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निवेश के नाम पर ₹49,000 करोड़ की ठगी : PACL घोटाले का मास्टरमाइंड गुरनाम सिंह गिरफ्तार

10 राज्यों में 5 करोड़ से ज्यादा निवेशकों को शिकार बनाने वाले PACL घोटाले के मास्टरमाइंड गुरनाम सिंह को UP की आर्थिक अपराध शाखा ने गिरफ्तार कर लिया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

उत्तर प्रदेश की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने देश के सबसे बड़े निवेश घोटालों में से एक के मास्टरमाइंड गुरनाम सिंह (69) को पंजाब के रूपनगर जिले से गिरफ्तार कर लिया है. गुरनाम सिंह पर्ल्स एग्रो-टेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PACL) का डायरेक्टर था और उस पर करीब 49,000 करोड़ रुपये की ठगी का आरोप है.

बिना जमीन दिए बांटे सिर्फ बांड

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, PACL ने देशभर में जमीन में निवेश के नाम पर लगभग 5 करोड़ लोगों से पैसे जुटाए. इनमें से बड़ी संख्या उत्तर प्रदेश के निवेशकों की है, जहां कंपनी ने सिर्फ बांड की रसीदें दीं, न जमीन दी गई, न कोई रिटर्न.

CBI और ED की भी जांच जारी

इस घोटाले को लेकर CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) पहले से ही केस दर्ज कर चुके हैं. जांच एजेंसियों ने यह कार्रवाई भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की रिपोर्ट और निवेशकों की शिकायतों के आधार पर शुरू की थी. कानपुर EOW थाने में इस घोटाले से जुड़ा मामला नंबर 1/18 दर्ज किया गया था, जिसमें 10 लोगों के नाम हैं. इनमें से चार पहले ही जेल में हैं और बाकी आरोपियों की तलाश जारी है.

PACL में गुरनाम सिंह की भूमिका

जांच में सामने आया कि PACL के संस्थापक निर्मल सिंह भंगू (अब दिवंगत) ने गुरनाम सिंह को डायरेक्टर नियुक्त किया था. अधिकारियों के अनुसार, गुरनाम सिंह ने यूपी, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार और अन्य राज्यों में बिना किसी वैध अनुमति के वित्तीय गतिविधियाँ चलाईं और इस घोटाले को फैलाने में अहम भूमिका निभाई.

कैसे रचा गया यह घोटाला?

PACL की शुरुआत 1996 में जयपुर से "गुरुवंत एग्रो-टेक" नाम से हुई थी. बाद में 2011 में इसका नाम बदलकर PACL रखा गया. कंपनी ने RBI के NBFC पंजीकरण के बिना ही बड़े पैमाने पर जनता से पैसे इकट्ठा किए.

उत्तर प्रदेश में महोबा, सुल्तानपुर, फर्रुखाबाद और जालौन जैसे जिलों में ब्रांच खोलकर कंपनी ने किस्तों और आकर्षक रिटर्न का लालच दिया. EOW के अनुसार, सिर्फ यूपी में ही 19,000 करोड़ रुपये से अधिक जमा किए गए.

असल में थी पोंजी स्कीम

EOW की डीजी नीरा रावत ने खुलासा किया कि PACL पोंजी स्कीम की तरह काम कर रही थी. ज्यादा रिटर्न का लालच देकर लोगों को जोड़ा जाता था और उनसे कहा जाता कि वे दो और निवेशक लेकर आएं. इस पिरामिड स्कीम में एजेंटों को मोटा कमीशन मिलता था, जिससे वो अपने जान-पहचान वालों को भी इसमें शामिल करते थे. कंपनी ने बड़े पैमाने पर सेमिनार आयोजित किए ताकि अधिक से अधिक लोगों को अपने जाल में फंसाया जा सके.

ED की चार्जशीट में खुलासे

प्रवर्तन निदेशालय ने हाल ही में दिल्ली की विशेष PMLA कोर्ट में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है. जांच में सामने आया कि PACL ने निवेशकों के पैसे को शेल कंपनियों और सहायक फर्मों में घुमाया. ED के अनुसार, PACL के संस्थापक भंगू के दामाद हरसतिंदर पाल सिंह हायर ने इस पैसे से मुंबई, पंजाब और हरियाणा में संपत्तियाँ खरीदीं. उन्हें वैध दिखाने की कोशिश की गई. हायर को 21 मार्च को गिरफ्तार किया गया था और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में है.

शुरुआत एक दूध कारोबारी से

इस घोटाले की नींव रखने वाला निर्मल सिंह भंगू, पंजाब के बरनाला का रहने वाला था और पहले दूध का व्यवसाय करता था. बाद में उसने गोल्डन फॉरेस्ट इंडिया लिमिटेड जैसी कंपनियों में काम करके जमीन निवेश स्कीमों में कदम रखा. PACL के ज़रिए उसने दावा किया कि वह किसानों और व्यापारिक उपयोग के लिए ज़मीन खरीदेगा और निवेशकों को भारी मुनाफा देगा. वास्तव में, निवेशकों को सिर्फ बांड की रसीदें दी गईं, जमीन कभी दी ही नहीं गई.

कितने लोग हुए प्रभावित?

EOW के अनुसार, सिर्फ उत्तर प्रदेश में करीब 50 लाख लोग इस घोटाले से प्रभावित हुए हैं. इसके अलावा असम, राजस्थान, दिल्ली, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, केरल, बिहार और छत्तीसगढ़ में भी लाखों लोग इसके शिकार बने हैं. गुरनाम सिंह की गिरफ्तारी के बाद अब EOW और अन्य एजेंसियाँ बाकी आरोपियों की तलाश और अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों को ज़ब्त करने की प्रक्रिया में जुटी हैं.


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