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संदीप गोयल ने सरोगेट विज्ञापनों को कोर्ट में घसीटा, सरकार से की कड़े नियंत्रण की मांग
गोयल का कहना है कि मौजूदा समाधान तंत्र इन विज्ञापनों के तात्कालिक प्रभाव का मुकाबला करने में बहुत धीमा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 11 months ago
शराब और तंबाकू को बढ़ावा देने वाले सरोगेट विज्ञापनों की बढ़ती समस्या को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, अनुभवी विज्ञापन विशेषज्ञ संदीप गोयल ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की है. यह याचिका सार्वजनिक स्वास्थ्य, विशेष रूप से युवाओं की रक्षा के लिए बनाए गए मौजूदा कानूनों को सख्ती से लागू करने की मांग करती है.
मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति सुमीत गोयल की खंडपीठ ने इस याचिका के जवाब में केंद्र सरकार, केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को नोटिस जारी किए हैं.
62 वर्षीय चंडीगढ़ निवासी और रेडिफ्यूजन ब्रांड सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक गोयल लंबे समय से सरोगेट विज्ञापनों के खिलाफ हैं और भारत में तंबाकू और शराब के विज्ञापन पर प्रतिबंध के बाद से उन्होंने इन ब्रांडों के साथ काम करने से इनकार कर दिया है. उनकी याचिका में केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम 1994, सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम 2003 और 2022 के भ्रामक विज्ञापनों पर CCPA दिशानिर्देशों के स्पष्ट उल्लंघनों का हवाला दिया गया है.
अधिवक्ता आदिल सिंह बोपाराय द्वारा प्रस्तुत इस याचिका में प्रमुख सरोगेट विज्ञापनों के उदाहरण दिए गए हैं, जैसे विमल इलायची, राजश्री सिल्वर कोटेड इलायची, और पान बहार, जो प्राइमटाइम टीवी, विशेष रूप से IPL प्रसारण के दौरान प्रसारित हुए. गोयल का तर्क है कि ये सेलिब्रिटी-प्रायोजित प्रचार उपभोक्ताओं को गुमराह करते हैं और प्रतिबंधित उत्पादों को ग्लैमराइज करते हैं, जिससे एक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट उत्पन्न होता है.
याचिका में कहा गया है “देश एक स्वास्थ्य संकट से गुजर रहा है, जहां राष्ट्र के युवा कम उम्र में ही शराब और तंबाकू की लत का शिकार हो रहे हैं. यह प्रस्तुत किया गया है कि ये विज्ञापन, जो प्रसिद्ध हस्तियों का उपयोग करते हैं, न केवल शराब और तंबाकू के सेवन को बढ़ावा देते हैं, बल्कि इनके उपभोग को ग्लैमरस ढंग से दर्शाकर वैधता भी प्रदान करते हैं,” याचिका में वर्तमान आत्म-नियामक ढांचे, जिसमें भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (ASCI) शामिल है, की प्रभावशीलता पर सवाल उठाया गया है. गोयल ने विज्ञापन सामग्री की निगरानी के लिए एक अधिक मजबूत, सरकारी नेतृत्व वाले नियामक तंत्र की मांग की है.
याचिका में मांगी गई राहतें
• एक मैंडमस (Mandamas) रिट जारी कर विज्ञापनों में ASCI के आत्म-नियमन संहिता को लागू करने का निर्देश.
• एक मैंडमस (Mandamas) रिट जारी कर 2022 के भ्रामक विज्ञापनों और समर्थन की रोकथाम के लिए CCPA के दिशानिर्देशों को लागू करने का निर्देश.
• एक मैंडमस (Mandamas) रिट जारी कर केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम 1994 के प्रवर्तन का निर्देश.
गोयल का कहना है कि मौजूदा समाधान तंत्र इन विज्ञापनों के तात्कालिक प्रभाव का मुकाबला करने में बहुत धीमा है, जो किसी भी नियामकीय कार्रवाई से पहले बड़ी संख्या में दर्शकों तक पहुंच जाते हैं. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों की उन टिप्पणियों का भी हवाला दिया है, जिनमें विज्ञापन क्षेत्र में मजबूत नियामक निगरानी की आवश्यकता पर बल दिया गया है.
अदालत ने याचिका को स्वीकार कर लिया है और संबंधित प्राधिकरणों को नोटिस जारी कर दिए हैं. आगे की कार्यवाही का इंतजार है.
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