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Zee-Sony मर्जर को लेकर NCLT से आई ऐसी खबर, झूम उठे कंपनी के शेयर
जी-सोनी मर्जर की घोषणा 2021 में ही हो गई थी, लेकिन कई कारणों से चलते इसमें देरी होती गई.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
Zee और Sony के Merger को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की मुंबई पीठ ने इस विलय को मंजूरी दे दी है. साथ ही NCLT ने इससे जुड़ी सभी आपत्तियों को भी खारिज कर दिया है. यानी अब इस मर्जर का रास्ता साफ हो गया है. इस मामले की सुनवाई 10 जुलाई को हुई थी. सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद न्यायिक सदस्य एचवी सुब्बा राव और तकनीकी सदस्य मधु सिन्हा की खंडपीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. अब NCLT ने साफ कर दिया है कि Zee और Sony मर्जर की दिशा में बढ़ सकते हैं.
शेयरों में आया उछाल
इस बीच, Zee Entertainment Enterprises Limited (ZEEL) के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है. कंपनी का शेयर 16.18% की उछाल के साथ 281.45 रुपए पर बंद हुआ है. बाजार की शुरुआत में ZEEL का शेयर सामान्य रफ्तार से चल रहा था, लेकिन NCLT के आदेश की खबर मिलते ही रॉकेट की तरह भागने लगा. बता दें कि इस मेगा विलय का उद्देश्य 10 अरब डॉलर का मीडिया वेंचर बनाना है. जी-सोनी मर्जर की घोषणा 2021 में ही हो गई थी, लेकिन कई कारणों से चलते इसमें देरी होती गई.
किसकी, कितनी हिस्सेदारी?
मर्जर अग्रीमेंट की शर्तों के तहत, सोनी के पास मर्जर के बाद अस्तित्व में आई कंपनी में 50.86% हिस्सेदारी होगी. जबकि Zee के प्रमोटरों की हिस्सेदारी 3.99% और अन्य Zee शेयरधारकों की हिस्सेदारी 45.15% होगी. इस मर्जर के अप्रूवल में इतना समय इसलिए लग गया क्योंकि कई फाइनेंशियल और ऑपरेशनल क्रेडिटर्स ने विलय का विरोध करते हुए एनसीएलटी का रुख किया था, साथ ही ZEEL के खिलाफ कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू करने के लिए आवेदन भी दायर किया था.
अच्छे नहीं रहे नतीजे
IDBI Bank, IndusInd, Axis Finance, JC Flower ARC सहित अन्य लेनदारों ने इस आधार पर विलय का विरोध किया था कि ZEE द्वारा लिए गए ऋण का भुगतान नहीं किया गया है. हालांकि, ZEE ने विभिन्न चरणों में कुछ लेनदारों के साथ समझौता किया. इसमें इंडसइंड और जेसी फ्लावर का नाम शामिल है. वहीं, एक रिपोर्ट में बताया गया है कि Zee एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड को चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सालाना आधार पर 53.42 करोड़ रुपए का घाटा उठाना पड़ा है. इस घाटे का कारण कल्वर मैक्स के साथ उसके विलय से जुड़ी लागत है. दरअसल, इस तिमाही के दौरान कल्वर मैक्स के साथ मर्जर पर कंपनी को 70.64 करोड़ का अतिरिक्त खर्च आया था.
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