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CJI चंद्रचूड़ के उत्तराधिकारी जस्टिस संजीव खन्ना के बारे में कितना जानते हैं आप?
जस्टिस संजीव खन्ना को 2005 में दिल्ली हाईकोर्ट के एडिशनल जज के रूप में पदोन्नत किया गया और 2006 में वह स्थायी न्यायाधीश बन गए.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
जस्टिस संजीव खन्ना ,चीफ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ के उत्तराधिकारी होंगे. वह 11 नवंबर को भारत के 51वें चीफ जस्टिस का पदभार ग्रहण करेंगे. जस्टिस चंद्रचूड़ ने 8 नवंबर 2022 को चीफ जस्टिस के रूप में पदभार ग्रहण किया था, उनका कार्यकाल 10 नवंबर को खत्म हो रहा है. जस्टिस संजीव खन्ना का मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यकाल 13 मई, 2025 को खत्म होगा. बता दें कि CJI धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ ने अपने उत्तराधिकारी के तौर पर जस्टिस संजीव खन्ना का नाम सुझाया था, जिस पर मुहर लग गई है.
सोशल मीडिया पर जानकारी
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इस संबंध में सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए बताया कि भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त शक्ति का इस्तेमाल करते हुए, माननीय राष्ट्रपति ने भारत के माननीय प्रधान न्यायाधीश से परामर्श के बाद, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव खन्ना को देश के प्रधान न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करती हैं. वह 11 नवंबर, 2024 को पदभार ग्रहण करेंगे.
ऐसा रहा है करियर
जस्टिस संजीव खन्ना अपने कई फैसलों के लिए चर्चा में रहे हैं. जस्टिस खन्ना ने 1983 में दिल्ली बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराया था और यहीं से अपने कानूनी सफर की शुरुआत की थी. दिल्ली हाईकोर्ट का रुख करने से पहले जस्टिस खन्ना तीस हजारी स्थित जिला अदालतों में प्रैक्टिस करते थे. जस्टिस संजीव खन्ना ने संवैधानिक कानून, मध्यस्थता, कमर्शियल लॉ, कंपनी लॉ और आपराधिक कानून सहित कई अलग-अलग सेक्टर्स में प्रैक्टिस की है. उन्होंने आयकर विभाग के वरिष्ठ स्थायी वकील के तौर पर भी काम किया है. उन्हें 2005 में दिल्ली हाईकोर्ट के एडिशनल जज के रूप में पदोन्नत किया गया था और 2006 में वह स्थायी न्यायाधीश बन गए.
चर्चा में रहे कई फैसले
हाल ही में जस्टिस खन्ना तब सुर्खियों में आये थे, जब उन्होंने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत दी थी. इस जमानत की बदौलत ही केजरीवाल लोकसभा चुनाव के दौरान प्रचार कर पाए थे. इसी तरह उन्होंने दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की जमानत से जुड़े मामले में कहा था कि पीएमएलए मामलों में देरी होना जमानत का एक बड़ा कारण हो सकता है. जस्टिस खन्ना पीएमएलए के कई प्रावधानों की समीक्षा करने वाली पीठ के अध्यक्ष भी हैं. इसके अलावा, जस्टिस खन्ना पांच न्यायाधीशों वाली उस पीठ का भी हिस्सा थे, जिसने चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक घोषित किया था. वह आर्टिकल 370 को निरस्त करने का फैसला बरकरार रखने वाली पीठ का भी हिस्सा थे.
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