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पेपर लीक के लिए फर्म? 30 कर्मचारियों की टीम को सैलरी सहित कई सुविधाएं देता था मुखिया!
केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी की सीबीआई की जांच में सामने आया है कि संजीव मुखिया पेपर लीक के लिए पूरी फर्म चला रहा था.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
नीट पेपर लीक (NEET Paper Leak) मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है. वैसे-वैसे चौंकाने वाली जानकारी सामने आती जा रही है. सीबीआई इस मामले में अब तक कई आरोपियों को अपनी गिरफ्त में ले चुकी है. संजीव मुखिया को इस पूरे कांड का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है. जांच एजेंसी को पूछताछ में यह पता चला है कि संजीव ने पेपर लीक के लिए पूरा एक नेटवर्क खड़ा कर रखा था. वह किसी फर्म की तरह इस काले कारोबार को चला रहा था.
दूसरे लीक में भी शामिल
संजीव मुखिया के इशारे पर भी पूरा नेटवर्क काम करता था. केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बिहार की बेउर जेल में नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में 13 आरोपियों से रविवार को पूछताछ की थी. लगभग सभी ने संजीव कुमार उर्फ सजीव मुखिया को इस पूरे कांड का मास्टरमाइंड बताया है. जांच में यह भी सामने आया है कि संजीव ने इस काम के लिए कई लोगों को नौकरी पर रखा हुआ था. साथ ही उन्हें बाकायदा बाइक भी उपलब्ध कराई गई थी, ताकि काम में किसी तरह की देरी न हो. दूसरे शब्दों में कहें तो संजीव के लिए पेपर लीक एक कारोबार था. उसका नाम कई दूसरे पेपर लीक में भी सामने आया है.
ऐसे युवाओं पर फोकस
एक रिपोर्ट के अनुसार, संजीव मुख्या ने बिहार के नालंदा और पटना जिले में 30 कर्मचारी रखे हुए थे. उसके निशाने पर खासतौर पर बेरोजगार और भरोसेमंद युवक रहते थे. इन्हें पैसों का लालच देकर वह अपने नेटवर्क में शामिल कर लेता था. संजीव इन्हें सैलरी के साथ-साथ बाइक जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराता था. नीट पेपर लीक मामले में अब तक कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, लेकिन मुखिया अब तक आजाद है. बिहार पुलिस संजीव कुमार की तलाश में जुटी हुई है. संजीव अपना पेपर लीक गिरोह को नालंदा से ही ऑपरेट किया करता था.
कहां छिपा है संजीव?
संजीव के ठिकाने के बारे में अब तक कोई सटीक जानकारी नहीं मिली है. वह अक्सर नेपाल जाता रहता था. लिहाजा यह भी संभव है कि वह नेपाल में कहीं छिपा हो. जांच एजेंसी और पुलिस उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, गुजरात आदि राज्यों में भी संजीव की तलाश कर रही हैं, क्यों उसके इन राज्यों में कांटेक्ट थे. CBI ने संजीव की गिरफ़्तारी के लिए इन छह राज्यों पर फोकस किया हुआ है. संजीव अपने साथियों के साथ मिलकर पेपर लीक को एक कारोबार की तरह चला रहा था. इस काम में काफी पैसा है. एक-एक पेपर लाखों में बिकता है. जितना बड़ा पेपर, उतनी बड़ी रकम. नीट का पेपर 30 से 32 लाख में बिका था.
5 साल में 41 लीक
पेपर लीक को अंजाम देने के लिए बाकायदा एक सिस्टम काम करता है, जिसमें ऊपर से लेकर नीचे तक कई मोहरे होते हैं. उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, गुजरात, बिहार, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, असम, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर में पिछले 5 साल में 41 भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं. केवल प्रतियोगी परीक्षाएं ही नहीं, निचले स्तर पर भी पेपर लीक महामारी बना हुआ है. चूंकि नीट बड़ी परीक्षा है, इसलिए मामला भी इतना बड़ा हो गया है. इस साल के शुरुआती महीने में यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा में बड़ी गड़बड़ी सामने आई थी. इसके बाद लगातार परीक्षाओं में गड़बड़ी के मामले सामने आ रहे हैं.
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