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अब हर 'मर्ज' की दवा नहीं बनेंगे CA, सरकार ने पेशेवरों पर डाला PMLA का फंदा 

CA, CS और कॉस्ट अकाउंटेंट को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 (PMLA) के दायरे में लाने की वजह लगातार सामने आ रहे मामले हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

केंद्र सरकार ने मनी लॉन्ड्रिंग कानून (PMLA) का दायरा बढ़ा दिया है. सरकार चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA), कंपनी सेक्रेटरी (CS) और कॉस्ट अकाउंटेंट को भी इस कानून के दायरे में लेकर आई है. वित्त मंत्रालय की ओर से इस संबंध में एक अधिसूचना जारी की गई है, जिसमें कहा गया है कि अगर CA, CS या कॉस्ट अकाउंटेंट अपने क्लाइंट के लिए कुछ चुनिंदा वित्तीय लेन-देन करते हैं, तो वे एंटी मनी लॉन्ड्रिंग कानून के दायरे में आएंगे. दोषी पाए जाने पर सात साल तक की जेल हो सकती है और संपत्तियों को सीज किया जा सकता है.  

चूक हुई तो सजा
सरकार ने स्पष्ट किया है कि चार्टेड अकाउंटेंट और कंपनी सेक्रेटरी को अपने क्लाइंट की सभी डील पर बारीकी से नजर रखनी पड़ेगी. अगर इसमें कोई चूक हुई तो उन पर भी मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत कार्रवाई हो सकती है. वित्त मंत्रालय के निदेशक (मुख्यालय) शशांक मिश्रा द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि कालेधन, जालसाजी, धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग, हवाला में शामिल कारोबारियों का वित्तीय हिसाब रखने वाले सीए, सीएस और कॉस्ट अकाउंटेंट्स पर भी PMLA के तहत कार्रवाई की जाएगी. 

अब नहीं चलेगी चालबाजी
अक्सर कहा जाता है कि CA के पास हर समस्या का हल होता है. उन पर क्लाइंट्स को टैक्स चोरी के रास्ते सुझाने का आरोप भी लगता रहा है, लेकिन अब इस तरह के आरोप CA या CS को मुश्किल में डाल सकते हैं. अपने क्लाइंट्स की तरफ से कालेधन से खरीदी गई अचल संपत्ति की खरीद व बिक्री, उनके बैंक खातों का संचालन, पैसों का लेन-देन, शेयर व अन्य संपत्तियों के प्रबंधन, कंपनियों के निर्माण, संचालन, प्रबंधन, लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप फर्म और ट्रस्ट का गठन, कंपनियों की खरीद-बिक्री आदि में संलिप्तता पाए जाने पर CA, SA और कॉस्ट अकाउंटेंट को जेल भेजा जाएगा. इसके अलावा, यदि उनका क्लाइंट मादक पदार्थों से जुड़ा पाया गया, तो नारकोटिक्स ड्रग एंड साइकोट्रापिक सबस्टेंस एक्ट के तहत भी कार्रवाई होगी.

इस वजह से लिए फैसला
इन प्रोफेशनल्स को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 (PMLA) के दायरे में लाने की वजह लगातार सामने आ रहे मामले हैं. एक रिपोर्ट बताती है कि चीनी शेल कंपनियों के गठन के मामले में 2022 में 400 से अधिक CA और CS जांच के दायरे में आए थे. आरोप है कि इन्होंने कथित रूप से मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध फंडिंग में चीनी जालसाजों की मदद की थी. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के एक हजार करोड़ के जमीन सौदे में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में पहली बार CA राजेश अग्रवाल को गिरफ्तार किया गया था. एक अनुमान के अनुसार, देशभर में करीब 70 हजार करोड़ के फ्रॉड में पेशेवर फंसे हुए हैं. बोगस कंपनियों को बनाने में शामिल करीब 82 चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की जांच भारतीय सीए संस्थान भी कर रहा है. वहीं, कुछ CA और CS सीबीआई, ED जैसी एजेंसियों के शिकंजे में हैं.


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