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Go First को मिला आखिरी 90 दिन का समय, उसके बाद शुरू हो जाएगी ये कार्रवाई
गो फर्स्ट ने सेंट्रल बैंक से 2000 करोड़ रुपये लिया जिसने इस लोन को एनपीए घोषित कर दिया है जबकि आईडीबीआई से 1200 करोड़ लिया है जो इस प्रक्रिया को शुरू करने जा रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
दिवालिया प्रक्रिया से जूझ रही Go First को अब एनसीएलटी ने आखिरी 90 दिनों का समय दे दिया है. कोर्ट ने कहा है कि वो इस मामले में कोई समाधान अदालत के सामने लेकर आए अन्यथा वो दिवालिया प्रक्रिया को आगे बढ़ाने को लेकर काम करना शुरू कर देगी. 90 दिनों की ये अवधि 6 नवंबर 2023 से शुरु हो रही है जबकि ये 4 फरवरी को खत्म होगी.
गो फर्स्ट ने दी है ये जानकारी
इस मामले में गो फर्स्ट के रेजोल्यूशन अधिकारी ने बताया कि एयरलाइन के लिए एक बोलीदाता है. एनसीएलटी में गो फर्स्ट के लिए समाधान पेश करने की आखिरी तारीख 21 नवंबर थी लेकिन इस तारीख तक किसी भी कंपनी का नाम एनसीएलटी के पास नहीं पहुंचा. उन्होंने ये भी कहा कि सीओसी ने 100 प्रतिशत वोट के साथ विस्तार के लिए एक प्रस्ताव पास किया है. वहीं डीजीएसीए ने गो फर्स्ट को विमान पट्टे पर देने वाली कंपनी के लिए राहत की खबर ये दी थी कि वो उन्हें अपंजीकृत कर सकता है. इससे विमान दिवालिया प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे. इससे पहले जुलाई में DGCA ने कहा था कि उसे 54 विमानों की क्षमता वाले गो फर्स्ट के विमानों के पंजीकरण को रद्द करने के लिए आवेदन प्राप्त हुए हैं.
3 मई को बंद हो गई थी एयरलाइन
गो फर्स्ट का संचालन 3 मई को बंद हो गया था. कंपनी ने इससे पहले ही 2 मई को एनसीएलटी में दिवालिया प्रक्रिया समाधान के लिए सीआरपी के लिए अपनी याचिका दायर कर दी थी. ट्रिब्यूनल ने 10 मई को इस याचिका को स्वीकार करते हुए आरपी की नियुक्ति कर दी थी. गो फर्स्ट को कई प्रमुख बैंकों का कर्ज चुकाना है. इन बैंकों में सेंट्रल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, आईडीबीआई बैंक और डॉयचे बैंक शामिल हैं. कंपनी को इनका 6521 करोड़ रुपये चुकाना है.
इस बैंक ने कर दिया था एनपीए
सेंट्रल बैंक ने गो फर्स्ट को 2000 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है. इसी कर्ज को ना चुकाने के कारण बैंक अक्टूबर में इसे एनपीए(नॉन परफॉर्मिंग एसेट) घोषित कर चुका है. इसी तरह बैंक ऑफ बड़ौदा जिसका 1200 करोड़ रुपये बकाया है उसने एनपीए घोषित करने का निर्णय ले लिया है. वहीं एनसीएलटी ने कहा था कि पट्टे समाप्त करने के बाद भी उनकी संपत्ति उनसे ली जा सकती है. इस निर्णय के खिलाफ विमान मुहैया कराने वाली कंपनियां एनसीएलटी के इस आदेश के खिलाफ राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील दायर कर चुकी है.
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