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इस अधिकारी के सामने बड़े से बड़ा घूसखोर भी शरमा जाए, रिश्वत में मांग लिए 3 एयरक्राफ्ट!
सरकार ने DGCA के एक वरिष्ठ अधिकारी को रिश्वतखोरी के मामले में निलंबित कर दिया है. मामले की जांच CBI और ED को सौंपी गई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
रिश्वतखोरी की खबरें तो अक्सर सुनने में आ जाती हैं. लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि रिश्वत में लाख-दो लाख नहीं बल्कि पूरा का पूरा हवाई जहाज ही मांग लिया गया हो? आपको भले ही अपने कानों पर यकीन न हो, मगर ऐसा वाकई हुआ है. डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन यानी DGCA में डायरेक्टोरेट ऑफ एयरोस्पोर्ट्स के निदेशक कैप्टन अनिल गिल (Captain Anil Gill) पर रिश्वत में एयरक्राफ्ट (Aircraft) लेने का आरोप है. सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया है और मामले की जांच सीबीआई एवं ED को सौंपी है.
गिल को 3 एयरक्राफ्ट मिले
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अनिल गिल पर फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूलों से रिश्वत के तौर पर 3 एयरक्राफ्ट लेने का आरोप है. इस रिश्वत के बदले उन्होंने ऑडिट के दौरान फ्लाइंग ट्रेनिंग आर्गेनाईजेशन (FTO) की कुछ खामियों को नजरअंदाज कर दिया था, जिसमें सुरक्षा से जुड़ी खामियां भी शामिल थीं. जाहिर है, ये कोई छोटा मामला नहीं था, इसलिए जैसे ही मामले की भनक लगी सरकार ने आरोपी गिल को निलंबित कर दिया. अब सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टीगेशन यानी सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ED) अनिल गिल पर लगे आरोपों की जांच करेंगे.
यहां भी कर चुके हैं काम
निलंबन से पहले अनिल गिल DGCA में डायरेक्टोरेट ऑफ एयरोस्पोर्ट्स के निदेशक थे. इससे पूर्व वह DGCA के फ्लाइंग एंड ट्रेनिंग डिवीजन के डायरेक्टर की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. उन्होंने 2013 में लॉ की बैंचलर डिग्री हासिल की थी. 2009 से 2015 तक गिल हरियाणा सरकार में पायलट इंस्ट्रक्टर थे. 2015 में उन्होंने डायेरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन में डिप्टी डायरेक्टर फ्लाइंग ट्रेनिंग का पदभार संभाला था. गिल पर लगे आरोपों ने सभी को हैरान कर दिया है. बातें हो रही हैं कि जब रिश्वत में 3 क्राफ्ट मिले, तो संबंधित फ्लाइंग ट्रेनिंग आर्गेनाईजेशन की खामियां कितनी ज्यादा बड़ी और गंभीर होंगी.
ऐसे हुआ मामले का खुलासा
अब यह भी जान लेते हैं कि इस पूरे मामले का खुलासा आखिर कैसे हुआ. 25 अक्टूबर को विमानन अधिकारियों को एक गुमनाम पत्र मिला, जिसमें अनिल गिल पर गंभीर आरोप लगाए गए थे. पत्र में लिखा था कि गिल ने FTO से रिश्वत में 3 एयरक्राफ्ट लिए हैं. अब एयरक्राफ्ट कोई छोटी-मोटी चीज तो है नहीं, जो किसी की नजर में नहीं आता. इसलिए गिल ने उन एयरक्राफ्ट को 90 लाख रुपए के पट्टे पर दूसरे ट्रेनिंग स्कूलों को दे दिया. इस चट्ठी ने DGCA के वरिष्ठ अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए. तुरंत जांच के लिए विजिलेंस कमेटी की गठन किया गया. रिपोर्ट आने के बाद उन्हें डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन में डायरेक्टोरेट ऑफ एयरोस्पोर्ट्स के निदेशक पद से हटा दिया गया.
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