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बेशुमार दौलत पर दिल छोटा...इस दिग्गज बिज़नेस फैमिली पर लगे गंभीर आरोप
अदालत में परिवार के चार सदस्यों के खिलाफ मानव तस्करी का ट्रायल शुरू हो गया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
हिंदुजा फैमिली (Hinduja Family) एक बार फिर से सुर्खियों में है. हालांकि, इस बार वजह फैमिली की दौलत नहीं बल्कि कुछ और है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में बताया गया है कि इस बिज़नेस घराने के चार सदस्यों पर घरेलू स्टाफ से दुर्व्यवहार का आरोप लगा है. इन्होंने स्विट्जरलैंड में अपने विला पर कामकाज के लिए रखे कर्मचारियों को बेहद कम सैलरी दी और उनसे 15 से 18 घंटे तक काम कराया. परिवार पर शोषण और मानव तस्करी के भी आरोप हैं.
पासपोर्ट भी किए जब्त
रिपोर्ट के अनुसार, हिंदुजा फैमिली घर के कामकाज के लिए भारत से लोग लेकर आई थी, जिनसे बेहद कम वेतन पर लंबे समय तक काम कराया जाता था. उनके पासपोर्ट भी जब्त कर लिए गए थे. इस मामले में आरोपियों के खिलाफ स्विट्जरलैंड की अदालत में मानव तस्करी का ट्रायल शुरू हो गया है. सरकारी वकील ने कम से कम एक साल की सजा की मांग की है. भारत में जड़ें रखने वाली हिंदुजा फैमिली ब्रिटेन से अपना कारोबार चलाती है. ये फैमिली ब्रिटेन की सबसे रईस फैमिली है.
नहीं मिलती कोई छुट्टी
अदालत में सरकारी वकील ने हिंदुजा फैमिली पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह स्टाफ से ज्यादा अपने कुत्तों पर खर्चा करती थी. अदालत के समक्ष परिवार द्वारा अपने पालतू कुत्ते पर खर्च और नौकरों की दैनिक मजदूरी के बीच के भारी अंतर को उजागर किया है. अभियोजन पक्ष का दावा है कि हिंदुजा दंपत्ति ने अपने एक कर्मचारी को 18 घंटे के कार्यदिवस के लिए महज 7 स्विस फ़्रैंक (करीब 657 रुपए) का भुगतान किया, जबकि अपने पालतू कुत्ते पर सालाना 8,584 फ़्रैंक (8,08,436 रुपए) खर्च किए. हिंदुजा फैमिली पर आरोप है कि वो अपने कर्मचारियों को साप्ताहिक छुट्टी नहीं देती थी, उनके काम के घंटे भी तय नहीं हैं. स्टॉफ अपने मर्जी से बाहर नहीं जा सकता और न ही नौकरी छोड़ सकता है.
परिवार ने आरोप नकारे
वहीं, हिंदुजा परिवार ने आरोपों से इंकार किया है. उसके वकीलों का कहना है कि सैलरी में कर्मचारियों के लिए उपलब्ध आवास और भोजन की व्यवस्था के नजरिये से देखे जाना चाहिए. उन्होंने लंबे समय तक काम करने के दावे को भी पूरी तरह खारिज कर दिया है. हिंदुजा परिवार के लिए राहत वाली बात ये है कि कुछ पूर्व नौकरों ने उसके समर्थन में गवाही दी है. हालांकि, पासपोर्ट जब्त करने और आने-जाने की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध के आरोप बेहद गंभीर हैं और इन्हें मानव तस्करी के रूप में देखा जा सकता है.
गोपीचंद हिंदुजा हैं चेयरमैन
अब हिंदुजा ग्रुप और उसके चेयरमैन के बारे में भी जान लेते हैं. भारतीय मूल के ब्रिटिश बिजनेसमैन गोपीचंद हिंदुजा (Gopichand Hinduja) ब्रिटेन के सबसे अमीर शख्स हैं. हिंदुजा परिवार की नेटवर्थ 37.196 अरब पाउंड है. पिछले एक साल के दौरान में इसमें 2.196 अरब पाउंड का इजाफा हुआ है. गोपीचंद हिंदुजा 'हिंदुजा ग्रुप' (Hinduja Group) के चेयरमैन हैं. गोपीचंद हिंदुजा को जीपी के नाम से भी जाना जाता है. 1940 में भारत में जन्मे GP पिछले साल बड़े भाई श्रीचंद हिंदुजा की मौत के बाद से हिंदुजा ग्रुप के चेयरमैन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. गोपीचंद ने मुंबई के जैन हिंद कॉलेज से 1959 में ग्रेजुएशन किया और फिर फैमिली बिजनेस का हिस्सा बन गए. आज हिंदुजा ग्रुप का कारोबार 48 देशों में फैला है. 150,000 से अधिक कर्मचारियों वाले इस समूह की भारत में छह लिस्टेड कंपनियां हैं. इसमें Ashok Leyland, IndusInd Bank, GOCL Corporation, Gulf Oil Lubricants India, Hinduja Global Solutions और NDL Ventures शामिल हैं.
कई सेक्टर्स में फैला है कारोबार
हिंदुजा समूह की नींव वैसे तो परमानंद हिंदुजा ने 1914 में रखी, लेकिन गोपीचंद ने अपने भाइयों के साथ मिलकर इसे बुलंदियों पर पहुंचाया. आज समूह का कारोबार कई अलग-अलग सेक्टर्स में फैला हुआ है. इसमें IT, ऑटो, मीडिया, ऑयल एंड स्पेशिएल्टी केमिकल्स, बैंकिंग एंड फाइनेंस, पावर जनरेशन, रियल एस्टेट और हेल्थकेयर प्रमुख हैं. हिंदुआ समूह ने ही अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कैपिटल को खरीदा है. जूनियर अंबानी की इस कर्ज में डूबी कंपनी को खरीदने की दौड़ में कई दिग्गज शामिल थे, लेकिन बाजी हिंदुजा समूह के हाथ लगी.
ईरान से भी रहा है गहरा संबंध
जिस ईरान को लेकर इस समय पूरी दुनिया में चर्चा है, वहां 1919 में हिंदुजा समूह की मौजूदगी थी. करीब 60 सालों तक ईरान ही इस समूह का हेडक्वार्टर रहा, लेकिन 1979 में इस्लामिक क्रांति के चलते हिंदुजा ग्रुप ने ब्रिटेन को अपना ठिकाना बनाया. ब्रिटेन की राजधानी लंदन को समूह ने अपने मुख्यालय बनाया. इस ग्रुप की शुरुआत भले ही मर्चेंट बैंकिंग और ट्रेड से हुई थी, मगर आज कई सेक्टर्स में मौजूद है. 1971 में परमानंद दीपचंद के निधन के बाद गोपीचंद हिंदुजा ने भाइयों के साथ मिलकर कारोबार को आगे बढ़ाया.
छोटे भाई भारत में हैं चेयरमैन
भारत के ऑटो सेक्टर में समूह की कंपनी अशोक लीलैंड का अपना एक अलग स्थान है. इस कंपनी ने 1997 में देश की पहली CNG बस उतारी थी. 1994 में हिंदुजा ग्रुप की भारत के बैंकिंग सेक्टर में IndusInd Bank के रूप में एंट्री हुई. हिंदुजा ग्लोबल सॉल्यूशंस और गल्फ ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड समूह की दो प्रमुख कंपनियां हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कारोबार का मालिकाना हक सामूहिक रूप से सभी चार भाइयों - श्रीचंद, गोपीचंद, प्रकाश और अशोक के पास रहा है. भाइयों में श्रीचंद पी हिंदुजा सबसे बड़े थे, जिनका पिछले साल निधन हो गया. सबसे छोटे भाई अशोक भारत में हिंदुजा ग्रुप के चेयरमैन हैं.
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