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Reliance Power के CFO गिरफ्तार, ₹68 करोड़ की फर्जी बैंक गारंटी में ED की बड़ी कार्रवाई
इस मामले ने कॉर्पोरेट वित्तीय पारदर्शिता और बैंक गारंटी सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. ED की आगे की जांच यह तय करेगी कि क्या Reliance Power के अन्य अधिकारियों की भूमिका भी इस फर्जीवाड़े में शामिल थी या नहीं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 6 months ago
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उद्योगपति अनिल अंबानी की कंपनी Reliance Power के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) अशोक पाल को ₹68 करोड़ की कथित फर्जी बैंक गारंटी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया है. यह कार्रवाई Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत की गई. सूत्रों के अनुसार, पाल को शुक्रवार रात हिरासत में लिया गया और शनिवार को उन्हें विशेष अदालत में पेश किया जाएगा, जहां ED उनकी रिमांड की मांग करेगी.
Reliance NU BESS Limited पर केंद्रित जांच
यह मामला Reliance Power की सहायक कंपनी Reliance NU BESS Limited (पूर्व नाम Maharashtra Energy Generation Limited) द्वारा Solar Energy Corporation of India Limited (SECI) को जमा की गई ₹68.2 करोड़ की बैंक गारंटी से संबंधित है. जांच में यह गारंटी फर्जी पाई गई.
ED का आरोप है कि ओडिशा स्थित Biswal Tradelink नामक कंपनी ने फर्जी बैंक गारंटियों का कारोबार किया. अगस्त 2025 में ED ने इस कंपनी और इसके प्रमोटर्स के परिसरों पर छापेमारी की थी, जिसके बाद कंपनी के प्रबंध निदेशक पार्थ सरथी बिस्वाल को गिरफ्तार किया गया था.
EOW की FIR से शुरू हुई थी जांच
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह पूरा मामला नवंबर 2024 में दिल्ली पुलिस की Economic Offences Wing (EOW) द्वारा दर्ज FIR से शुरू हुआ था. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि Biswal Tradelink कंपनी 8% कमीशन पर फर्जी बैंक गारंटियां जारी करती थी.
Reliance Group ने खुद को बताया ‘धोखाधड़ी का शिकार’
Reliance Group ने इस मामले पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि Reliance Power “धोखाधड़ी और जालसाजी का शिकार” बनी है. समूह ने बताया कि इस फर्जीवाड़े की जानकारी 7 नवंबर 2024 को स्टॉक एक्सचेंज को दी गई थी. कंपनी ने आरोपी थर्ड पार्टी के खिलाफ अक्टूबर 2024 में EOW में शिकायत दर्ज कराई थी. प्रवक्ता ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई जारी है.
ED की प्रारंभिक जांच में बड़े खुलासे
ED की प्रारंभिक जांच में पाया गया कि Biswal Tradelink ने SBI के आधिकारिक डोमेन sbi.co.in के समान s-bi.co.in नामक ईमेल डोमेन का उपयोग कर SECI को फर्जी संचार भेजा. कंपनी ने कमीशन के बदले फर्जी बिल बनाए और कई गुप्त बैंक खातों के माध्यम से करोड़ों रुपये का लेनदेन किया. जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी केवल “कागजों पर मौजूद” थी. इसका रजिस्टर्ड ऑफिस बिस्वाल के रिश्तेदार के घर पर था और ED की छापेमारी में वहां कोई भी कंपनी रिकॉर्ड नहीं मिला.
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