन का विस्तार हो.

एक भारत, रत्नमय भारत

एक वज्र समान महानायक

सदा अमर रहे भारत

सदा जिए महानायक

(डिस्क्लेमर : इस लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के हैं और यह जरूरी नहीं कि वे प्रकाशन के विचारों को भी दर्शाती हों.)

 

 

 

 

अतिथि लेखक-परम अजहन गुरुजी श्री अर्णव, “मेंटॉर ऑफ मेंटॉर्स”,  संस्थापक  जेमस्टोन यूनिवर्स,  आध्यात्मिक रणनीतिकार व एस्ट्रो-जैमोलॉजी के जनक


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