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ऑनलाइन सट्टेबाजी पर सख्ती की तैयारी, हाई कोर्ट ने UP सरकार को दिया समिति बनाने का आदेश
इलाहाबाद HC का यह निर्देश ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी के विरुद्ध उपभोक्ताओं की सुरक्षा और वित्तीय पारदर्शिता के लिए एक बड़ा कदम साबित होगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago
इलाहाबाद हाईकोर्ट (HC) ने उत्तर प्रदेश सरकार को ऑनलाइन सट्टेबाजी और गेमिंग के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए एक उच्चस्तरीय समिति के गठन का निर्देश दिया है. अदालत ने कहा कि वर्तमान में लागू सार्वजनिक जुआ अधिनियम, 1867, आज के डिजिटल युग की चुनौतियों से निपटने में असमर्थ है. यह कानून ब्रिटिश शासन काल में बना था और इसकी सीमाएं भौतिक जुआ घरों तक ही सीमित हैं.
आर्थिक सलाहकार केवी राजू करेंगे समिति की अध्यक्षता
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि समिति की अध्यक्षता यूपी सरकार के आर्थिक सलाहकार केवी राजू करें और प्रमुख सचिव (राज्य कर) को इसका सदस्य बनाया जाए. साथ ही, समिति में तकनीकी और कानूनी विशेषज्ञों को भी शामिल करने की बात कही गई है. यह समिति यह जांच करेगी कि क्या ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी को विनियमित करने की जरूरत है, और यदि हां, तो इसके लिए उपयुक्त कानूनी ढांचा कैसा हो.
कोर्ट ने पुराने कानून की सीमाएं बताईं
इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने की. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जुआ अधिनियम 1867 केवल पारंपरिक खेलों जैसे ताश के पत्तों तक सीमित है और यह आधुनिक तकनीक आधारित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को संबोधित नहीं करता. डिजिटल सट्टेबाजी, सर्वर, सीमा पार लेनदेन और वर्चुअल गेमिंग जैसे पहलुओं का इसमें कोई उल्लेख नहीं है.
आरोपी ऑनलाइन सट्टेबाजी से कमा रहे थे करोड़ों
यह आदेश इमरान खान और एक अन्य आरोपी द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया. पुलिस के अनुसार, आरोपी घर से ही ऑनलाइन सट्टेबाजी का रैकेट चला रहे थे और करोड़ों रुपये की कमाई कर चुके थे. कोर्ट ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स मनोवैज्ञानिक रूप से लोगों को आकर्षित करने के लिए रिवार्ड सिस्टम और लगातार नोटिफिकेशन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे युवाओं में लत लगने की आशंका बढ़ जाती है.
कानून प्रवर्तन में आ रही हैं कई चुनौतियां
कोर्ट ने यह भी कहा कि अधिकतर ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म भारत के बाहर संचालित होते हैं, और इनके लेनदेन ऐसे माध्यमों से होते हैं जिन्हें ट्रैक करना कठिन है. इससे कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी होती हैं और वित्तीय धोखाधड़ी का खतरा भी बढ़ जाता है.
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