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रियल एस्टेट घोटाले पर SC सख्त, बिल्डर-बैंक गठजोड़ पर CBI जांच के आदेश
सुप्रीम कोर्ट (SC) का यह फैसला फ्लैट खरीदारों को न्याय दिलाने के साथ साथ रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
देश भर में हजारों फ्लैट खरीदारों को नुकसान पहुंचाने वाले बिल्डर-बैंक गठजोड़ पर सुप्रीम कोर्ट (SC) ने कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सात प्राथमिक जांच (FIR) दर्ज करने का आदेश दिया है. यह आदेश 170 याचिकाओं पर आया है, जिन्हें करीब 1200 फ्लैट खरीदारों ने दाखिल किया था. आइए जानते हैं आखिर ये पूरा मामला क्या है?
खरीदारों का आरोप
देशभर में हजारों फ्लैट खरीदारों को लंबे समय से घर न मिलने और लगातार ईएमआई चुकाने की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है. घर खरीददारों का आरोप है कि बिल्डरों द्वारा तय समय पर प्रोजेक्ट पूरे न करने के कारण उन्हें अब तक फ्लैट का कब्जा नहीं मिला है, लेकिन बैंकों द्वारा लोन की ईएमआई वसूली लगातार जारी है. खरीदारों का कहना है कि उन्होंने बिल्डरों के भरोसे फ्लैट बुक किए थे, लेकिन न प्रोजेक्ट बने और न ही धनवापसी हुई. इस समस्या को लेकर करीब 1200 फ्लैट खरीदारों ने सुप्रीम कोर्ट में 170 याचिकाएं दायर कीं, जिसमें आरोप लगाया गया कि बिल्डर और बैंकों की मिलीभगत से उन्हें आर्थिक नुकसान हुआ है.
CBI करेगी इन सात मामलों की जांच
सुप्रीम कोर्ट ने जिन सात मामलों की जांच के लिए CBI को निर्देशित किया है, उनमें शामिल हैं:
1. सुपरटेक के प्रोजेक्ट
2. दिल्ली-एनसीआर के बाहर के बिल्डर्स के प्रोजेक्ट (मोहाली, कोलकाता, मुंबई, बेंगलुरु, इलाहाबाद आदि)
3. नोएडा
4. ग्रेटर नोएडा
5. यमुना एक्सप्रेसवे
6. गाजियाबाद
7. गुरुग्राम ऑथोरिटी के अंतर्गत आने वाले प्रोजेक्ट
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने जताई थी सख्ती
18 मार्च को हुई पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने तीखे सवाल पूछे थे कि बिना एक भी ईंट रखे बैंक कैसे बिल्डरों को 60 से 80 प्रतिशत तक लोन जारी कर सकते हैं? कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि यह गठजोड़ खरीदारों को आर्थिक रूप से तबाह कर रहा है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.
बिल्डर-बैंक मिलीभगत: खरीदार भुगत रहे कीमत
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा कि बैंक सीधे बिल्डर के खाते में पैसा ट्रांसफर कर रहे हैं, बिना देखे कि जमीन पर काम शुरू भी हुआ है या नहीं. जब बिल्डर ईएमआई नहीं देता, तो खरीदार पर वसूली का दबाव बनाया जाता है. यह निवेशकों के साथ घोर अन्याय है.
विशेष जांच के घेरे में सुपरटेक
सुपरटेक के खिलाफ अकेले 800 से ज्यादा खरीदारों ने याचिकाएं दायर की हैं, जो इसके छह शहरों में फैले प्रोजेक्ट्स से जुड़े हैं. कोर्ट ने इसे देखते हुए सुपरटेक के मामलों के लिए अलग से प्राथमिकी दर्ज करने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और अन्य संबंधित राज्य सरकारों को CBI को पूर्ण सहयोग देने का आदेश दिया है. यूपी और हरियाणा के डीजीपी को विशेष पुलिस बल उपलब्ध कराने, जबकि शहरी विकास मंत्रालय, आरबीआई, रेरा और संबंधित शहरी प्राधिकरणों को नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करने को कहा गया है.
फोरेंसिक ऑडिट के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की तैनाती
कोर्ट ने इंस्टिट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को निर्देश दिया है कि वह फोरेंसिक ऑडिट में दक्ष तीन चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को CBI की जांच में सहयोग के लिए नियुक्त करें. हर महीने होने वाली सुनवाई के लिए कोर्ट ने सीबीआई से नियमित स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को भी कहा है.
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