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मुंबई में लॉन्च हुई ‘नमस्ते कान्स’, कान्स फिल्म महोत्सव में भारत की सिनेमाई यात्रा का अनोखा दस्तावेज
इस पुस्तक में 1946 में शुरू हुए कान्स फिल्म फेस्टिवल में भारत की सिनेमाई यात्रा का विस्तृत और जीवंत वर्णन किया गया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago
भारतीय सिनेमा की वैश्विक यात्रा और कान्स फिल्म महोत्सव से उसके ऐतिहासिक संबंध को दर्ज करती पुस्तक “नमस्ते कान्स” का 12 मार्च 2026 को मुंबई में भव्य लोकार्पण किया गया. लेखक और फिल्मकार भुवन लाल की इस पुस्तक में 1946 में शुरू हुए कान्स फिल्म महोत्सव में भारत की मौजूदगी, उपलब्धियों और प्रभाव का विस्तृत और रोचक वर्णन किया गया है.
यह कार्यक्रम केवल एक पुस्तक विमोचन नहीं रहा, बल्कि भारतीय सिनेमा के गौरवशाली इतिहास, उसकी विरासत और वैश्विक प्रभाव का उत्सव बन गया. फिल्म जगत से जुड़े कई प्रतिष्ठित कलाकारों और फिल्मकारों की मौजूदगी ने इस शाम को खास बना दिया. इस पुस्तक में 1946 में शुरू हुए कान्स फिल्म फेस्टिवल में भारत की सिनेमाई यात्रा का विस्तृत और जीवंत वर्णन किया गया है. कार्यक्रम में उपस्थित फिल्मकारों, कलाकारों और सिनेमा प्रेमियों ने इसे भारतीय सिनेमा के इतिहास को सम्मान देने वाला महत्वपूर्ण क्षण बताया.
कार्यक्रम के दौरान जब भुवन लाल मंच पर आए तो माहौल भावनात्मक हो गया. उन्होंने भारतीय सिनेमा की महान हस्तियों को याद करते हुए कहा कि यह पुस्तक उन दिग्गजों को श्रद्धांजलि है जिन्होंने भारत को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई. उन्होंने चेतन आनंद, सत्यजीत रे, वी. शांताराम, बिमल रॉय, राज कपूर, मृणाल सेन, श्याम बेनेगल, मणि कौल, शाजी एन. करुण और हाल के वर्षों में कान्स में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली पायल कापड़िया जैसी हस्तियों का विशेष उल्लेख किया.
भुवन लाल ने कहा, “आज हम भारत की सबसे बड़ी सांस्कृतिक देन भारतीय सिनेमा का उत्सव मना रहे हैं. हमारी फिल्मों ने दशकों से दुनिया भर में दिल और दिमाग जीते हैं. हमारी कहानियाँ बिना वीज़ा के सीमाएँ पार कर गईं. हमारा संगीत उन घरों में बजा जहाँ लोगों ने भारत को कभी देखा भी नहीं था, फिर भी वे उसे अपना महसूस करते थे.”
उन्होंने कहा कि राज कपूर और शाहरुख खान जैसे सितारे भारत की सांस्कृतिक कूटनीति के असली दूत रहे हैं, जिन्होंने दुनियाभर में भारतीय सिनेमा की पहचान बनाई.
इस अवसर पर मंच पर तीन प्रतिष्ठित हस्तियाँ भी मौजूद थीं. सुभाष घई, कबीर बेदी और केतन मेहता. तीनों ने भारतीय सिनेमा के वैश्विक प्रभाव और कान्स में उसकी यात्रा पर अपने अनुभव साझा किए. बातचीत के दौरान कई भावुक और प्रेरक क्षण भी आए, जिसने दर्शकों को भारतीय सिनेमा की उपलब्धियों पर विचार करने को प्रेरित किया.
कार्यक्रम में केतन आनंद ने अपने पिता चेतन आनंद को याद किया, जिन्हें 1946 में कान्स में पहला ग्रां प्री पुरस्कार मिला था. वहीं देविका भोजवानी ने अपने पिता और कान्स पुरस्कार विजेता फिल्मकार राजबंस खन्ना की 1957 की कान्स यात्रा को याद किया.
इस समारोह में रेसुल पुकुट्टी, दीपा साहि, मुकेश ऋषि, कश्मीरा शाह, सुदीप्तो सेन सहित कई जानी-मानी हस्तियाँ उपस्थित रहीं.
“नमस्ते कान्स” भारतीय सिनेमा की उस ऐतिहासिक यात्रा का दस्तावेज है जो 1946 में शुरू हुए कान्स फिल्म फेस्टिवल से जुड़ी हुई है. पुस्तक यह बताती है कि किस तरह भारत की कहानी कहने की परंपरा, दूरदर्शी फिल्मकारों और फिल्म उद्योग ने वैश्विक मंच पर भारत की छवि को मजबूत किया और उसकी सॉफ्ट पावर को बढ़ाया.
लेखक भुवन लाल पिछले तीन दशकों से दुनिया भर में भारत की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सिनेमाई विरासत को प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने फीचर फिल्में, डॉक्यूमेंट्री, हॉलीवुड टीवी सीरीज और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों का निर्माण किया है. बता दें, भुवन लाल प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद्र बोस और हरदयाल की जीवनी भी लिख चुके हैं.
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