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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: अब कोर्ट में 2 लाख से अधिक नकद लेनदेन की सूचना देना अनिवार्य
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश नकद लेनदेन पर निगरानी को मजबूत बनाने और न्यायिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक अहम कदम है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने न्यायालयों में नकद लेनदेन पर निगरानी को सख्त करते हुए बड़ा आदेश दिया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी न्यायालय में 2 लाख रुपये या उससे अधिक के नकद भुगतान का दावा किया जाता है, तो उस अदालत को संबंधित क्षेत्र के आयकर अधिकारियों को इसकी सूचना देना अनिवार्य होगा. यह आदेश न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने सुनाया है. यह आदेश डिजिटल इंडिया और कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की न्यायपालिका की प्रतिबद्धता को दर्शाता है. साथ ही, इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि आदेश की अवहेलना करने वाले अधिकारियों पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. आइए सुप्रीम कोर्ट केइस आदेश के बारे में विस्तार से जानते हैं.
अचल संपत्ति के मामलों पर विशेष जोर
शीर्ष अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि जब कोई दस्तावेज रजिस्ट्री कार्यालय में जमा किया जाता है और उसमें दो लाख रुपये या उससे अधिक नकद राशि के जरिए अचल संपत्ति की खरीद-बिक्री का दावा किया गया हो, तो उप पंजीयक को इसकी जानकारी आयकर विभाग को देनी होगी. इससे अवैध लेनदेन और कर चोरी को रोका जा सकेगा.
धारा 269एसटी के तहत होगी जांच
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, जिन मामलों में इस प्रकार के नकद लेनदेन की सूचना दी जाएगी, उनमें आयकर विभाग यह जांच करेगा कि लेनदेन वैध है या नहीं और क्या यह आयकर अधिनियम की धारा 269एसटी के तहत आता है. इस धारा के अनुसार, किसी भी व्यक्ति या संस्था को एक स्रोत से दो लाख रुपये या उससे अधिक नकद भुगतान लेना प्रतिबंधित है, चाहे वह भुगतान एक बार में हो या कई किस्तों में. विशेषज्ञों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को कैशलेस अर्थव्यवस्था की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया. उन्होंने कहा, “यह दर्शाता है कि न्यायपालिका भी डिजिटल भुगतान और पारदर्शी लेनदेन के पक्ष में है.”
लापरवाही पर होगी कार्रवाई
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी अचल संपत्ति के पंजीकरण में उप पंजीयक द्वारा नकद भुगतान की जानकारी आयकर विभाग को नहीं दी जाती है, तो मामला संबंधित राज्य या केंद्रशासित प्रदेश के मुख्य सचिव के संज्ञान में लाया जाएगा. ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है. कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश नकद लेनदेन पर प्रभावी रोक लगाने में मदद करेगा. “यदि किसी व्यक्ति का दावा अदालत में स्वीकार भी कर लिया जाता है, तो भी आयकर कानून की धारा 271डीए के तहत उसे समान राशि का जुर्माना भरना पड़ सकता है.”
सभी राज्यों को भेजी जाएगी आदेश की प्रतिलिपि
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश की एक प्रति सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों, उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरलों और आयकर विभाग के प्रधान आयुक्तों को भेजने के निर्देश दिए हैं, ताकि इसका पालन सुनिश्चित किया जा सके. यह आदेश एक चैरिटेबल ट्रस्ट और कुछ व्यक्तियों के बीच बेंगलुरु की एक संपत्ति पर स्वामित्व को लेकर चल रहे विवाद के दौरान दिया गया. ट्रस्ट 1929 से इस संपत्ति का उपयोग शैक्षणिक और खेल गतिविधियों के लिए कर रहा था, जबकि प्रतिवादियों ने दावा किया कि उन्होंने 2018 में इस संपत्ति को 75 लाख रुपये में खरीदा था. यहीं से नकद भुगतान और कानूनी वैधता का प्रश्न उठा, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना स्पष्ट और सख्त रुख दिखाया.
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