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संजय कपूर की ₹30,000 करोड़ की संपत्ति पर विरासत विवाद गहराया, दिल्ली HC ने प्रिया कपूर की गोपनीयता याचिका पर जताई आपत्ति
संजय कपूर की विरासत पर उठे सवाल न सिर्फ एक परिवार के भीतर संघर्ष को उजागर करते हैं, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि भारत में उत्तराधिकार कानून में पारदर्शिता कितनी अहम है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago
दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की लगभग ₹30,000 करोड़ की संपत्ति को लेकर पारिवारिक विवाद ने गुरुवार को नया मोड़ ले लिया जब दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी पत्नी प्रिया सचदेव कपूर की उस याचिका पर गंभीर सवाल उठाए जिसमें उन्होंने अन्य उत्तराधिकारियों पर गोपनीयता अनुबंध (NDA) थोपने की मांग की थी. अदालत ने स्पष्ट कहा कि विरासत से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बेहद जरूरी है ताकि सभी कानूनी उत्तराधिकारियों के अधिकारों की रक्षा की जा सके.
करिश्मा कपूर के बच्चों ने जताई आपत्ति, वसीयत को बताया संदिग्ध
यह विवाद पहले ही सार्वजनिक ध्यान आकर्षित कर चुका है क्योंकि इसमें संजय कपूर की पहली पत्नी, अभिनेत्री करिश्मा कपूर के बच्चों समीरा और कियान का भी नाम शामिल है. वे अपनी मां के माध्यम से अदालत में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और एक विवादित वसीयत को चुनौती दे रहे हैं, जिसमें कथित तौर पर संपूर्ण संपत्ति प्रिया कपूर को सौंपे जाने का जिक्र है. बच्चों का कहना है कि उन्हें इस वसीयत की कोई जानकारी नहीं थी और वे अपने वैध उत्तराधिकार के लिए अदालत से न्याय मांग रहे हैं.
हाईकोर्ट ने पूछा, गोपनीयता का आदेश कैसे पास करें?
गुरुवार यानी 26 सितंबर, 2025 की सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने प्रिया कपूर की प्रार्थना को खारिज करने के संकेत दिए जिसमें उन्होंने वित्तीय जानकारी को सीलबंद लिफाफे में देने की बात की थी. उन्होंने कहा, "सीलबंद लिफाफे में कितना कुछ जा सकता है? उत्तराधिकार मामलों में इसकी कोई मिसाल नहीं है. आप कोई ऐसा जजमेंट दिखाइए जो कहता हो कि उत्तराधिकार विवाद में गोपनीयता मांगी जा सकती है."
प्रिया कपूर की दलील
प्रिया के वकीलों ने दलील दी कि अगर संपत्ति और बैंक खातों से जुड़ी जानकारी लीक हो गई तो इससे साइबर सुरक्षा को खतरा हो सकता है और अपूरणीय क्षति हो सकती है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विरोधी पक्ष सुनवाई के बाद मीडिया को जानकारी लीक कर रहे हैं. उनका कहना था कि एनडीए लागू करने से निजता सुरक्षित रहेगी और जानकारियों का दुरुपयोग रोका जा सकेगा.
बच्चों की दलील, गोपनीयता से हक साबित करने में आएगी रुकावट
विरोधी पक्ष, यानी करिश्मा कपूर के बच्चों की ओर से पेश वकीलों ने NDA पर आपत्ति जताई. उनका कहना था कि गोपनीयता थोपने से वे वसीयत की वैधता की जांच नहीं कर पाएंगे और संपत्तियों का पूरा ब्योरा नहीं मिल पाएगा. उन्होंने यह भी दावा किया कि वसीयत में जिन बैंक खातों का जिक्र है, उनमें से कई खातों में रकम पहले ही निकाल ली गई है, जिससे धन प्रवाह को लेकर संदेह पैदा होता है.
भारतीय कानून में पारदर्शिता है प्राथमिकता
अदालत की टिप्पणी ने भारतीय उत्तराधिकार कानून की पारदर्शिता की परंपरा को दोहराया. देश के अन्य बड़े पारिवारिक मामलों जैसे किरलोस्कर और कल्याणी परिवार में भी गोपनीयता के लिए NDA को मंजूरी नहीं दी गई. अदालतों ने केवल राष्ट्रीय सुरक्षा या गंभीर व्यक्तिगत खतरे जैसी अपवाद स्थितियों में ही इन-कैमरा या सीलबंद सुनवाई की अनुमति दी है. कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जहां NDA कॉरपोरेट मामलों में आम हैं, वहीं पारिवारिक और उत्तराधिकार विवादों में इनका इस्तेमाल दुर्लभ है.
प्रिया ने खुद को बताया अकेली कानूनी उत्तराधिकारी
प्रिया कपूर के वकील यह तर्क दे रहे हैं कि प्रिया, संजय कपूर की कानूनी पत्नी और वसीयत के अनुसार एकमात्र लाभार्थी हैं, इसलिए यह मुकदमा टिकाऊ नहीं है. लेकिन दूसरी ओर, संजय की मां रानी कपूर और उनके पहले विवाह से हुए बच्चे, अपनी कानूनी हिस्सेदारी की मांग कर रहे हैं.
बता दें, उद्योगपति संजय कपूर की मृत्यु 12 जून को इंग्लैंड में एक पोलो मैच के दौरान बेहोश होकर गिरने के बाद हो गई थी. उनकी असामयिक मृत्यु के बाद से संपत्ति को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है.
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