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जेपी इंफ्राटेक में Flat बुक कराने वालों के लिए आज बड़ा दिन, NCLT सुना सकता है फैसला
उत्तर प्रदेश के नोएडा और ग्रेटर नोएडा में जेपी इंफ्राटेक के कई प्रोजेक्ट अधूरे रहने से करीब 22 हजार फ्लैट खरीदारों को अभी तक अपने घर नहीं मिल पाए हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
जेपी इंफ्राटेक (Jaypee Infratech) के घर बुक कराने वालों के लिए आज बड़ा दिन है. इस मामले में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) आज अपना फैसला सुना सकता है. जेपी इंफ्राटेक के फ्लैट बुक कराने वाले करीब 22 हजार बायर 2016 से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं. कर्ज में डूबी कंपनी जेपी इंफ्राटेक के अधूरे प्रोजेक्ट पूरे करने को लेकर कई बार वोटिंग हो चुकी है. एनसीएलटी ने कुछ वक्त पहले सभी पक्षों की आपत्ति का निस्तारण करने के बाद फैसला रिजर्व रखा लिया था, जिसे वो आज सुना सकता है.
पिछले साल लगी थी बोली
पिछले साल जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड के अधिग्रहण के लिए मुंबई के सुरक्षा ग्रुप की ओर से जो बोली (Suraksha Group’s Bid) लगाई गई, उसे एनसीएलटी ने स्वीकार कर लिया था. बायर्स व अन्य निवेशकों के माध्यम से हुई वोटिंग के आधार पर जेपी इंफ्राटेक के अधूरे प्रोजेक्ट पूरे करने के लिए सुरक्षा ग्रुप का चयन किया गया था. करीब तीन महीने एनसीएलटी ने इस मामले पर फैसला रिजर्व रख लिया था, जिसे वो आज सुना सकता है.
2021 में मिली थी मंजूरी
उत्तर प्रदेश के नोएडा और ग्रेटर नोएडा में जेपी इंफ्राटेक के कई प्रोजेक्ट अधूरे रहने से करीब 22 हजार फ्लैट खरीदारों को अभी तक अपने घर नहीं मिल पाए हैं. मुंबई के सुरक्षा ग्रुप को जून 2021 में जेपी इंफ्राटेक के अधिग्रहण के लिए वित्तीय लेनदारों एवं घर खरीदारों की मंजूरी मिली थी. 2022 की शुरुआत में ही सुरक्षा ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ आलोक दवे ने कहा था कि एनसीएलटी की मंजूरी मिलते ही वह जल्द से जल्द रुके पड़े प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू कर देंगे.
12 कंपनियों में शामिल
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जेपी इंफ्राटेक के अधिग्रहण के लिए सुरक्षा ग्रुप ने अपनी आखिरी पेशकश में कर्ज देने वाले बैंकों को 2500 एकड़ से अधिक भूमि देने की पेशकश की है. वहीं नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर के तौर पर वह बैंकों को 1300 करोड़ रुपए का भुगतान भी करेगा. कंपनी का दावा है कि वह अगले 4 साल में सभी फ्लैट्स का निर्माण पूरा कर लेगी. बता दें कि जेपी इंफ्राटेक के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया अगस्त 2017 में शुरू की हुई थी, लेकिन लंबी कानूनी लड़ाई के चलते प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई. JP उन शुरुआती 12 कंपनियों में से है, जिन्हें लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कर्ज वसूली के लिए बैंकों को एनसीएलटी जाने की सलाह दी थी.
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