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कमोडिटी बाजार में FPI की एंट्री बढ़ाने की तैयारी, सेबी ने जारी किया नया प्रस्ताव

बाजार में लिक्विडिटी और कीमतों की खोज बेहतर करने के लिए सेबी ने एफपीआई को गैर-कृषि इंडेक्स और फिजिकली सेटल्ड कमोडिटी डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एक्सचेंज-ट्रेडेड कमोडिटी डेरिवेटिव्स (ETCD) में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की भागीदारी बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है. इसके तहत एफपीआई को गैर-कृषि इंडेक्स डेरिवेटिव्स और फिजिकली सेटल्ड गैर-कृषि कमोडिटी डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग की अनुमति देने का प्रस्ताव है. सेबी का मानना है कि इससे कमोडिटी बाजार में भागीदारों का आधार बढ़ेगा, लिक्विडिटी में सुधार होगा और कीमतों की बेहतर खोज में मदद मिलेगी.

गैर-कृषि इंडेक्स डेरिवेटिव्स में भागीदारी का प्रस्ताव

सेबी द्वारा मंगलवार को जारी परामर्श पत्र के अनुसार, पहले प्रस्ताव के तहत एफपीआई को गैर-कृषि इंडेक्स डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स में भाग लेने की अनुमति देने की बात कही गई है. इसमें यह मायने नहीं रखेगा कि इन कॉन्ट्रैक्ट्स से जुड़े अंडरलाइंग कॉन्ट्रैक्ट्स का निपटान नकद में होता है या नहीं. फिलहाल एफपीआई केवल ऐसे गैर-कृषि डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स में हिस्सा ले सकते हैं, जिनसे जुड़े अंडरलाइंग कॉन्ट्रैक्ट्स का निपटान नकद में होता है.

सेबी ने कहा कि इंडेक्स डेरिवेटिव्स का निपटान हमेशा नकद में होता है, चाहे उनकी अंडरलाइंग एसेट्स का निपटान नकद में हो या नहीं. इसलिए ऐसे कॉन्ट्रैक्ट्स में एफपीआई की भागीदारी की अनुमति देने से डिलिवरी से जुड़ी कोई समस्या नहीं होगी. कमोडिटी डेरिवेटिव एडवाइजरी कमेटी (CDAC) ने भी इस प्रस्ताव पर सहमति जताई है.

फिजिकली सेटल्ड कमोडिटी डेरिवेटिव्स में भी एंट्री

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सेबी के दूसरे प्रस्ताव में एफपीआई को घरेलू एक्सचेंजों पर उपलब्ध ऐसे गैर-कृषि कमोडिटी डेरिवेटिव्स में भाग लेने की अनुमति देने की बात कही गई है, जिनका निपटान नकद के बजाय वास्तविक डिलिवरी के जरिए होता है. इसमें कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, सोना, चांदी और बेस मेटल्स जैसी कमोडिटीज से जुड़े डेरिवेटिव्स शामिल हैं. ये कमोडिटीज वैश्विक बेंचमार्क से भी गहराई से जुड़ी हुई हैं.

सेबी के मुताबिक, इन सेगमेंट में एफपीआई की भागीदारी से बाजार में प्रतिभागियों का आधार बढ़ेगा. इसके साथ ही लिक्विडिटी बेहतर होगी, डेरिवेटिव्स और फिजिकल कमोडिटी मार्केट के बीच तालमेल मजबूत होगा और भारतीय कमोडिटी डेरिवेटिव्स बाजार को वैश्विक कमोडिटी बाजार से जोड़ने में मदद मिलेगी.

डिलिवरी से पहले निवेश बेचना या रोलओवर करना होगा

प्रस्ताव के तहत एफपीआई को टेंडर अवधि शुरू होने से पहले अपनी पोजीशन बेचनी या रोलओवर करनी होगी. यह अवधि एक्सपायरी से तीन दिन पहले यानी T-3 से शुरू होती है. अगर एफपीआई ऐसा करने में विफल रहते हैं तो उनकी ओपन पोजीशन को किसी ट्रेडिंग मेंबर (TM) या ट्रेडिंग-कम-क्लियरिंग मेंबर (TCM) के प्रोपराइटरी खातों में अपने आप ट्रांसफर करने का प्रस्ताव है.

डिलिवरी को लेकर क्यों है नियम?

यह सुरक्षा उपाय इसलिए प्रस्तावित किया गया है क्योंकि भारत में एफपीआई का कोई स्थायी कारोबारी ठिकाना नहीं होता और उन्हें कमोडिटी की डिलिवरी लेने या देने की अनुमति नहीं है.

सेबी के मुताबिक, भले ही कोई एफपीआई अपनी ओर से कमोडिटी की डिलिवरी लेने या देने के लिए किसी ट्रेडिंग मेंबर या ब्रोकर को नियुक्त करे, फिर भी भारत में कमोडिटी की खरीद या बिक्री के लिए उसे जीएसटी रजिस्ट्रेशन की जरूरत पड़ सकती है. इसी वजह से सेबी ने एफपीआई के लिए निवेश की बिक्री या पोजीशन रोलओवर करने का नियम प्रस्तावित किया है. हालांकि, नियामक ने यह भी माना है कि केवल निवेश की बिक्री का यह सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं हो सकता, क्योंकि इसकी सफलता पूरी तरह एफपीआई की ओर से समय पर उठाए गए कदमों पर निर्भर करेगी.

बाजार में क्या होगा असर?

सेबी का प्रस्ताव लागू होने पर भारतीय कमोडिटी डेरिवेटिव्स बाजार में विदेशी निवेशकों की भागीदारी बढ़ सकती है. इससे खासकर गैर-कृषि कमोडिटी डेरिवेटिव्स में कारोबार और लिक्विडिटी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. साथ ही, घरेलू डेरिवेटिव्स बाजार का वैश्विक कमोडिटी बाजार के साथ जुड़ाव और मजबूत हो सकता है.
 


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