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SC का सख्त रुख: नीलामी के बाद उधारकर्ता से समझौता गलत, PNB को लगाई फटकार

यह मामला बैंकिंग प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जिम्मेदारी की अहमियत को दर्शाता है. सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी से यह स्पष्ट है कि सार्वजनिक संस्थानों को नीतिगत फैसले लेते समय सभी हितधारकों को ध्यान में रखना चाहिए.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

सुप्रीम कोर्ट (SC) ने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) को कड़ी फटकार लगाई है. अदालत ने बैंक से यह सवाल उठाया कि जब संपत्ति की नीलामी हो चुकी थी, तो फिर बाद में उधारकर्ता से समझौता क्यों किया गया? न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि यह प्रक्रिया पारदर्शिता के खिलाफ है और इससे बैंकिंग प्रणाली पर लोगों का भरोसा डगमगा सकता है.

बिना खरीदार को बताए किया गया समझौता

न्यायमूर्ति पारदीवाला ने तीखे शब्दों में पूछा, "अगर आपको समझौता करना ही था, तो क्या नीलामी के खरीदार को लोक अदालत की कार्यवाही में शामिल नहीं किया जाना चाहिए था?" कोर्ट ने इसे "मिलीभगत" जैसा कृत्य करार दिया और कहा कि इस तरह की घटनाएं भविष्य में न हों, इसके लिए PNB को तत्काल नीतिगत निर्णय लेने चाहिए.

SARFAESI एक्ट के तहत कार्रवाई

यह मामला तब शुरू हुआ जब PNB ने SARFAESI अधिनियम के तहत एक उधारकर्ता के खिलाफ वसूली की प्रक्रिया शुरू की. इस पर उधारकर्ता ने देहरादून स्थित ऋण वसूली न्यायाधिकरण (DRT) में याचिका दाखिल कर कार्यवाही को चुनौती दी. इसी दौरान, बैंक ने विवादित संपत्ति की नीलामी कर दी और एक खरीदार ने RTGS के ज़रिए ₹42 लाख की राशि जमा कर दी.

बैंक ने राशि लौटाई, खरीदार पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

बैंक ने यह दावा किया कि उसे खरीदार द्वारा पैसे जमा कराने की जानकारी नहीं थी और जब जानकारी मिली, तो उसने वह राशि लौटा दी. इससे आहत नीलामी खरीदार ने पहले हाई कोर्ट में और फिर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. खरीदार का आरोप था कि उसके साथ अन्याय हुआ है, क्योंकि उसने नियमों के तहत बोली लगाई और भुगतान किया, फिर भी उसे संपत्ति नहीं सौंपी गई.

DRT और हाईकोर्ट में भी चला मामला

DRT ने इस मामले में PNB के मैनेजर और जनरल मैनेजर को तलब किया था. इसके खिलाफ बैंक ने हाई कोर्ट का रुख किया, जहाँ याचिका पर नोटिस जारी हुआ. लेकिन खरीदार ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

अटॉर्नी जनरल ने मानी गलती, कोर्ट ने लिया संज्ञान

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने बैंक की ओर से पेश होकर स्वीकार किया कि बैंक से गलती हुई है. उन्होंने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि PNB इलाहाबाद हाई कोर्ट में दायर अपनी याचिका वापस लेगा और खरीदार को जल्द ही फाइनल सेल सर्टिफिकेट जारी करेगा.

कोर्ट की चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि इस तरह की घटनाएं दोहराई गईं, तो लोग नीलामी में भाग लेने से हिचकिचाएंगे. न्यायमूर्ति पारदीवाला ने कहा, "बैंक इस पर ध्यान क्यों नहीं दे रहे हैं? यदि यह रवैया जारी रहा, तो कोई भी व्यक्ति सुरक्षित संपत्ति खरीदने आगे नहीं आएगा, जिससे बैंक और वित्तीय संस्थान दोनों को भारी नुकसान हो सकता है."


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