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ऐसा क्या हुआ कि सरकार से आदिवासी युवक ने मांग लिया 10 हजार करोड़ का हर्जाना
एक आदिवासी युवक ने बेगुनाह होने पर भी जेल की सजा काटने के लिए मध्य प्रदेश की सरकार से हर्जाना मांगा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह सरकार से एक आदिवासी युवक ने 10 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का हर्जाना मांगा है. दरअसल, इस युवक को गैंगरेप के एक मामले में जेल हुई थी, जहां उसे 2 साल से ज्यादा बिताने पड़े. बाद में उसे आरोपों से बरी कर दिया गया. युवक का कहना है कि बिना किसी अपराध के जेल में रहने के चलते उसकी जिंदगी बर्बाद हो गई. वो इस दौरान, सेक्स तक नहीं कर पाया. इसके लिए उसे सरकार से हर्जाना मिलना चाहिए.
पिछले साल हुआ रिहा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 666 दिन जेल में रहने के बाद पिछले साल अक्टूबर में युवक कांतिलाल भील उर्फ कंतू आरोपों से बरी हुआ था. कंतू का कहना है कि सेक्स का आनंद मनुष्य को भगवान का गिफ्ट है. गलत आरोप के चलते जेल में रहने के कारण वह इसका आनंद नहीं ले पाया. इसके अलावा, उसका पूरा परिवार भी उजड़ गया. उसके बीवी-बच्चों और बूढ़ी मां को तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ा.
5 सालों से है परेशान
35 वर्षीय कंतू का यह भी कहना है कि उसके परिवार के पास इतने पैसे भी नहीं थे कि अंडरगारमेंट्स खरीद सके. उसे भी जेल में बिना कपड़ों के सर्दी और गर्मी का सामना करना पड़ा. कांतिलाल ने बताया कि वह पांच साल से परेशान है. तीन साल तक पुलिस परेशान करती रही. इसके बाद बिना किसी अपराध के 2 साल जेल में रहा. परिवार सड़क पर आ गया. अब वह बच्चों के लिए खाने-पीने का इंतजाम नहीं कर पा रहा है.
कैसे होगा पालन-पोषण
कांतिलाल के वकील विजय सिंह यादव का कहना है कि मानव जीवन का मूल्य कोई तय नहीं किया जा सकता. पुलिस और राज्य सरकार की वजह से उसका जीवन बर्बाद हो गया. उसे बेगुनाह होने के बावजूद जेल की प्रताड़ना सहनी पड़ी. इसलिए उसने राज्य सरकार और पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध क्षतिपूर्ति का दावा जिला एवं सत्र न्यायालय में पेश किया है. पीड़ित के परिवार में बुजुर्ग मां, पत्नी और 3 बच्चे हैं. सभी के पालन पोषण की जिम्मेदारी उसी पर है. पुलिस की लापरवाही के चलते समाज में वापस जाने और रोजगार के लिए उसे मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.
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