होम / कोर्ट कचहरी / Gensol घोटाला: बैंकों पर SEBI की चुप्पी निगरानी व्यवस्था पर उठाती है सवाल

Gensol घोटाला: बैंकों पर SEBI की चुप्पी निगरानी व्यवस्था पर उठाती है सवाल

Gensol को भारी भरकम लोन देने वाले बैंकों की भूमिका पर SEBI की गहरी चुप्पी यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या SEBI वाकई सरकारी बैंकों को जवाबदेह बनाने और जनता के पैसे की रक्षा करने के लिए गंभीर है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

15 अप्रैल 2025 को, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एक सख्त अंतरिम आदेश जारी किया. SEBI के Whole-Time Member अश्विनी भाटिया ने Gensol Engineering के प्रमोटर अनमोल सिंह जग्गी और पुनीत सिंह जग्गी को कड़ी फटकार लगाते हुए उन्हें शेयर बाजार से बाहर कर दिया. उन पर कंपनी में कॉरपोरेट गवर्नेंस के खुलेआम उल्लंघन और बड़े पैमाने पर फंड की हेराफेरी के आरोप हैं.

इस आदेश के साथ ही Gensol की 1:10 स्टॉक स्प्लिट योजना को भी रोक दिया गया, जिससे कंपनी की वित्तीय गड़बड़ियों पर गंभीर चिंता जाहिर हुई. लेकिन जिस बात पर SEBI ने अब तक चुप्पी साध रखी है, वह है उन बैंकों की भूमिका, जिन्होंने Gensol को भारी-भरकम लोन दिए. यह चुप्पी इस सवाल को जन्म देती है कि क्या SEBI सरकारी बैंकों को जवाबदेह ठहराने और जनता के पैसे की सुरक्षा के लिए वाकई गंभीर है?

Gensol घोटाला: फंड की हेराफेरी की कहानी

कभी क्लीन एनर्जी की मिसाल मानी जाने वाली Gensol Engineering अब लालच और धोखाधड़ी की चेतावनी बन गई है. जून 2024 में मिली एक शिकायत के बाद SEBI ने जांच शुरू की और पाया कि जग्गी बंधुओं ने इस लिस्टेड कंपनी को अपनी "पर्सनल तिजोरी" की तरह इस्तेमाल किया. वित्त वर्ष 2022 से 2024 के बीच, Gensol ने पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) और इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (IREDA) से 977.75 करोड़ रुपये के लोन लिए. यह पैसा 6,400 इलेक्ट्रिक गाड़ियां (EVs) खरीदने के लिए था, जिन्हें BluSmart Mobility (जो कि जग्गी बंधुओं की ही दूसरी कंपनी है) को लीज पर देना था.

लेकिन सच्चाई यह निकली कि सिर्फ 4,704 गाड़ियां खरीदी गईं. करीब 262.13 करोड़ रुपये कहां गए, इसका कोई हिसाब नहीं मिला. SEBI का आरोप है कि इस पैसे का इस्तेमाल प्रमोटरों ने अपने शौक पूरे करने में किया — जैसे गुरुग्राम के DLF Camellias में 42.94 करोड़ का फ्लैट, 26 लाख रुपये का गोल्फ सेट, और रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर. घोटाला और गहरा तब हुआ जब Gensol ने CARE Ratings और ICRA जैसी रेटिंग एजेंसियों को झूठे “Conduct Letters” और “No Objection Certificates” (NOC) दिए, जिनमें यह दिखाया गया था कि कंपनी समय पर PFC और IREDA के लोन चुका रही है.

जब रेटिंग एजेंसियों ने खुद बैंकों से पुष्टि की, तो दोनों ने ऐसे किसी भी दस्तावेज को जारी करने से इनकार कर दिया. इसके बाद मार्च 2025 में Gensol की क्रेडिट रेटिंग गिरकर "D" हो गई. इस धोखाधड़ी को लेकर अब कई एजेंसियां जांच कर रही हैं. PFC ने 22 अप्रैल 2025 को दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EoW) में शिकायत दर्ज करवाई. वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 24 अप्रैल को पुणीत सिंह जग्गी को विदेशी मुद्रा कानून (FEMA) के तहत हिरासत में लिया.

SEBI की बड़ी चूक: बैंकरों पर कोई सवाल नहीं

SEBI ने अपने आदेश में जहां जग्गी बंधुओं की कड़ी आलोचना की और छोटे निवेशकों की सुरक्षा के लिए Gensol का स्टॉक स्प्लिट रोक दिया, वहीं इस पूरे घोटाले में बैंकों की भूमिका को नजरअंदाज कर दिया. Power Finance Corporation (PFC) और Indian Renewable Energy Development Agency (IREDA) — जो कि सरकारी क्षेत्र की एनबीएफसी हैं और क्रमशः बिजली मंत्रालय और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के तहत आती हैं — ने Gensol को 663.89 करोड़ और 313.86 करोड़ रुपये का लोन दिया, लेकिन इस पैसे का कहां और कैसे इस्तेमाल हुआ, इसकी सही तरीके से निगरानी नहीं की.

SEBI की जांच में पता चला कि Gensol की गड़बड़ियां एक साल से भी ज्यादा समय तक किसी की नजर में नहीं आईं, लेकिन अश्विनी भाटिया के 29 पन्नों के आदेश में बैंकों की लापरवाही या जांच प्रक्रिया की कोई आलोचना नहीं की गई. इससे विश्लेषकों और निवेशकों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या सरकारी बैंकों को जानबूझकर जांच से बाहर रखा गया? PFC ने जनवरी 2023 में FAME और PM E-bus Seva जैसी सरकारी योजनाओं के तहत 633 करोड़ रुपये मंजूर किए, जिनमें से 352 करोड़ 3,000 इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए दिए गए। लेकिन सिर्फ 2,741 गाड़ियां ही PFC के नाम पर गिरवी रखी गईं, जबकि 6,400 गाड़ियां खरीदी जानी थीं.

IREDA ने बाकी गाड़ियों के लिए फंड दिया, लेकिन Gensol ने कुल मिलाकर सिर्फ 4,704 गाड़ियां खरीदीं. इस हिसाब से IREDA को भी 1,437 गाड़ियों की कमी का सामना करना पड़ सकता है. इन कमियों के बावजूद, दोनों ही बैंकों ने फंड देना जारी रखा. PFC ने 31 जनवरी 2025 तक नियमित भुगतान होने की बात कही, लेकिन फरवरी और मार्च की किस्तों के लिए उसे "Debt Service Reserve Account" (DSRA) का सहारा लेना पड़ा. SEBI ने इन सारी लापरवाहियों पर कुछ भी नहीं कहा, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या सार्वजनिक क्षेत्र की एनबीएफसी की लोन देने की प्रक्रिया सच में मजबूत और भरोसेमंद है?

PFC और IREDA पर SEBI की देर से कार्रवाई: बहुत कम, बहुत देर?

SEBI ने बैंकों की भूमिका पर जो देरी से कदम उठाए, उस पर अब तीखी आलोचना हो रही है. जनवरी 2025 में जब क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने फर्जी दस्तावेज़ और फंड की गड़बड़ी पकड़ी, तभी से सबूत सामने आने लगे थे. लेकिन SEBI ने अपना अंतरिम आदेश अप्रैल के मध्य में जारी किया. इस बीच, PFC और IREDA पर कोई सीधी कार्रवाई नहीं की गई. PFC ने खुद 22 अप्रैल 2025 को दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EoW) में शिकायत दर्ज करवाई. इस देरी से हालात और बिगड़ गए. अब PFC को 307 करोड़ रुपये की बकाया रकम वसूलने की कोशिश करनी पड़ रही है, जबकि उसके पास सही जमानत भी नहीं है. IREDA का भी लगभग 600 करोड़ रुपये का लोन खतरे में है, और सोशल मीडिया (X) पर लोग चिंता जता रहे हैं कि IREDA ने इन डूबते लोन के लिए कोई तैयारी नहीं की.

MarketWatch India के वित्तीय विश्लेषक रोहन शर्मा कहते हैं, “SEBI को पहले ही PFC और IREDA की लापरवाही पर सवाल उठाने चाहिए थे. जब सरकारी बैंकों के जरिए जनता का पैसा दिया जाता है, तो उनकी ज़िम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी होनी चाहिए.” आलोचकों का कहना है कि SEBI का यह देरी भरा और सिर्फ प्रतिक्रिया देने वाला रवैया बड़ी समस्या को उजागर करता है — कि सरकारी NBFC पर निगरानी कमजोर है, जिससे टैक्स देने वालों का पैसा खतरे में पड़ सकता है.

बड़ी तस्वीर: क्या यह एक सिस्टम की विफलता है?

Gensol घोटाला भारत की वित्तीय निगरानी व्यवस्था में गहरी खामियों को उजागर करता है. PFC और IREDA जैसी सरकारी संस्थाएं Gensol की "स्वच्छ ऊर्जा" की कहानी से प्रभावित होकर लोन देती रहीं, लेकिन यह नहीं देखा कि उस पैसे का सही उपयोग हो रहा है या नहीं. SEBI के आदेश में यह भी सामने आया कि Gensol ने Go-Auto Pvt. Ltd., Capbridge Ventures और Wellray Solar Industries जैसी कंपनियों के जरिए पैसे को इधर-उधर घुमाया. इसके बावजूद बैंकों ने इन चेतावनी संकेतों को नज़रअंदाज़ कर दिया. उदाहरण के तौर पर, PFC से मिले लोन में से 96.69 करोड़ रुपये प्रमोटरों की जुड़ी कंपनियों में भेजे गए और 37.5 करोड़ रुपये सीधे अनमोल जग्गी के निजी खाते में चले गए.

ऐसी घटनाएं दिखाती हैं कि बैंकों की ओर से रियल-टाइम निगरानी नहीं हो रही थी, जिससे सरकारी बैंकों पर लोगों का भरोसा डगमगाने लगता है. साल 2025 में Gensol का शेयर 86% गिर चुका है और 22 अप्रैल को इसका दाम 130.15 रुपये तक आ गया — जो कि 52 हफ्तों में सबसे कम है. इससे कंपनी की मार्केट वैल्यू में करीब 3,800 करोड़ रुपये की कमी आ गई है. कंपनी का पुणे EV प्लांट, जिसे 30,000 प्री-ऑर्डर्स का हब बताया गया था, NSE की जांच में लगभग बंद जैसा मिला — वहां सिर्फ 2-3 कर्मचारी और बहुत कम बिजली की खपत पाई गई. इन खुलासों से साफ होता है कि Gensol के दावे खोखले थे और साथ ही, SEBI की ओर से बैंकों की ज़िम्मेदारी पर चुप्पी इस बात को और पुख्ता करती है कि हमारी पूरी वित्तीय व्यवस्था में कॉरपोरेट गवर्नेंस को लागू कराने में बड़ी विफलता हुई है.

जवाबदेही की मांग

Gensol धोखाधड़ी मामला सिर्फ प्रमोटरों पर बैन लगाने या स्टॉक स्प्लिट रोकने से खत्म नहीं होता. अब जरूरी है कि SEBI तुरंत PFC और IREDA की लापरवाही की जांच करे — क्योंकि इन्हीं सरकारी बैंकों की ढीली जांच प्रक्रिया ने इस घोटाले को जन्म दिया. निवेशकों और टैक्स चुकाने वाले आम लोगों को यह जानने का हक है कि जब इन NBFCs को जनता के पैसे की जिम्मेदारी दी गई थी, तो उन्होंने Gensol के लोन का सही इस्तेमाल क्यों नहीं देखा. हालांकि ED की छापेमारी, कॉरपोरेट मंत्रालय की जांच और नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी (NFRA) का ऑडिट एक अच्छी शुरुआत हैं, लेकिन SEBI की अब तक की चुनिंदा कार्रवाई से ऐसा लगता है जैसे वह बड़े संस्थानों की गलतियों को नजरअंदाज कर रहा है.

अब जब Gensol की सच्चाई सामने आ रही है, SEBI यह गलती नहीं कर सकता कि वह उन बैंकों को छोड़ दे जिन्होंने इस संकट को बढ़ाया. PFC और IREDA की निगरानी में हुई खामियों पर जल्दी और सख्त कार्रवाई बहुत जरूरी है — तभी लोगों का भारत की वित्तीय व्यवस्था पर भरोसा लौटेगा और यह सुनिश्चित होगा कि जनता का पैसा बर्बाद न हो. जब तक ऐसा नहीं होता, Gensol केस एक कड़वी याद बना रहेगा — जो यह दिखाता है कि भारत की स्वच्छ ऊर्जा योजनाओं और निवेशकों के विश्वास को कैसे कुछ चूकें बड़ा नुकसान पहुंचा सकती हैं.

(लेखक- पलक शाह, "द मार्केट माफिया - क्रॉनिकल ऑफ इंडिया’s हाई-टेक स्टॉक मार्केट स्कैंडल एंड द कबाल दैट वेंट स्कॉट-फ्री" किताब के लेखक हैं. पलक शाह पिछले दो दशकों से मुंबई में पत्रकारिता कर रहे हैं. उन्होंने द इकोनॉमिक टाइम्स, बिजनेस स्टैंडर्ड, द फाइनेंशियल एक्सप्रेस और द हिंदू बिजनेस लाइन जैसे प्रमुख पिंक पेपरों में काम किया है. वह 19 साल की उम्र में अपराध रिपोर्टिंग से जुड़े थे, लेकिन कुछ सालों में इस क्षेत्र में काम करने के बाद उन्हें यह महसूस हुआ कि अपराध की संरचना बदल चुकी थी और वह संगठित गिरोह, जैसा कि मुंबई ने 80 के दशक में देखा था, अब अस्तित्व में नहीं थे.  'व्हाइट मनी' अर्थव्यवस्था की जटिलताओं को समझने के उनके जुनून ने पलक को वित्त और नियामकों की दुनिया में पहुंचा दिया.)
 


टैग्स
सम्बंधित खबरें

महादेव बेटिंग ऐप केस: स्काईएक्सचेंज की कमाई से हुई थी Ebix डील? ED का बड़ा दावा

जांच एजेंसी का कहना है कि अवैध धन को विदेशी पोर्टफोलियो निवेश, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बॉन्ड, क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट और अन्य विदेशी निवेश माध्यमों के जरिए भारत में लाया गया.

16-July-2026

महादेव बेटिंग केस: ईबिक्स चेयरमैन विकास गर्ग को राहत नहीं, कोर्ट ने 24 घंटे की ट्रांजिट रिमांड दी

दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने मंगलवार को ED की याचिका स्वीकार करते हुए विकास गर्ग की 24 घंटे की ट्रांजिट रिमांड मंजूर की. एजेंसी ने अदालत से कहा था कि रायपुर स्थित विशेष PMLA अदालत में पेश करने के लिए गर्ग को वहां ले जाना जरूरी है.

14-July-2026

NEET-UG री-एग्जाम से पहले टेलीग्राम पर रोक बरकरार, दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के फैसले को दी मंजूरी

NEET-UG 2026 की पुनर्परीक्षा 21 जून को प्रस्तावित है. ऐसे में सरकार ने किसी भी संभावित पेपर लीक या परीक्षा संबंधी अनियमितता को रोकने के लिए टेलीग्राम पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला किया था. यह प्रतिबंध 22 जून तक लागू रहेगा.

19-June-2026

यस बैंक लोन असाइनमेंट मामले में ED का एक्शन, पूर्व कर्मचारी जांच के घेरे में; 17 ठिकानों पर छापेमारी

इस मामले में ED दिल्ली, मुंबई और खंडाला में एक साथ रेड, लोन ट्रांजैक्शंस में वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही है.

17-June-2026

लाल किला विस्फोट मामले में NIA का आरोपपत्र दाखिल, अल-कायदा की साजिश का दावा

एनआईए का कहना है कि यह नेटवर्क देश में बड़े पैमाने पर हमलों की योजना बना रहा था, लेकिन समय रहते इसे रोक दिया गया. अब तक इस मामले में 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

16-May-2026


बड़ी खबरें

होम लोन लेने वालों के लिए खुशखबरी! बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने घटाई ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस भी माफ

अगर आप निकट भविष्य में घर खरीदने या नया होम लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो बैंक ऑफ महाराष्ट्र का यह सीमित अवधि का ऑफर आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.

2 hours ago

भारत की फैक्ट्री ग्रोथ पड़ी धीमी, जुलाई में PMI फिसलकर 53.5 पर पहुंचा

नए ऑर्डर और भर्ती में सुस्ती, जुलाई में मैन्युफैक्चरिंग PMI अगस्त 2021 के बाद सबसे निचले स्तर पर आ गया है.

26 minutes ago

एक सरल जीवन की गरिमा

लेखक बृज बख्शी के अनुसार, इतिहास और हमारे आसपास की दुनिया हमें बताती है कि समाज कुछ चुनिंदा प्रसिद्ध लोगों के सहारे नहीं, बल्कि उन लाखों साधारण लोगों के कारण टिके रहते हैं, जो अपने दायित्वों को निरंतरता और समर्पण के साथ निभाते हैं.

1 hour ago

Happy Birthday Sunil Grover: 'गुत्थी' से बने विज्ञापन जगत के 'मार्केटिंग गोल्ड', जानें कितनी है नेटवर्थ

आज के दौर में, जब विज्ञापन जगत तेजी से इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग की ओर बढ़ रहा है, सुनील ग्रोवर अपनी अभिनय क्षमता और किरदारों के दम पर अलग पहचान बनाए हुए हैं. उनकी खासियत यह है कि दर्शक उनके निभाए किरदार को भी याद रखते हैं और उससे जुड़े ब्रांड को भी नहीं भूलते.

2 hours ago

SEBI के आदेश से ₹3,144 करोड़ की फंड जुटाने की योजना पर नहीं पड़ेगा असर: ZEE

कंपनी के अनुसार, इस फंड जुटाने का उद्देश्य उसकी वित्तीय स्थिति को और मजबूत करना तथा हितधारकों के लिए दीर्घकालिक मूल्य सृजित करना है.

3 hours ago