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ऑनलाइन गेमिंग बिल: अब नहीं कर पाएंगे सेलिब्रिटी बेटिंग ऐप्स का प्रमोशन, कड़े नियमों की तैयारी

ऑनलाइन गेमिंग बिल का मकसद न केवल अवैध सट्टेबाजी और जुए को रोकना है, बल्कि इस पूरे सेक्टर को जवाबदेह, पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 9 months ago

केंद्र सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग ऐप्स पर लगाम कसने के लिए ऑनलाइन गेमिंग बिल (Online Gaming Bill) को मंजूरी दे दी है. इसका उद्देश्य गेमिंग प्लेटफॉर्म्स को कानूनी ढांचे में लाना और ऑनलाइन सट्टेबाजी की बढ़ती समस्या को नियंत्रित करना है. नए बिल में जहां सख्त सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है, वहीं अब कोई भी सेलिब्रिटी बेटिंग ऐप्स का प्रमोशन नहीं कर पाएगा. आइए आपको इस बिल की विस्तार से जानकारी देते हैं. 

क्या-क्या बदल जाएगा इस बिल से?

इस बिल के लागू होने के बाद ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर में कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे:

1.  बेटिंग ऐप्स चलाने पर 7 साल की जेल और भारी जुर्माना का प्रावधान होगा.
2.  सरकार जरूरत पड़ने पर ऐसे ऐप्स और वेबसाइट्स को ब्लॉक कर सकेगी.
3.  कोई भी सेलिब्रिटी या सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर इन ऐप्स का प्रमोशन नहीं कर सकेगा.
4.  प्रमोशन करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी.
5.  28% जीएसटी पहले से लागू है, लेकिन गेमिंग से हुई कमाई पर 30% टैक्स भी देना होगा.
6. विदेशी ऐप्स और बिना पंजीकरण वाले प्लेटफॉर्म भी टैक्स के दायरे में लाए जाएंगे और इन्हें ब्लॉक किया जा सकेगा.

7. विज्ञापनों में अब यह बताना जरूरी होगा कि गेमिंग से लत और वित्तीय नुकसान हो सकता है.
 

क्यों जरूरी हुआ यह कानून?

बीते कुछ वर्षों में ऑनलाइन गेमिंग उद्योग तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसके साथ ही सट्टेबाजी, धोखाधड़ी और युवाओं में लत जैसी समस्याएं भी सामने आई हैं. युवाओं के आर्थिक और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है. परिवार कर्ज और संकट में फंस रहे हैं, जिससे अपराध दर भी बढ़ रही है. कई राज्यों ने शिकायत की थी कि ऑनलाइन जुए पर केंद्र से कड़े कानून बनाए जाएं. यह कानून युवाओं को नशे और कर्ज के जाल से बचाने, और डिजिटल दुनिया को जवाबदेह और सुरक्षित बनाने के इरादे से लाया गया है. सरकार इस दिशा में पहले भी कई कदम उठा चुकी है. 2022 से फरवरी 2025 के बीच 1,400 से अधिक बेटिंग/जुआ ऐप्स को ब्लॉक किया गया. शिक्षा मंत्रालय ने भी अभिभावकों और शिक्षकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है.

प्रमोटर्स पर 3 साल की जेल और 1 करोड़ तक जुर्माना

इस बिल में खेल खेलने वाले यूजर्स को अपराधी नहीं माना जाएगा, लेकिन जो कंपनियां या व्यक्ति पैसे वाले गेम्स का संचालन या प्रमोशन करेंगे, उन्हें 3 साल तक की जेल या 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. यह कानून खासतौर पर प्रमोटर्स और कंपनियों को जिम्मेदार ठहराने के लिए बनाया गया है.

केंद्र का अधिकार क्षेत्र और राज्यों की भूमिका

बेटिंग और जुआ, संविधान के अनुसार, राज्य सूची का विषय है, लेकिन ऑनलाइन माध्यम से जुड़े मामलों का अधिकार केंद्र सरकार के पास है. चूंकि ये प्लेटफॉर्म कई राज्यों में एक साथ काम करते हैं, इसलिए केंद्र ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर रेगुलेट करने का फैसला किया है.

फ्रॉड और हवाला के मामलों पर लगाम

सरकार को लगातार फ्रॉड और हवाला के मामले भी मिल रहे हैं. एक केस में ED ने एक गेमिंग कंपनी से 68 करोड़ रुपये जब्त किए. जांच में सामने आया कि कंपनी ने 2,850 करोड़ रुपये कमाए और उनमें से 2,265 करोड़ विदेश भेज दिए. इस तरह की घटनाएं आम लोगों को वित्तीय नुकसान और धोखाधड़ी से बचाने की जरूरत को रेखांकित करती हैं.

ई-स्पोर्ट्स को मिलेगा बढ़ावा

यह कानून सिर्फ बेटिंग ऐप्स पर लगाम नहीं लगाएगा, बल्कि ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेमिंग को बढ़ावा भी देगा. सरकार पहले से ही WAVES, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिविटी, और STPC सेंटर ऑफ एक्सीलेंस जैसे कार्यक्रमों के जरिए ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा दे रही है.

टैक्स स्ट्रक्चर में भी बदलाव की तैयारी

अक्टूबर 2023 से ऑनलाइन गेमिंग पर 28% जीएसटी लागू है. गेमिंग से हुई कमाई पर 30% इनकम टैक्स पहले से ही लिया जा रहा है. अब सरकार की प्रस्तावित GST रिफॉर्म में यह टैक्स 18% या 40% किया जा सकता है.

 


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