होम / कोर्ट कचहरी / कैरी बैग के लिए ज्यादा रुपये वसूलना V Mart को पड़ा भारी, कंज्यूमर कोर्ट ने लगाया जुर्माना
कैरी बैग के लिए ज्यादा रुपये वसूलना V Mart को पड़ा भारी, कंज्यूमर कोर्ट ने लगाया जुर्माना
लखनऊ में वी मार्ट के खिलाफ कंज्यूमर कोर्ट ने जुर्माना लगाया है. V Mart ने एक ग्राहक से कैरी बैग के लिए ज्यादा रुपये वसूले थे, जिसके खिलाफ ग्राहक के उपभोक्ता अदालत में गुहार लगाई.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
रिटेल स्टोर वी मार्ट (V Mart) को कैरी बैग के लिए ग्राहक से ज्यादा रुपये वसूलना भारी पड़ा है. इस मामले में उपभोक्ता अदालत (Consumer Court) ने वी मार्ट पर भारी जुर्माना लगा दिया है. साथ ही, ग्राहक को कैरी बैग के रुपये भी वापस करने का आदेश दिया है. दरअसल, लखनऊ के एक ग्राहक ने वी मार्ट से खरीदारी के दौरान कैरी बैग के लिए रुपये चुकाए थे. ग्राहक ने इसे गलत मानकर उपभोक्ता अदालत में केस दर्ज किया था. इस पर कोर्ट ने ग्राहक के हक में फैसला सुनाते हुए वी मार्ट पर 35,000 रुपये का जुर्माना लगा दिया है. तो आइए जानते हैं वी मार्ट ने ग्राहक से कितने रुपये मांगे थे और कोर्ट ने इसमें क्या फैसला सुनाया है?
कैरी बैग के लिए 18 रुपये वसूलना पड़ा भारी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह मामला लखनऊ के वी मार्ट का है, जहां एक ग्राहक ने खरीदारी का सामान ले जाने के लिए कैरी बैग मांगा. स्टोर ने ग्राहक से कैरी बैग के लिए 18 रुपये वसूल लिए, इसे ग्राहक ने अनुचित माना. ग्राहक ने वकील शशिकांत शुक्ला के जरिये उपभोक्ता अदालत में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में ग्राहक ने बताया कि वी मार्ट ने उससे जबरन कैरी बैग के पैसे वसूले. कोर्ट ने माना कि ग्राहकों पर कैरी बैग का शुल्क जबरन नहीं थोपा जा सकता. इस जुर्माने में ग्राहक को हुए मानसिक और आर्थिक नुकसान का मुआवजा और अदालती खर्च शामिल हैं. यह फैसला ग्राहकों के अधिकारों के लिए मिसाल बन गया है.
जुर्माने में मानसिक व शारीरिक कष्ट के साथ अदालती खर्च शामिल
उपभोक्ता अदालत ने मामले की सुनवाई की और ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाया. कोर्ट ने कहा कि दुकानदार ग्राहकों से सामान के दाम के अलावा कैरी बैग के लिए अलग से पैसे नहीं मांग सकते, ऐसा करना ग्राहकों के अधिकारों का हनन है. अदालत ने वी मार्ट को ग्राहक के 18 रुपये वापस करने और 35,000 रुपये का जुर्माना देने का आदेश दिया. इस 35,000 रुपये के जुर्माने में 25,000 रुपये मानसिक और शारीरिक कष्ट और 10,000 रुपये अदालती खर्च के शामिल हैं. कोर्ट ने यह भी कहा है कि आदेश के 45 दिन के भीतर भुगतान नहीं किया गया तो देय राशि पर 12 प्रतिशत का अतिरिक्त भुगतान देना होगा.
टैग्स