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चेक बाउंस मामले में नहीं काटने पड़ेंगे कोर्ट के चक्कर, Supreme Court ने दी ये सलाह

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक चेक बाउंस (Cheque Bounce) की सुनवाई करते हुए लोअर कोर्ट और आम लोगों के लिए एक सलाह दी है. इस सलाह को मानते हुए लोग कोर्ट आने के चक्कर से बच सकते हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

आजकल डिजिटल पेमेंट के चलते चेक के आदान-प्रदान का चलन कम हुआ है, लेकिन अभी भी कई मामलों में चेक बाउंस (Cheque Bounce) के चलते लोगों को कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने पड़ते हैं. अगर आपका चेक बाउंस हुआ है, या आपको किसी ने चेक दिया और उसका पेमेंट क्लियर ही नहीं हुआ. तो आपको जानकारी होगी कि चेक बाउंस के मामलों में कितनी बार कोर्ट के चक्कर काटने पड़ते हैं. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने चेक बाउंस के ही एक मामले की सुनवाई के दौरान एक जबरदस्त सलाह दी है, जिसकी वजह से आप चेक बाउंस के मामले में कोर्ट के झंझट से बच सकते हैं. तो आइए जानते हैं सुप्रीम ने क्या सलाह ही है? 

बड़ी संख्या में कोर्ट में लंबित पड़े चेक बाउंस के मामले
देश की विभन्न कोर्ट में चेक बाउंस से जुड़े मामले बड़ी संख्या में लंबित पड़े हैं. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने ‘गंभीर चिंता’ व्यक्त की है. ऐसे ही एक मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस ए. अमानुल्लाह की पीठ ने चेक बाउंस के मामलों के तेजी से निपटारे के लिए अपनी सलाह भी दी.

कोर्ट ने अभियुक्त की सजा को किया रद्द
जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस ए. अमानुल्लाह की पीठ ने चेक बाउंस मामले की सुनवाई के बाद मामले में अभियुक्त (Accused) पी. कुमारसामी नाम के एक व्यक्ति की सजा रद्द कर दी. पीठ ने अपने आब्जर्वेशन में पाया कि दोनों पक्षों के बीच चेक बाउंस के मामले में समझौता हो चुका है. वहीं, अभियुक्त की ओर से शिकायतकर्ता को 5.25 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है.

सजा देने की जगह निपटान को दी जाए प्राथमिकता

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि देश की विभिन्न कोर्ट में चेक बाउंस से जुड़े मामले बड़ी संख्या में लंबित हैं. ये देश की न्यायिक व्यवस्था के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है. इसे ध्यान में रखते हुए इनका निपटान करने के तरीके को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ना कि सजा देने के तरीके पर फोकस करना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालतों को कानून के दायरे में रहते हुए निपटान को बढ़ावा देने के लिए काम करना चाहिए, अगर दोनों पक्ष ऐसा करने के इच्छुक हैं. कोर्ट के अलावा दोनों पक्ष भी आपस में मिलकर चेक बाउंस जैसे मामलों का निपटान कर सकते हैं, जिससे कोर्ट आने से बचा जा सके.

इन सब मामलों में भी काम आएगी ये सलाह
सुप्रीम कोर्ट की ये सलाह सिर्फ चेक बाउंस के केस में ही नहीं बल्कि कानूनी तौर पर लिखे गए सभी तरह के वचन पत्रों में विवाद की स्थिति पैदा होने पर मामलों के निपटारे में काम आ सकती है. पीठ ने 11 जुलाई को जो आदेश पारित किया, उसमें ये भी कहा कि समझौता योग्य अपराध ऐसे होते हैं, जिनमें प्रतिद्वंद्वी पक्षों के बीच समझौता हो सकता है. हमें यह याद रखना होगा कि चेक का बाउंस होना एक रेग्युलेटरी क्राइम है जिसे केवल सार्वजनिक हित को देखते हुए अपराध की श्रेणी में लाया गया है, ताकि संबंधित नियमों की विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके.

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