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SAHARA में रकम लगाने वालों के लिए सुप्रीम कोर्ट से आई खुशखबरी, जल्द मिलेगा पैसा
सुप्रीम कोर्ट ने उस आवेदन को स्वीकार कर लिया है जिसमें SEBI-SAHARA फंड से जमाकर्ताओं को 5000 करोड़ रुपये लौटाने की बात कही गई थी. ये 1.1 करोड़ लोगों के लिए बड़ी राहत है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
SEBI-SAHARA विवाद में पैसा जमा करने वाले करोड़ों जमाकर्ताओं के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने बड़ी राहत दी है. सुप्रीम कोर्ट में केन्द्र सरकार ने एक आवेदन दिया था जिसमें कहा गया था कि जमाकर्ताओं को सेबी सहारा फंड से 5000 करोड़ रुपये वापस किए जाए, उसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है. सुप्रीम कोर्ट ने पैसे की वापसी की निगरानी करने के लिए एक जज को भी नियुक्त कर दिया है. ऐसे 1.1 करोड़ जमाकर्ता हैं जिन्हें ये पैसा वापस लौटाया जाएगा.
किस बेंच ने स्वीकार की याचिका
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमआर शाह और सीटी रविकुमार ने इस मामले की सुनवाई करने के बाद केन्द्र सरकार के उस आवेदन को स्वीकार कर लिया है, जिसमें सहारा में पैसा जमा कराने वालों को SEBI-SAHARA फंड से पैसा लौटाए जाने की बात कही गई थी. केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करते हुए कहा था कि वो SEBI-SAHARA फंड से जमाकर्ताओं को 5000 करोड़ वापस लौटाए जाएं. सबसे दिलचस्प बात ये है कि सहारा ने सेबी के पास 24,000 करोड़ रुपये जमा किए गए हैं.
आखिर कहां से आए ये पांच हजार करोड़
दरअसल वर्ष 2012 में, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए जमाकर्ताओं को पैसा लौटाने के लिए एक फंड जनरेट किया था. सुप्रीम कोर्ट के अनुसार सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉरपोरेशन लिमिटेड और सहारा हाउसिंग इंडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड सहित दो सहारा फर्मों को निर्देश दिया गया था कि वे निवेशकों को पैसे वापस करने के लिए एक एस्क्रो अकाउंट बनाएं. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ये एसक्रो एकाउंट बनाया भी गया और उसमें 24000 करोड़ रुपये जमा भी हुए. यह वही खाता है जिसमें से केंद्र ने 5000 रुपये का मौजूदा आवंटन मांगा है.
आखिर कौन करेगा रिपेमेंट की निगरानी
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सुनवाई में कहा है कि जमाकर्ताओं को चुकाने की प्रक्रिया की निगरानी भी की जाएगी. इसके लिए कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस आर सुभाष रेड्डी को नियुक्त कर दिया है. खंडपीठ ने कहा कि सहारा समूह की सहकारी समितियों के माध्यम से राशि का भुगतान किया जाएगा. केन्द्र का ये आवेदन उस जनहित याचिका के संबंध में आया है जिसमें चिट फंड कंपनियों के माध्यम से सहारा समूह द्वारा ठगे गए पैसों को जमाकर्ताओं को वापस देने की मांग की गई थी.
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