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सुप्रीम कोर्ट की RERA पर सख्त टिप्पणी: “अगर बिल्डरों को ही राहत देनी है तो संस्था बंद कर दें”
हिमाचल प्रदेश में कार्यालय स्थानांतरण विवाद के बीच आई यह टिप्पणी केवल एक प्रशासनिक निर्णय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नियामक संस्थाओं की जवाबदेही पर व्यापक संदेश देती है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago
सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए तीखी टिप्पणी की है. अदालत ने कहा कि यदि यह संस्था केवल डिफॉल्टर बिल्डरों को राहत देने का माध्यम बनकर रह गई है, तो इसे बंद कर देना ही बेहतर होगा. कोर्ट की यह टिप्पणी हिमाचल प्रदेश में रेरा कार्यालय के स्थानांतरण से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान आई.
RERA सिर्फ बिल्डरों की मदद कर रहा है
प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमालिया बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान सख्त रुख अपनाया. बेंच ने कहा कि राज्य सरकारों को गंभीरता से विचार करना चाहिए कि रेरा का गठन आखिर किस उद्देश्य से किया गया था.
सीजेआई ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह संस्था आम खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए बनाई गई थी, लेकिन यदि यह डिफॉल्टर बिल्डरों को संरक्षण देने का मंच बनती जा रही है, तो इसकी उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है.
हिमाचल प्रदेश में दफ्तर शिफ्ट करने पर विवाद
यह मामला हिमाचल प्रदेश सरकार के उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें रेरा कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने का नोटिफिकेशन जारी किया गया था. इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी.
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 13 जून 2025 के नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी थी. हाईकोर्ट का मत था कि सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित किए बिना कार्यालय स्थानांतरण का निर्णय ले लिया. साथ ही 18 आउटसोर्स कर्मचारियों के समायोजन के मुद्दे को भी गंभीर माना गया, जिससे रेरा के कामकाज पर असर पड़ने की आशंका जताई गई थी.
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश पलटा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए राज्य सरकार को बड़ी राहत दी. अदालत ने रेरा कार्यालय को शिमला से धर्मशाला शिफ्ट करने की अनुमति दे दी. हालांकि, शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में आम लोगों को किसी तरह की असुविधा नहीं होनी चाहिए. कोर्ट ने निर्देश दिया कि रेरा के साथ-साथ अपीलीय ट्रिब्यूनल को भी धर्मशाला स्थानांतरित किया जाए, ताकि अपील से जुड़े मामलों में लोगों को इधर-उधर न भटकना पड़े.
पहले भी दिखा चुका है कोर्ट सख्त रुख
यह पहला अवसर नहीं है जब सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश में किसी संस्थान के मुख्यालय स्थानांतरण के मामले में हाईकोर्ट के आदेश को पलटा हो. इससे पहले भी अदालत ने पिछड़ा वर्ग आयोग के मुख्यालय को शिमला से धर्मशाला शिफ्ट करने पर लगी रोक हटाई थी.
रेरा की भूमिका पर उठे बड़े सवाल
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने रेरा की कार्यप्रणाली और उसकी प्रभावशीलता पर नई बहस छेड़ दी है. रेरा का गठन रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता लाने और घर खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए किया गया था. अब अदालत की सख्त टिप्पणी के बाद यह सवाल फिर से सामने है कि क्या रेरा वास्तव में आम उपभोक्ताओं के हित में काम कर रहा है या फिर व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है. आने वाले समय में इस मुद्दे पर नीति स्तर पर गंभीर चर्चा संभव है.
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