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2025 में भारत में सिनेमा एडवरटाइजमेंट 9% बढ़ने की उम्मीद, PMAR ने रिपोर्ट में किया दावा
2024 में कुछ अच्छी खबरों में से एक थी Pushpa 2: The Rule, जिसने अकेले ₹100 करोड़ का सिनेमा विज्ञापन जुटाया.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
भारत में सिनेमा विज्ञापन उद्योग (Indian cinema advertising industry) ने 2024 में केवल 10% की वृद्धि दर्ज की, जिससे इसका कुल मूल्य ₹851 करोड़ हो गया. Pitch-Madison Advertising Report 2025 के अनुसार, यह 2021 में कोरोना महामारी के कारण आई गिरावट (₹136 करोड़) से सुधार तो है, लेकिन अभी भी 2019 के प्री-कोविड स्तर (₹1,050 करोड़) से 20% कम है. 2023 में 36% की तेज़ वृद्धि के मुकाबले, 2024 में धीमी गति से बढ़ोतरी दिखी, जिससे उद्योग की चुनौतियाँ साफ़ नज़र आती हैं.
2024 में Pushpa 2: The Rule एक बड़ी सफलता रही और इसने अकेले ₹100 करोड़ का सिनेमा विज्ञापन जुटाया। इससे यह साफ़ हुआ कि साउथ इंडियन सिनेमा अब विज्ञापन कमाई में बड़ा योगदान दे रहा है. दूसरी ओर, बॉलीवुड लगातार बड़ी हिट फ़िल्में देने में नाकाम रहा है. कभी भारतीय सिनेमा की रीढ़ माने जाने वाले बॉलीवुड में दर्शकों को फिर से थिएटर में खींचने की ताकत नहीं दिखी. इसकी वजह से विज्ञापन खर्च भी कम हो गया. सिनेमा विज्ञापन अब ज़्यादातर बड़े बजट की सुपरहिट फ़िल्मों पर निर्भर है, इसलिए जब बॉलीवुड कमजोर प्रदर्शन करता है, तो पूरा उद्योग प्रभावित होता है.
सिनेमा विज्ञापन का बाजार कुल विज्ञापन खर्च का 1% से भी कम
सिनेमा विज्ञापन अभी भी भारत के कुल विज्ञापन खर्च (adex) का बहुत छोटा हिस्सा है. पहले भी इसका हिस्सा 1% से कम रहा है, और 2024 में भी यही ट्रेंड जारी है. डिजिटल और टीवी विज्ञापन कोरोना के बाद तेज़ी से बढ़े हैं, लेकिन सिनेमा विज्ञापन अब भी फ़िल्मों की बॉक्स ऑफिस सफलता पर निर्भर करता है. इस वजह से इसकी ग्रोथ धीमी बनी हुई है.
2025 का अनुमान: धीमी वृद्धि और जारी चुनौतियां
उद्योग के अनुमान के अनुसार, 2025 में सिनेमा विज्ञापन सिर्फ 9% की दर से बढ़ेगा, जिससे इसका कुल मूल्य लगभग ₹950 करोड़ तक पहुंचेगा. इसका मतलब है कि 2025 के अंत तक भी यह प्री-कोविड स्तर (₹1,050 करोड़) से पीछे रहेगा.
इस धीमी वृद्धि के पीछे कई कारण हैं:
• OTT प्लेटफॉर्म का बढ़ता प्रभाव: स्ट्रीमिंग सेवाओं की बढ़ती लोकप्रियता के कारण लोग सिनेमाघरों में कम जा रहे हैं, जिससे विज्ञापन की माँग भी घट रही है.
• हिट फिल्मों की कमी: दक्षिण भारतीय फ़िल्में तो अच्छा कर रही हैं, लेकिन बॉलीवुड की अस्थिरता पूरे उद्योग की वृद्धि को सीमित कर रही है.
• विज्ञापन बजट का बंटवारा: कंपनियाँ अपने विज्ञापन बजट का बड़ा हिस्सा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर खर्च कर रही हैं, क्योंकि वहाँ दर्शकों तक सीधे और बेहतर तरीके से पहुँचना आसान है.
रिपोर्ट के अनुसार "2025 में सिनेमा विज्ञापन ₹950 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है, लेकिन यह अभी भी प्री-कोविड स्तर ₹1,050 करोड़ से कम रहेगा. इससे साफ़ है कि उद्योग को पूरी तरह से उबरने में और समय लगेगा. OTT प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते चलन ने सिनेमा विज्ञापन पर गहरा असर डाला है. लोग अब मनोरंजन के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की ओर जा रहे हैं, जिससे सिनेमाघरों में दर्शकों की संख्या कम हो रही है."
आगे बढ़ रहा है दक्षिण भारतीय सिनेमा
जबकि बॉलीवुड संघर्ष कर रहा है, दक्षिण भारतीय सिनेमा तेजी से आगे बढ़ रहा है. पिछले कुछ सालों में, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम फिल्मों ने लगातार बड़ी हिट फिल्में दी हैं, जो विज्ञापनदाताओं को आकर्षित कर रही हैं. यह ट्रेंड 2025 में भी जारी रहने की उम्मीद है. ब्रांड्स उन फिल्मों में निवेश करना पसंद कर रहे हैं, जो ज्यादा दर्शकों को थिएटर तक लाने की गारंटी देती हैं.
क्या बॉलीवुड खुद को नया रूप दे सकता है?
सिनेमा विज्ञापन को फिर से प्री-कोविड स्तर तक पहुँचाने के लिए, बॉलीवुड को खुद को बदलना होगा. फ़िल्म निर्माताओं को ऐसी कहानियां बनानी होंगी जो दर्शकों को पसंद आएं और उन्हें दोबारा थिएटर तक लाएं. अगर बॉलीवुड लगातार हिट फ़िल्में नहीं दे पाया, तो सिनेमा विज्ञापन की वृद्धि रुक सकती है.
जैसे-जैसे उद्योग आगे बढ़ रहा है, सवाल यही है: क्या बॉलीवुड फिर से अपनी बादशाहत कायम करेगा, या दक्षिण भारतीय सिनेमा ही सिनेमा विज्ञापन का सबसे बड़ा खिलाड़ी बना रहेगा?
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