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ZEEL की मुश्किलों में इजाफा, इस याचिका पर सुनवाई को NCLAT तैयार
IDBI बैंक ने NCLT के आदेश के खिलाफ NCLAT का दरवाजा खटखटाया है. ये मामला जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड से जुड़ा हुआ है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) की मुश्किलों में इजाफा होता दिखाई दे रहा है. नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ZEEL से जुड़ी आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) की याचिका पर विस्तार से सुनवाई के लिए तैयार हो गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मामला जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड के खिलाफ बैंक की दिवालिया याचिका से संबंधित है. हालांकि ZEEL को अभी कोई नोटिस जारी नहीं किया गया है. मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को होगी.
इस धारा पर उलझा मामला
IDBI Bank ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के आदेश के खिलाफ NCLT का दरवाजा खटखटाया है. एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि मई 2023 में NCLT की मुंबई बेंच ने IDBI बैंक की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया था, क्योंकि यह इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के सेक्शन 10A के तहत प्रतिबंधित था. दरअसल, धारा 10A के तहत 25 मार्च 2020 को या उसके एक साल के भीतर किसी भी डिफॉल्ट के लिए फाइनेंशियल और ऑपरेशनल क्रेडिटर कर्ज लेने वालों के खिलाफ कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) नहीं दाखिल कर सकते हैं. यह प्रावधान इसलिए लाया गया था क्योंकि कोरोना महामारी के चलते आर्थिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई थीं और कंपनियों को लोन के सहारे की जरूरत थी. हालांकि, IDBI की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता Ramji Srinivasan का कहना है कि यह मामला धारा 10A के तहत नहीं आता.
ये कंपनी नहीं चुका पाई कर्ज
सिटी नेटवर्क्स (Siti Networks) के एक लोन की गारंटर ZEEL थी, जब सिटी नेटवर्क्स लोन को नहीं चुका पाई, तो जी एंटरटेनमेंट के खिलाफ IDBI बैंक ने दिवालिया याचिका दायर की. हालांकि NCLT मुंबई की 2 सदस्यीय बेंच ने फैसला सुनाया कि सेक्शन 10A के चलते इस मामले में ZEEL के खिलाफ मामला नहीं चलाया जा सकता. इसके बाद बैंक ने NCLT के फैसले के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) का दरवाजा खटखटाया, जो अब सुनवाई के लिए तैयार हो गया है.
मर्जर को मिल चुकी है मंजूरी
बता दें कि इससे पहले नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की मुंबई पीठ ने Zee और Sony के Merger को मंजूरी दे दी थी. साथ ही NCLT ने इससे जुड़ी सभी आपत्तियों को भी खारिज कर दिया था. इस मामले की सुनवाई 10 जुलाई को हुई थी. सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद न्यायिक सदस्य एचवी सुब्बा राव और तकनीकी सदस्य मधु सिन्हा की खंडपीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. हाल ही में NCLT ने साफ कर दिया है कि Zee और Sony मर्जर की दिशा में बढ़ सकते हैं. मर्जर अग्रीमेंट की शर्तों के तहत, सोनी के पास मर्जर के बाद अस्तित्व में आई कंपनी में 50.86% हिस्सेदारी होगी. जबकि Zee के प्रमोटरों की हिस्सेदारी 3.99% और अन्य Zee शेयरधारकों की हिस्सेदारी 45.15% होगी.
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