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हिमाचल HC ने हर्बल हाइजीन टेक्नोलॉजी विवाद में P&G के खिलाफ FIR रद्द करने से किया इनकार

राजीव सचदेव बनाम P&G मामला केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि भारतीय नवप्रवर्तकों और स्टार्टअप्स की बहुराष्ट्रीय कंपनियों से कानूनी असमानता को दर्शाता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

हर्बल हाइजीन टेक्नोलॉजी की चोरी के आरोपों को लेकर प्रॉक्टर एंड गैम्बल (P&G) के खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) को रद्द करने से हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने इनकार कर दिया है. यह मामला दिल्ली के उद्यमी राजीव सचदेव द्वारा दायर किया गया था, जिन्होंने आरोप लगाया कि P&G ने उनकी पेटेंट प्राप्त तकनीक का बिना अनुमति उपयोग किया. इस फैसले से बौद्धिक संपदा अधिकारों, नवाचार की नैतिकता, और भारतीय स्टार्टअप्स की बहुराष्ट्रीय कंपनियों से सुरक्षा जैसे बड़े सवाल फिर से चर्चा में आ गए हैं.

Cr. MMO No. 266 of 2024 में फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति राकेश कैंथला ने कहा कि पुलिस जांच की आवश्यकता को लेकर प्रथम दृष्टया साक्ष्य मौजूद हैं, यह मामला न्यायिक मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास, कंडाघाट, चुनौती सगरोली द्वारा 30 दिसंबर 2023 को पारित आदेश से उपजा, जिसमें उन्होंने कंडाघाट थाना प्रभारी (SHO) को सचदेव की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज करने का निर्देश दिया.

आरोप
दिल्ली के उद्यमी और एडवांटेज नेचर के संस्थापक राजीव सचदेव का आरोप है कि उनकी 23 वर्षों में विकसित की गई, पेटेंट प्राप्त, एंटी-वायरल, एंटी-माइक्रोबियल और एंटी-ओडर गुणों वाली हर्बल हाइजीन टेक्नोलॉजी का P&G ने अवैध रूप से उपयोग किया और उसे अपने व्हिस्पर अल्ट्रा क्लीन सैनिटरी पैड्स में इस्तेमाल किया.
2018 में, सचदेव ने अपनी नवाचार को P&G के Connect + Develop प्लेटफॉर्म के माध्यम से सबमिट किया, जो बाहरी सहयोग को प्रोत्साहित करने वाला एक कार्यक्रम है. उनका सबमिशन, जिसमें पेटेंट से संबंधित विवरण शामिल थे, P&G द्वारा संदर्भ संख्या 2018-0001552 के तहत औपचारिक रूप से स्वीकार किया गया. हालांकि, बाद में कंपनी ने इसमें रुचि लेने से इनकार कर दिया.

2020 में, P&G ने एक नई उत्पाद श्रृंखला व्हिस्पर अल्ट्रा क्लीन (नया हर्बल ऑयल के साथ) लॉन्च की, जिसमें नीम आधारित हाइजीन विशेषताएं बताई गईं, जो सचदेव द्वारा साझा की गई तकनीक से काफी मिलती-जुलती थीं. उनका कहना है कि इस लॉन्च से उन्हें भारी व्यावसायिक नुकसान हुआ और उनकी इस तकनीक को अन्य कंपनियों को लाइसेंस देने की क्षमता कमजोर हुई.

कानूनी विवाद
सचदेव की शिकायत धारा 156(3) सीआरपीसी के तहत दायर की गई थी, जिसमें भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120बी (आपराधिक षड्यंत्र), 405 (आपराधिक न्यासभंग), 415 (धोखाधड़ी), और 420 (धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति प्राप्त करना) के तहत आपराधिक कार्रवाई की मांग की गई थी. मजिस्ट्रेट चुनौती सगरोली ने शिकायत की जांच के बाद पुलिस को FIR दर्ज करने का निर्देश दिया, यह उल्लेख करते हुए कि अभियुक्तों ने बिना सहमति के नवप्रवर्तक के विचार का व्यावसायिक लाभ के लिए कथित रूप से शोषण किया.

P&G की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज गुप्ता, जिन्हें अधिवक्ता शारदा करोल का सहयोग प्राप्त था, ने तर्क दिया कि कंपनी का उत्पाद एक विशेष सूत्रीकरण पर आधारित है जिसमें सैनिटरी पैड के कोर में हर्बल ऑयल जोड़ा जाता है , जो कि सचदेव की कपड़ा रंगाई से संबंधित पेटेंट विधि से काफी अलग है.

रक्षा पक्ष ने यह भी कहा कि नवाचार सबमिशन एक स्वैच्छिक, गैर-गोपनीय चैनल के माध्यम से किया गया था, जिसमें स्पष्ट अस्वीकरण (disclaimers) थे, और न तो कोई अनुबंधात्मक दायित्व था और न ही कोई वादा किया गया था. P&G ने यह भी बताया कि सचदेव द्वारा 2022 में भेजे गए "सीज़ एंड डीसिस्ट" नोटिस का उत्तर दिया गया था और दिल्ली और बॉम्बे उच्च न्यायालयों में कैविएट दायर किए गए थे.

दलीलें और न्यायालय की टिप्पणियां
राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता जितेंद्र के. शर्मा ने पुष्टि की कि FIR संख्या 02/2024, दिनांक 1 जनवरी 2024, मजिस्ट्रेट के आदेश के अनुसार दर्ज की गई थी और मामला सक्रिय जांच के अधीन है.

सचदेव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक शर्मा, अधिवक्ता अनुभूति शर्मा, जीवेश मेहता और निहित डालमिया के साथ उपस्थित हुए. उन्होंने तर्क दिया कि P&G ने नवप्रवर्तक को गुमराह किया, खुले नवाचार प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग किया, और उनके मौलिक विचार पर आधारित उत्पाद लॉन्च करके बाजार में प्रमुख स्थिति प्राप्त की.

न्यायमूर्ति कैंथला ने कहा कि हालांकि P&G ने किसी भी गलत कार्य को नकारा है, लेकिन मामला ऐसे विवादित तथ्यों और तकनीकी विवरणों से जुड़ा है जिनकी जांच आवश्यक है. उन्होंने इस प्रारंभिक चरण में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा कि आरोप IPC के तहत संज्ञेय अपराधों को दर्शाते हैं और बिना समुचित जांच के आपराधिक कार्यवाही को रोका नहीं जा सकता.

व्यापक प्रभाव
सचदेव का दावा है कि उन्हें ₹350 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है, इसके अलावा उनकी प्रतिष्ठा और संभावित साझेदारियों को भी अपूरणीय क्षति पहुंची है. उनका आविष्कार “Enliven” भारत, अमेरिका और यूरोप में पेटेंट प्राप्त है, जिसे IIT दिल्ली में इनक्यूबेट किया गया था और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के सहयोग से विकसित किया गया था.

P&G भारतीय सैनिटरी नैपकिन बाजार के 54 प्रतिशत से अधिक हिस्से पर कब्जा रखती है, ऐसे में यह विवाद बौद्धिक संपदा संरक्षण, खुले नवाचार की नैतिकता, और भारतीय स्टार्टअप्स की बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ व्यवहार में कानूनी असुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों को उजागर करता है.

अब यह मामला नियमित जांच की प्रक्रिया से आगे बढ़ेगा, और उच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जब तक कोई स्पष्ट रूप से कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग या न्याय में बाधा नहीं दिखाई देती, वह हस्तक्षेप नहीं करेगा.


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