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बायजू के चक्कर में NCLAT की हुई खिंचाई, SC ने क्यों कहा - दिमाग इस्तेमाल नहीं किया?
तमाम तरह की परेशानियों से जूझ रही बायजू नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल की खिंचाई की भी वजह बन गई. सुप्रीम कोर्ट ने बायजू से जुड़े मामले को लेकर NCLAT की जमकर क्लास लगाई.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
एडटेक कंपनी बायजू और उसके फाउंडर बायजू रवींद्रन की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. अब सुप्रीम कोर्ट से उनके लिए टेंशन बढ़ाने वाली खबर आई है. सर्वोच्च अदालत ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के उस फैसले को लेकर चिंता जाहिर की है, जिसमें बायजू के खिलाफ इंसॉल्वेंसी की कार्यवाही बंद करने का निर्देश दिया गया है. अदालत ने कहा कि ट्रिब्यूनल के आदेश में विश्लेषण का अभाव है. साथ ही कोर्ट ने यह संकेत भी दिए कि मामला फिर से विचार के लिए NCLAT को भेजा जा सकता है.
अदालत ने कही ये बात
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीफ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ की बेंच ने इस मामले पर NCLAT के रवैये पर संदेह जताया. चीफ जस्टिस ने कहा कि NCLAT के आदेश की वजह केवल एक पैराग्राफ है. इसमें दिमाग का बिल्कुल इस्तेमाल नजर नहीं आता. ट्रिब्यूनल को फिर से अपना दिमाग लगाना चाहिए और मामले को नए सिरे से देखना चाहिए.
BCCI को ही क्यों चुना?
सर्वोच्च अदालत ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को 158 करोड़ रुपए का भुगतान करने और अन्य लेनदारों को 15000 करोड़ रुपए का बकाया चुकाने के लिए कदम न उठाने के लिए बायजू को भी आड़े हाथ लिया. कोर्ट ने कंपनी के प्रतिनिधियों से पूछा कि आपके ऊपर 15000 करोड़ रुपए का बकाया है. आपने बकाये के निपटारे के लिए केवल BCCI को ही क्यों चुना? इस दौरान, BCCI की तरफ से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से NCLAT के फैसले को न पलटने का अनुरोध किया. इस पर अदालत ने कहा कि BCCI का क्लेम बायजू की कुल वित्तीय जिम्मेदारियों का एक छोटा सा हिस्सा है.
LLC ने लगाई है याचिका
चीफ जस्टिस ने कहा कि BCCI के पास 158 करोड़ रुपए की छोटी सी बकाया रकम है, बाकी लेनदारों का क्या होगा? उन्हें तमाम मुश्किलों से गुजरना होगा. बता दें कि बायजू की अमेरिकी फाइनेंशियल क्रेडिटर ग्लास ट्रस्ट कंपनी LLC ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें बायजू की पेरेंट कंपनी थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ दिवाला कार्यवाही पर रोक लगा दी गई थी. NCLT ने BCCI की तरफ से दायर याचिका पर जून में इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन बायजू और BCCI के बीच सेटलमेंट के बाद NCLAT ने इस कार्यवाही पर रोक लगा दी थी.
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