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हमने खुलकर विदेशी कानूनी फर्मों के भारत में प्रवेश का विरोध किया है : डॉ. ललित भसीन

जाने माने कानूनविद और भसीन एंड कंपनी के मैनेजिंग पार्टनर डॉ. ललित भसीन ने कहा कि हमारे काम करने के तरीकों में 1991 के बाद काफी बदलाव आए हैं. पहले हम रिसर्च करने पुस्‍तकालय जाया करते थे.

ललित नारायण कांडपाल 3 years ago

देश की राजधानी दिल्‍ली में BW Legal World कार्यक्रम भसीन एंड कंपनी के मैनेजिंग पार्टनर डॉ. ललित भसीन ने अपनी बात रखते हुए कई अहम बातों को कहा. उन्‍होंने देश की इकोनॉमी में इस पेशे की महत्‍ता पर प्रकाश डालते हुए कई अहम बातें कही. पिछले 6 दशकों से लीगल प्रैक्टिस कर रहे डॉ. भसीन ने भारतीय कानूनी पेशे पर गर्व जताते हुए कहा कि ये दुनिया में किसी से पीछे नहीं है. उन्‍होंने कहा कि हम नहीं चाहते थे कि विदेशी कानून फर्म यहां आए. हमने इसका खुलकर विरोध किया.

वकीलों की भूमिका का नहीं है अहसास

BW Legal World के इवेंट में बोलते हुए डॉ. भसीन ने कहा, लोगों को यह एहसास नहीं है कि देश के आर्थिक विकास में वकीलों, कानूनी पेशेवरों की क्या भूमिका है, चाहे वह इन हाउस हों या बाहर के हों. उन्‍होंने कहा कि वकीलों के बिना, आप सरकारों के बीच भी बहुराष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय समझौते, विलय या अधिग्रहण, प्रोटोकॉल, सम्मेलन, संधियाँ नहीं कर सकते. यही वह महत्वपूर्ण भूमिका है जो यह पेशा निभाता है. भारतीय कानूनी पेशा आज जिस रूप में खड़ा है, वह दुनिया में किसी से पीछे नहीं है.

काम करने के तरीकों में आया है बड़ा बदलाव

डॉ. भसीन ने वकीलों के काम करने के तरीकों को लेकर आजादी के बाद और 1990 के दशक के बाद काफी बदलाव आए हैं. उन्‍होंने अपने जीवन का अनुभव बताते हुए कहा कि मैंने आज़ादी के बाद और 1950 के बाद, जब हमारा संविधान लागू हुआ, कानूनी पेशे में बहुत बदलाव देखें हैं. उन्‍होंने अपने संघर्ष के दिनों के बारे में बताते हुए कहा कि जब मैंने 1960 के दशक की शुरुआत में अपनी कानूनी प्रैक्टिस शुरू की, तो मैं केस पर रिसर्च करने के लिए पुस्तकालय जाता था और क्योंकि उस समय रिसर्च का कोई उपकरण उपलब्ध नहीं था.

यहां तक ​​कि काले पारंपरिक लैंडलाइन फोन भी आसानी से उपलब्ध नहीं थे. फिर मैंने देखा कि समय के साथ चीजें बदलती गईं और भारतीय अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे उदारीकृत होती गई. लेकिन क्रांतिकारी बदलाव 90 के दशक की शुरुआत में आए जब भारतीय अर्थव्यवस्था पूरी तरह से खुल गई. हमने देश में अच्छे संसाधनों और प्रौद्योगिकी के अच्छे ज्ञान के साथ कुछ अच्छी कानून फर्मों की वृद्धि देखी. इससे भारत में कानूनी पेशे को मजबूती मिली.

भारत में विदेशी कानून फर्मों के प्रवेश का विरोध किया

डॉ. भसीन ने भारत में विदेशी कानून फर्मों के प्रवेश को लेकर भी अपनी बात कही. उन्‍होंने कहा कि वर्ष 2000 में, जब भारतीय कानून फर्मों की सोसायटी की स्थापना की गई थी, हमने स्पष्टता, दृढ़ता से और जोरदार तरीके से भारत में विदेशी कानून फर्मों के प्रवेश का विरोध किया था क्योंकि हम सच को जानते थे. विदेशी कानून फर्मों हर तरह से सक्षम थी वो कंपनियाँ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भी विज्ञापन दे सकती हैं. भसीन ने कहा, हम किसी भी प्रतिस्पर्धा के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जब कोई हमारे देश में आ रहा है, तो वे निश्चित रूप से हमारे काम का कुछ हिस्सा लेने आ रहे हैं.

उन्‍होंने आज की एक परिस्थिति के बारे में बताया कि अगर मुझे लंदन में किसी वकील से कुछ सलाह लेनी हो तो मैं लंदन की एक सक्षम लॉ फर्म के पास जाता हूं, जो इसमें माहिर है, और यदि वे भारत से कुछ सलाह चाहते हैं, तो हम उसे साझा करते हैं. इस प्रकार का आपसी सहयोग और समन्वय आपके यहाँ कार्यालय स्थापित होने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है. लेकिन इससे उन्हें लाभ होगा यदि वे हमारे मुकाबले अनुचित लाभ के साथ यहां अपनी कानूनी फर्में स्थापित करेंगे. यह अस्वीकार्य है और यही बात हमने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को लगभग एक महीने पहले दिए गए एक अभ्यावेदन में बता दी है.


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