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WhatsApp पर मिलेगी सुप्रीम कोर्ट में लंबित केस की जानकारी, जानिए कैसे?
WhatsApp पर अपडेट मिलने से ज्यादा से ज्यादा वकीलों की कोर्ट तक पहुंच बढ़ेगी. साथ ही दूर दराज रहने वाले लोगों को भी कोर्ट कार्यवाही की सूचना मिल सकेगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने डिजिटलीकरण की ओर बढ़ते हुए कोर्ट में लंबित मुकदमों का अपडेट देने के लिए एक व्हाट्सऐप (WhatsApp) नंबर जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा व्हाट्सऐप मैसेज के जरिए वकीलों और पक्षधरों को वाद सूची, केस दाखिल करने और सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होने की जानकारी दी जाएगी. तो आइए जानते हैं सुप्रीम कोर्ट का ये व्हाट्सऐप नंबर क्या है और इसके क्या फायदे हैं?
सुप्रीम कोर्ट में सबसे ज्यादा मामले लंबित
सुप्रीम कोर्ट की ओर से अपने 75वें वर्ष में व्हाट्सऐप मैसेजिंग सेवाओं को आइटी सर्विस के साथ एकीकृत करके न्याय तक पहुंच को मजबूत करने की नयी पहल की गई है. बता दें, देश की कोर्ट में इस रिकॉर्ड मामले न्याय के लिए लंबित हैं, जिसमें सबसे ज्यादा मामले सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं. ऐसे में कोर्ट ने वादी और प्रतिवादी की सहूलियत के लिए व्हाट्सऐप के जरिए लंबित मुकदमों की अपडेट की जानकारी देने की सुविधा शुरू की है.
क्या है सुप्रीम कोर्ट का व्हाट्सऐप नंबर?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सुप्रीम कोर्ट का आधिकारिक व्हाट्सऐप नंबर 87687676 है. इस नंबर पर एकतरफा सूचनाएं मिलेंगी. इस पर कोई संदेश या काल नहीं की जा सकती. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि यह सुविधा हमारे रोजाना के कामकाज और आदतों में महत्वपूर्ण बदलाव लाएगी और इससे कागज बचाने में काफी मदद मिलेगी.
ऐसे मिलेगी मुकदमों की सूचना
सुप्रीम कोर्ट के व्हाट्सऐप नंबर से अब वकीलों को केस दाखिल होने के बारे में ऑटोमेटेड मैसेज मिलेगा. इसके अलावा वकीलों को वाद सूची भी मोबाइल पर उपलब्ध होगी. वाद सूची का मतलब है कि कोर्ट में सुनवाई के लिए उस दिन लगे मुकदमों की सूची.
इससे क्या फायदा होगा?
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार इससे और अधिक वकीलों की सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच बढ़ेगी साथ ही दूर दराज रहने वाले लोगों को भी कोर्ट कार्यवाही की सूचना मिल सकेगी. इसका बड़ा प्रभाव होगा और इससे कागज की बचत के साथ धरती को संरक्षित करने में मदद मिलेगी. वहीं, केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री भी ई-कोर्ट को बढ़ावा दे रहे हैं, ताकि लोगों की न्याय तक पहुंच सुलभ हो. बता दें, केंद्र सरकार ने ई-कोर्ट परियोजना के लिए 7000 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं.
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