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SC ने JSW Steel की BPSL समाधान योजना को दी मंजूरी, पूर्व प्रोमोटर्स और लेनदारों की आपत्तियां खारिज
अधिग्रहण के बाद जेएसडब्ल्यू स्टील ने भूषण पावर एंड स्टील की उत्पादन क्षमता 2017 के 23 लाख टन से बढ़ाकर 2025 में 45 लाख टन कर दी है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago
सुप्रीम कोर्ट ने भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड (BPSL) के अधिग्रहण को लेकर जेएसडब्ल्यू स्टील (JSW Steel) की समाधान योजना को हरी झंडी दे दी है. अदालत ने पूर्व प्रोमोटर्स और कुछ लेनदारों की आपत्तियों को खारिज करते हुए मई में दिए गए एक पुराने आदेश को भी रद्द कर दिया. इस फैसले से दिवालिया भूषण पावर के अधिग्रहण का रास्ता साफ हो गया है और बैंकों के हजारों करोड़ रुपये के जोखिम को टाल दिया गया है.
मई का आदेश हुआ रद्द
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीफ जस्टिस बी आर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने मई में दिए गए आदेश को रद्द करने के बाद मामले की दोबारा सुनवाई की और योजना को मंजूरी दी. अदालत ने बीपीएसएल के लेनदारों की एबिट्डा (EBITDA) में हिस्सेदारी की मांग भी ठुकरा दी.
11 अगस्त को जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की स्पेशल बेंच ने इस मामले की फिर से सुनवाई की थी. 2 मई के आदेश में जेएसडब्ल्यू स्टील की 19,700 करोड़ रुपये की अधिग्रहण योजना को आईबीसी उल्लंघन का हवाला देते हुए खारिज किया गया था और बैंकों को 19,350 करोड़ रुपये लौटाने का आदेश दिया गया था. इससे लगभग 34,000 करोड़ रुपये का बैंक एक्सपोजर खतरे में पड़ गया था.
बैंकों की दलीलें
पंजाब नेशनल बैंक के नेतृत्व में बैंकों ने अदालत में कहा कि उन्होंने जेएसडब्ल्यू स्टील की योजना का समर्थन इस शर्त पर किया था कि कंपनी अपनी कमाई का एक हिस्सा साझा करेगी. बैंकों की ओर से 6,155 करोड़ रुपये से ज्यादा की मांग की गई. इसमें जुलाई 2017 से मार्च 2021 के बीच कमाया गया 3,569 करोड़ रुपये का एबिट्डा, वित्तीय लेनदारों को 2,509.88 करोड़ रुपये का ब्याज और परिचालन लेनदारों को 76.62 करोड़ रुपये का ब्याज शामिल था.
JSW Steel का पक्ष
जेएसडब्ल्यू स्टील का कहना है कि उनकी समाधान योजना में एबिट्डा साझा करने का कोई प्रावधान नहीं है. वरिष्ठ वकील नीरज किशन कौल ने अदालत में दलील दी कि कंपनी 2021 तक घाटे में थी और वे एक घाटे वाली कंपनी का अधिग्रहण कर रहे हैं. कंपनी का कहना है कि अगर बैंकों की 6,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की मांग मानी जाती है तो इससे पहले से तय शर्तें बदल जाएंगी, जो एक खतरनाक मिसाल बन सकती है.
पूर्व प्रोमोटर्स और लेनदारों के आरोप
पूर्व प्रोमोटर संजय सिंघल और कुछ लेनदारों ने आरोप लगाया कि जेएसडब्ल्यू स्टील ने अपने वादे पूरे नहीं किए. उनका कहना था कि कंपनी ने 8,000 करोड़ रुपये की बजाय केवल 100 करोड़ रुपये का निवेश किया, वित्तीय लेनदारों को केवल 540 करोड़ रुपये एडवांस दिए और परिचालन लेनदारों के भुगतान में 900 दिन से अधिक की देरी की.
क्या है Bhushan Power Acquisition मामला?
भूषण पावर एंड स्टील की दिवाला प्रक्रिया जुलाई 2017 में शुरू हुई थी. उस समय पीएनबी के नेतृत्व में बैंकों ने 47,000 करोड़ रुपये से अधिक बकाया वसूली के लिए याचिका दायर की थी. टाटा स्टील को पछाड़ते हुए जेएसडब्ल्यू स्टील सफल बोलीदाता बनी और उसकी योजना को एनसीएलटी और एनसीएलएटी से मंजूरी भी मिली. हालांकि, कानूनी चुनौतियों और ईडी अटैचमेंट्स के कारण इसे लागू करने में देरी हुई.
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