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चिटफंड घोटाला मामले में पीड़ितों को पैसा लौटाएगी सरकार, ED ने जब्त की ₹3,339 करोड़ की संपत्ति
एग्री गोल्ड समूह की कंपनियों आरोप है कि उसने “उच्च रिटर्न” या जमीन का झांसा देकर लगभग 19 लाख ग्राहकों से रियल एस्टेट में निवेश के नाम पर कुल 32 लाख खातों में राशि जमा करायी थी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
एग्री गोल्ड ग्रुप ऑफ कंपनीज की पोंजी योजनाओं में अपनी गाढ़ी कमाई गंवाने वाले पीड़ितों के लिए राहत की खबर है, सरकार उन्हें उनकी रकम लौटाएगी. इसके लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एग्री गोल्ड ग्रुप ऑफ कंपनीज की 3,339 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है. ईडी ने एक बयान में बताया कि यह मामला एग्री गोल्ड समूह की कंपनियों से जुड़ा हुआ है, जिस पर आरोप है कि उसने “उच्च रिटर्न” या आवासीय भूखंड का झांसा देकर लगभग 19 लाख ग्राहकों से रियल एस्टेट में निवेश के नाम पर कुल 32 लाख खातों में राशि जमा करायी.
130 से ज्यादा फर्जी कंपनियां बनाईं
बयान के अनुसार, ईडी ने पाया कि एग्री गोल्ड समूह ने रियल एस्टेट व्यवसाय की आड़ में एक “फर्जी” निवेश योजना चलाई, जिसके लिए 130 से अधिक कंपनियां बनाई गईं. बयान में कहा गया है, “ये कंपनियां जमाकर्ताओं से ‘भूखंडों के लिए अग्रिम राशि’ के रूप में राशि एकत्र करती थीं, जबकि कंपनी के पास इसके अनुरूप भूमि उपलब्ध नहीं थी. उक्त बिजनेस मॉड्यूल पर अमल करके आरोपियों ने लाखों भोले-भाले लोगों को लालच दिया और उनसे राशि प्राप्त की.”
इसमें कहा गया है, “एकत्रित राशि बाद में जमाकर्ताओं की ‘जानकारी के बिना’ बिजली, ऊर्जा, डेयरी, मनोरंजन, स्वास्थ्य (आयुर्वेदिक) जैसे विभिन्न उद्योगों में ‘लगाई गई’ तथा कंपनियों ने नकद या अन्य स्वरूप में जमा राशि लौटाने में ‘चूक’ की.” बयान के मुताबिक, मामले में ईडी ने 2018 में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, ओडिशा और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में दर्ज “कई” प्राथमिकी का संज्ञान लेते हुए धन शोधन संबंधी जांच शुरू की थी.
ठगी के लिए बनाए हजारों कमीशन एजेंट
ईडी ने दावा किया, “जांच में पाया गया कि एग्री गोल्ड समूह ने लोगों को लुभाने के लिए हजारों कमीशन एजेंट नियुक्त किए थे और वे 32 लाख से अधिक निवेशक खातों से लगभग 6,380 करोड़ रुपये इकट्ठा करने में कामयाब रहे.” एजेंसी ने जांच के दौरान 4,141.2 करोड़ रुपये की संपत्ति भी जब्त की, तीन लोगों को गिरफ्तार किया और दो आरोपपत्र दायर किए. अदालत ने 21 फरवरी को क्षतिपूर्ति के लिए ईडी की याचिका स्वीकार कर ली, जिससे पीड़ितों को कुर्क की गई 3,339 करोड़ रुपये की संपत्तियों को लौटाने का मार्ग प्रशस्त हो गया.
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